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गाजा से सूडान और नेपाल तक, दुनियाभर के 50 करोड़ बच्चे स्कूल से दूर

गाजा, सूडान और नेपाल समेत दुनिया के कई हिस्सों में 50 करोड़ से ज्यादा बच्चे शिक्षा से वंचित हैं. युद्ध, विस्थापन और जलवायु परिवर्तन के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है. शिक्षा के लिए 3.5 अरब डॉलर की फंडिंग जुटाई गई है.

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गाजा से सूडान और नेपाल तक 50 करोड़ से ज्यादा बच्चे शिक्षा से वंचित.
गाजा से सूडान और नेपाल तक 50 करोड़ से ज्यादा बच्चे शिक्षा से वंचित.

गाजा से सूडान और नेपाल तक 50 करोड़ से ज्यादा बच्चे शिक्षा के लिए बेहद मुश्किल हालात का सामना कर रहे हैं. युद्ध, विस्थापन और जलवायु परिवर्तन ने दुनिया के कई हिस्सों में बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित किया है. इन बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए जहां बड़े स्तर पर फंडिंग की जरूरत है, वहीं दुनिया के सामने उन्हें स्कूल तक पहुंचाने की चुनौती भी बनी हुई है.

इसकी एक तस्वीर युद्धग्रस्त सूडान के एक स्कूल में देखने को मिली. छठी कक्षा के एक छोटे और बेहद गर्म कमरे में एक शिक्षक 120 बच्चों को पढ़ा रहे थे. इनमें 18 साल की एक लड़की भी थी, जिसे तीन साल पहले लड़ाई के कारण अपना घर छोड़ना पड़ा था. उसकी कम उम्र में शादी हो गई और वह जल्द ही मां भी बन गई, लेकिन इसके बावजूद वह अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती है.

एजुकेशन कैनॉट वेट की निदेशक मेसा जलबाउट ने कुछ हफ्ते पहले स्कूल के दौरे के दौरान यह अनुभव साझा किया. उन्होंने बताया कि कक्षा का तापमान 44 डिग्री सेल्सियस था और वहां पानी या बिजली की भी व्यवस्था नहीं थी. इसके बावजूद उस लड़की ने उनसे अपने भाई-बहनों, चचेरे भाई-बहनों और अनाथ दोस्तों के भी स्कूल जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की.

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जलबाउट के मुताबिक, स्कूल इतना छोटा था कि बाहर इंतजार कर रहे सैकड़ों बच्चों को अंदर जगह नहीं मिल पा रही थी. बच्चों ने उनसे और अन्य आगंतुकों से अधिक स्कूल बनाने का संदेश पहुंचाने को कहा. जलबाउट ने कहा कि वह इस सप्ताह संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक बैठक में दुनिया के नेताओं के सामने इसी मुद्दे को उठा रही हैं.

शिक्षा की जरूरत वाले 50 करोड़ से अधिक बच्चों की स्थिति संयुक्त राष्ट्र की इस बैठक से इतर चर्चा के प्रमुख मुद्दों में रही. इन बच्चों की शिक्षा के लिए पैसे जुटाने की अपील को कुछ सफलता भी मिली है.

संघर्ष और जलवायु परिवर्तन बड़ी बाधाएं

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री और वैश्विक शिक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत गॉर्डन ब्राउन ने गुरुवार को कहा कि 27.3 करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं. वहीं, 27 करोड़ अन्य बच्चे स्कूल तो जा रहे हैं, लेकिन 11 साल की उम्र तक पढ़ने, लिखने या गणित में पर्याप्त दक्षता हासिल नहीं कर पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इनमें से कई बच्चे संघर्ष या जलवायु परिवर्तन से प्रभावित इलाकों में हैं.

ब्राउन ने कहा कि दुनिया को कुछ देशों के कुछ बच्चों की क्षमता विकसित करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हर देश में हर समय सभी बच्चों की क्षमता विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए.

