मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले ने एक बार फिर लॉरेंस बिश्नोई गैंग को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. वारदात के बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम से जिम्मेदारी लेने का दावा सामने आया है. हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. लेकिन अगर जांच के दौरान पुलिस को लॉरेंस से पूछताछ करने की जरूरत पड़ती है, तो उसके सामने बड़ी चुनौती होगी.
लॉरेंस के मामले में यह व्यवस्था इसलिए भी अहम है, क्योंकि उसके खिलाफ अलग-अलग राज्यों में मामले दर्ज हैं. पुलिस को जरूरी कानूनी प्रक्रिया अपनानी पड़ती है और जेल के भीतर पूछताछ के लिए भी अदालत से अनुमति लेनी होती है. इसके अलावा साबरमती में बंद लॉरेंस को जेल से बाहर ले जाने पर विशेष कानूनी पाबंदियां लागू हैं. ऐसे में किसी दूसरे राज्य की पुलिस के लिए उसे पूछताछ के लिए अपने साथ ले जाना सामान्य प्रक्रिया जैसा नहीं है.
मुंबई पुलिस के डिप्टी कमीश्नर राज तिलक रोशन ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर टाइगर पर हमले के आरोपियों को गिरफ्तारी को लेकर विस्तृत जानकारी दी. इस दौरान जब उनसे लॉरेंस बिश्नोई और अनमोल बिश्नोई की कस्टडी के संबंध में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार हम अदालतों द्वारा तय की गई SOP का पालन करेंगे.
यह भी पढ़ें: दाऊद का दौर गया, लॉरेंस का खौफ आया… मुंबई में अंडरवर्ल्ड की नई दस्तक?
सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के बाद बदला ठिकाना
लॉरेंस बिश्नोई पहले दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद था. सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के बाद जब पंजाब पुलिस उसे पूछताछ के लिए पंजाब ले गई, तब लॉरेंस ने अपनी जान को खतरा होने की आशंका जताई थी. इसके बाद उसे अहमदाबाद की साबरमती जेल में शिफ्ट कर दिया गया. साबरमती जेल में शिफ्ट होने के बाद लॉरेंस की हिरासत और दूसरे राज्यों में दर्ज मामलों की जांच को लेकर एक खास व्यवस्था लागू हुई.
गृह मंत्रालय ने साल 2023 में सीआरपीसी की धारा 268(1) के तहत आदेश जारी किया था. इस आदेश के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई को पूछताछ या उसके खिलाफ दर्ज किसी दूसरे मामले के सिलसिले में साबरमती जेल से कहीं और ट्रांसफर नहीं किया जाएगा.
यानी देश के किसी भी राज्य की पुलिस को किसी मामले में लॉरेंस से पूछताछ करनी है, तो पुलिस को पहले अदालत से विशेष अनुमति लेनी होगी. पुलिस जेल से उसे बाहर नहीं ले जा सकती, बल्कि उसे साबरमती जेल के भीतर जाकर ही उससे पूछताछ करनी होगी. यह आदेश मूल रूप से अगस्त 2024 तक के लिए था, लेकिन सूत्रों के अनुसार इसे आगे भी एक्सटेंड कर दिया गया है.
गृह मंत्रालय के आदेश ने कैसे बढ़ाई पुलिस की चुनौती?
लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में मामले दर्ज होने के कारण कई बार पुलिस को उससे पूछताछ की जरूरत पड़ सकती है. लेकिन साबरमती जेल से बाहर ले जाने पर रोक होने के चलते जांच एजेंसियों को अपनी रणनीति उसी हिसाब से बनानी पड़ती है.
अगर किसी वारदात में लॉरेंस की भूमिका या उसके गैंग से जुड़े लोगों के संपर्क की जांच करनी हो, तो पुलिस को जेल में पूछताछ के लिए कानूनी अनुमति लेनी पड़ सकती है. इसके बाद जेल के भीतर उससे सवाल-जवाब किए जा सकते हैं. इस तरह जांच का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं होता, लेकिन पुलिस को तय प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है.
यह भी पढ़ें: 'टाइल-पत्थर लगाना सीख रहा था, किसी ने...', टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में पकड़े गए नाबालिग के दिव्यांग पिता की जुबानी
जेल में बंद लॉरेंस, लेकिन गैंग की गतिविधियों पर सवाल
गृह मंत्रालय द्वारा यह कड़ा आदेश और प्रतिबंध इसलिए लागू किए गए थे ताकि लॉरेंस बिश्नोई और जेल के बाहर बैठे उसके आपराधिक सिंडिकेट के बीच का संपर्क पूरी तरह से टूट जाए. लेकिन हैरानी की बात यह है कि मंत्रालय के इन तमाम आदेशों और सुरक्षा घेरे के बावजूद, लॉरेंस और उसके गैंग का कनेक्शन आज तक नहीं कट पाया है. यदि जेल के अंदर उसका बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह कटा होता, तो लॉरेंस गैंग इस तरह से जेल में बंद रहते हुए भी किसी की सुपारी लेने या कारोबारियों व मशहूर हस्तियों को धमकाने जैसी वारदातों को अंजाम देने में कामयाब नहीं हो पाता.
टाइगर श्रॉफ केस में क्या होगी पुलिस की रणनीति?
टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में पुलिस के सामने सबसे पहले चुनौती यह पता लगना है कि इस केस का लॉरेंस से डायरेक्ट संबंध है या नहीं. अगर जांच में लॉरेंस बिश्नोई से पूछताछ की जरूरत सामने आती है, तो पुलिस को साबरमती जेल में उससे सवाल-जवाब करने के लिए अदालत से अनुमति लेनी होगी. इसके बाद ही तय कानूनी प्रक्रिया के तहत पूछताछ की जा सकेगी.
यहां सबसे अहम बात यह है कि किसी गैंग के नाम से जिम्मेदारी लेने का दावा सामने आना और उस गैंग या उसके सरगना की भूमिका साबित होना दो अलग-अलग बातें हैं. पुलिस को यह पता लगाना होगा कि फायरिंग के पीछे कौन लोग थे, वारदात की योजना कैसे बनी और क्या इसका संबंध वास्तव में लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क से है.
शम्स ताहिर खान