अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान और मिडिल ईस्ट के हालात पर कई बड़ी बातें कही हैं. उन्होंने मिसाइल, परमाणु कार्यक्रम, लेबनान और प्रतिबंधों जैसे मुद्दों पर अमेरिका का रुख साफ किया है.
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान से जुड़े समझौते और मिडिल ईस्ट की स्थिति पर कई जरूरी बातें कही हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि जब अंतिम समझौता होगा तो ईरान के पास ऐसी मिसाइलें नहीं होंगी जो पूरी दुनिया के लिए खतरा बन सकें.
इसके बाद वेंस ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी बात की. उन्होंने कहा कि अगर ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम फिर से शुरू करना है तो उसे इसके लिए बहुत ज्यादा पैसों की जरूरत पड़ेगी. इसके अलावा उन्होंने लेबनान से जुड़े समझौते पर भी बात की. उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि दोनों पक्ष यानी इजरायल और लेबनान इस समझौते का सम्मान करेंगे और इसे ठीक तरीके से मानेंगे.
वेंस ने यह भी कहा कि अगर इस इलाके में किसी तरह का तनाव या झगड़ा बढ़ता है तो उसे बातचीत के जरिए ही सुलझाना होगा, ना कि लड़ाई के जरिए. उनका कहना था कि आगे चलकर दक्षिणी लेबनान की सुरक्षा और वहां कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी लेबनान सरकार के हाथों में होनी चाहिए. अमेरिका भी यही चाहता है.
ईरान के साथ हुई आखिरी बातचीत का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि 60 दिन के बाद क्या नियम और शर्तें होंगी, यह सब अंतिम बातचीत में तय किया जाएगा.
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वेंस ने यह भी बताया कि अमेरिका बहुत जल्द अपनी संसद यानी कांग्रेस को इस पूरे समझौते की और इससे जुड़ी सभी बातों की जानकारी देगा.
जब ईरान पर लगे प्रतिबंधों की बात आई, तो उन्होंने कहा कि अमेरिका इस समझौते में प्रतिबंधों में जो राहत दी जा रही है, उसे कोई बहुत बड़ी रियायत नहीं मानता. उनका कहना था कि प्रतिबंधों में राहत मिलने के बाद भी अमेरिका यह देख सकेगा कि ईरान पैसा कहां से भेजता है और कहां से प्राप्त करता है.
उन्होंने यह भी भरोसा जताया कि कांग्रेस की मंजूरी लिए बिना भी कुछ समय के लिए प्रतिबंधों में राहत दी जा सकती है.
इजरायल के बारे में बात करते हुए वेंस ने कहा कि इजरायल को भी इस शांति प्रक्रिया का सम्मान करना होगा. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बेरूत में आम नागरिकों पर हमले किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किए जा सकते.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति के इन सभी बयानों से यह साफ हो जाता है कि अमेरिका की नजर इस समय ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर, उसके परमाणु कामों पर, लेबनान से जुड़े नियमों पर और पूरे इलाके में शांति बनाए रखने की कोशिशों पर बनी हुई है.
नेतन्याहू के लिए क्यों है टेंशन की बात?
अमेरिका चाहता है कि दक्षिणी लेबनान की सुरक्षा और कमान लेबनान सरकार के हाथ में रहे, जबकि इजरायल वहां खुद कड़ा सैन्य नियंत्रण या बफर जोन चाहता है.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू कई बार ये बात कह चुके हैं कि दक्षिण लेबनान में उनके सैनिक जब तक रहेंगे जब तक उन्हें लगता है कि उस क्षेत्र में इजरायल को सुरक्षा के लिए रहना है.
इनपुट: रॉयटर्स