राज्यसभा चुनाव के ताजा नतीजों ने संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की स्थिति को और मजबूत कर दिया है. झारखंड में क्रॉस वोटिंग की बदौलत एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने एक सीट पर जीत दर्ज की, जबकि दूसरी सीट पर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम विजयी रहे. वहीं, मिजोरम में सत्ताधारी जोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) ने पहली बार राज्यसभा में अपना प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया.
दरअसल, कुल 27 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए थे. इनमें से 11 जून को जांच के बाद 8 राज्यों के 24 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे, जिनमें 19 एनडीए के और 5 कांग्रेस के उम्मीदवार थे. निर्विरोध चुने जाने वाले प्रमुख नेताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन खेड़ा और भाजपा के सतीश पूनिया व तरुण चुघ शामिल हैं. इसके अलावा महाराष्ट्र, तमिलनाडु और ओडिशा की तीन रिक्त सीटों पर हुए उपचुनाव में भी उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे.
झारखंड में कांग्रेस को बड़ा झटका
गुरुवार को झारखंड की दो और मिजोरम की एक सीट पर चुनाव हुआ. झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में परिमल नाथवानी को 28 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को 20 वोट प्राप्त हुए. जेएमएम के बैद्यनाथ राम को 30 वोट मिले. मतदान के दौरान तीन वोट अमान्य घोषित किए गए, जिनमें भाजपा के दो और कांग्रेस का एक वोट शामिल था. एनडीए के पास विधानसभा में केवल 24 विधायक हैं, जबकि जीत के लिए 28 प्रथम वरीयता मतों की जरूरत थी. ऐसे में नाथवानी की जीत को क्रॉस वोटिंग का परिणाम माना जा रहा है.
चुनाव नतीजे आने के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर 'हॉर्स ट्रेडिंग' को बढ़ावा देने का आरोप लगाया. वहीं, झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने अपनी हार के लिए गठबंधन सहयोगी राजद और सीपीआई (माले) लिबरेशन को जिम्मेदार ठहराया.
मिजोरम में ZPM का राज्यसभा में डेब्यू
दूसरी ओर, मिजोरम की एकमात्र राज्यसभा सीट पर ZPM उम्मीदवार के. लालतलुआंगकिमा ने 36 में से 26 वोट हासिल कर जीत दर्ज की. विपक्षी मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) की उम्मीदवार जोथनसांगी हमार को 10 वोट मिले, जबकि भाजपा के दो और कांग्रेस के एक विधायक ने मतदान से दूरी बनाई.
इस चुनाव के साथ राज्यसभा में एनडीए की संख्या बढ़कर 150 हो गई है. यदि पश्चिम बंगाल की तीन रिक्त सीटों पर होने वाले उपचुनाव में भी एनडीए जीत दर्ज करता है, तो उसकी संख्या 153 तक पहुंच जाएगी, जो दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से केवल 10 सीट कम होगी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उच्च सदन में एनडीए की बढ़ती संख्या भविष्य में संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की दिशा में केंद्र सरकार की स्थिति को और मजबूत कर सकती है.