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उन्होंने कहा कि जिन देशों के बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं, उनकी सरकारों को याद दिलाना होगा कि उन्होंने अपने खर्च का 20 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करने का वादा किया था. साथ ही, सहायता देने वाले देशों को भी याद दिलाना होगा कि उन्होंने 2015 में 2030 तक सभी बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के संयुक्त राष्ट्र के विकास लक्ष्यों को स्वीकार किया था. उन्होंने कहा कि दुनिया इस लक्ष्य से अभी काफी दूर है.

ब्राउन ने कहा कि स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों की संख्या में कमी नहीं आना निराशाजनक है. उन्होंने कहा कि अगर किसी बच्चे को शिक्षा के बुनियादी अधिकार से वंचित किया जाता है तो इसका असर उसकी पूरी जिंदगी और उसके परिवार के जीवन पर पड़ता है.

हालांकि, दुनिया के नेताओं की बैठक से शिक्षा के लिए फंडिंग को लेकर कुछ नतीजे भी सामने आए. बुधवार को एक कार्यक्रम में ग्लोबल पार्टनरशिप फॉर एजुकेशन ने बताया कि 90 से अधिक कम आय वाले देशों की शिक्षा व्यवस्था को बदलने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए सहयोगियों और फंड से 3.5 अरब डॉलर जुटाए गए हैं.

इसमें 2.1 अरब डॉलर सरकारों और निजी दानदाताओं से मिले या मिलने की उम्मीद है. वहीं, 1.4 अरब डॉलर सह-वित्तपोषण के रूप में जुटाए गए हैं. इसमें विकास वित्त संस्थानों से 1 अरब डॉलर और परोपकारी तथा निजी क्षेत्र के बढ़ते गठबंधन से 40 करोड़ डॉलर शामिल हैं. नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला टिनुबू, जो इस अभियान के सह-मेजबान हैं, ने कहा कि यह फंडिंग नाइजीरिया जैसे गतिशील और युवा देशों को उन बाधाओं को दूर करने में मदद करती है, जो बच्चों, खासकर लड़कियों को स्कूल और शिक्षा से दूर रखती हैं.एजुकेशन कैनॉट वेट संकट से प्रभावित दुनियाभर के 25.8 करोड़ स्कूली उम्र के बच्चों पर ध्यान केंद्रित करता है. जलबाउट ने कहा कि यह संख्या उन बच्चों से कहीं अधिक है, जिन तक संगठन पहुंच पा रहा है.

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गाजा में शिक्षा के लिए योगदान

इसी के तहत उन्होंने गाजा और वेस्ट बैंक के बच्चों के लिए 30 लाख डॉलर के आपातकालीन निवेश की घोषणा की. इससे 13,000 तक सबसे कमजोर बच्चों और किशोरों को मदद मिलेगी. इसमें संघर्ष में घायल और दिव्यांग बच्चों के साथ उन बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने अपने माता-पिता खो दिए हैं या जो अकेले अथवा अपने परिवार से अलग हो गए हैं.

जलबाउट ने कहा कि गाजा में प्रति व्यक्ति बच्चों के बीच अंग गंवाने वालों की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा है. उन्होंने कहा कि इन बच्चों के लिए जिंदा बचना सिर्फ शुरुआत है. युद्ध में बचे, अपना अंग और संभवतः अपना परिवार खो चुके बच्चे को जरूरतों के लिए व्यवस्था करने में असफल रहने की वजह से अपना भविष्य भी नहीं खोना चाहिए. हालांकि, जरूरतों के मुकाबले फंड बहुत कम हैं. जलबाउट ने कहा कि लगातार तीसरे साल गाजा में 6.6 लाख बच्चे स्कूल से बाहर हैं और करीब 70,000 छोटे बच्चों के पास प्री-स्कूल की सुविधा नहीं है.

नेपाल में भी शिक्षा प्रभावित

नेपाल में भी हाल की विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित बच्चों की पढ़ाई दोबारा शुरू कराने के लिए संगठन ने 10 लाख डॉलर की मदद दी है.वहीं, सूडान की अपनी हालिया यात्रा के दौरान जलबाउट ने कई लाख बच्चों की मदद के लिए 2.2 करोड़ डॉलर की फंडिंग की घोषणा की थी. हालांकि, सूडान में 80 लाख बच्चे स्कूल से बाहर हैं.

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