झारखंड में JMM नेतृत्व वाली हेमंत सोरेन सरकार में शामिल दूसरी सबसे बड़ी घटक कांग्रेस को जोर का झटका लगा है. 56 के आंकड़े सरकार के साथ होने के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को करारी हार का सामना करना पड़ा, जबकि आंकड़े नहीं रहने के बावजूद भी NDA समर्थित राज्यसभा उम्मीदवार परिमल नाथवानी इंडिया एलायंस के घटक दल द्वारा ही क्रॉस वोटिंग के सहारे रांची से दिल्ली के अपर हाउस यानी राज्यसभा पहुंच गए.
सुबह से ही विधानसभा परिसर में गहमागहमी थी. चर्चे और अंकगणित विपक्ष और पक्ष के लॉबी में NDA और इंडिया के समर्थकों द्वारा किया जा रहा था. सुबह लगभग 9 बजे ही कांग्रेस विधायक बस से विधानसभा परिसर पहुंचे. सभी ने जीत का दावा किया और सत्तापक्ष के लॉबी में चाय, कॉफी और लजीज नाश्ते के साथ हेमंत सोरेन सरकार को समर्थन दे रहे तमाम घटक दल के विधायकों का इंतजार हो रहा था. सभी एक साथ एकजुट होने का संदेश देने के लिए एक साथ ही वोटिंग के लिए जाने का मन बना चुके थे.
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इस बीच परिमल नाथवानीभी विधानसभा पहुंचे. ब्लू कलर की शर्ट में सुबह से ही वे आत्मविश्वास से लबरेज दिख रहे थे. शायद वे जानते थे कि दिन की मेहनत के बाद गुरुवार की शाम उनकी यानी उनके नाम होने वाली है. NDA के तमाम विधायक नेता प्रतिपक्ष के कमरे में सुबह से ही अड्डा जमाए रहे और उन्हें फोन पर लगातार बात करते संवाददाता ने देखा. वे जानना चाह रहे थे कि कितनी और किसने वोटिंग की.
इससे पहले NDA के सभी 24 विधायकों ने एक साथ जाकर लगभग साढ़े 11 बजे तक अपने मताधिकार का प्रयोग कर लिया था. सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान का वक्त था. NDA के बाद इंडिया एलायंस के सभी विधायक एक साथ वोट करने पहुंचे. सबसे आखिर में सीएम हेमंत सोरेन और स्पीकर रविंद्र महतो ने मताधिकार का प्रयोग किया.
राजद के चुनाव के ऑब्जर्वर और एजेंट लालू के करीबी भोला यादव थे. कांग्रेस इंचार्ज राजू को उन्हें साथ लेकर बूथ की तरफ जाते हुए इस उम्मीद में देखा गया कि उनके 4 विधायक कांग्रेस के पक्ष में वोट करेंगे, लेकिन शाम होते-होते सबकुछ कांग्रेस के विपरीत होता दिखा.
इस बीच मतदान केंद्र के बाहर कांग्रेस समर्थकों की भीड़ सबसे ज्यादा दिखी. बेचैनी भी दूसरी सीट को लेकर सबसे ज्यादा थी. एक सीट पर JMM की जीत तो शुरू से पक्की थी, दूसरी पर कांग्रेस और NDA समर्थित उम्मीदवार के बीच सीधी टक्कर थी. दोपहर सवा दो बजे तक मतदान खत्म हो चुका था. चंद घंटों के लिए बैलट बॉक्स में तीनों उम्मीदवारों की किस्मत सील हुई.
शाम 5 बजे मतगणना शुरू हुई. कुछ ही देर में JMM के नेता और कांग्रेस के नेता राधा कृष्ण किशोर बाहर निकले. खबर जानने के लिए समर्थकों और पत्रकारों का हुजूम उनके पीछे हो लिया. उन्होंने जैसे ही कहा कि तीन वोट वैध नहीं पाए गए, कांग्रेस कार्यकर्ताओं के चेहरे पर निराशा तैर गई. वे समझ गए कि जिस बात का डर था, वही सही साबित हुआ. तीन वोट अमान्य होने का मतलब था कि जीत का आंकड़ा लगभग 26, और NDA के पास पहले ही 24 वोट थे यानी सिर्फ 2 से 3 मत और जीत उसके हिस्से में.
कांग्रेस को झटका देने वाली खबर भी कुछ ही देर में सामने आ गई. परिमल नाथवानी28 वोट पाकर जीत गए और JMM के पक्ष में 30 वोट पड़े. कांग्रेस को मिले सिर्फ 20. ऐसे में कांग्रेस का गुस्सा अपने सहयोगी दलों के खिलाफ फूटा. जबकि विधानसभा परिसर में जय श्री राम के नारे का उद्घोष बीजेपी कार्यकर्ताओं ने किया. पीएम मोदी, अमित शाह जिंदाबाद के नारों से भी विधानसभा गूंजायमान हो गया.
दोनों विजयी उम्मीदवारों ने मुस्कराते हुए सर्टिफिकेट लिया और झारखंड के लिए अपनी प्राथमिकताएं गिनाईं.
कांग्रेस के प्रभारी ने विधानसभा छोड़ने से पहले यह जरूर कहा कि उन्हें JMM से कोई शिकायत नहीं है, लेकिन गठबंधन की एकता तार-तार हुई इसका दुख है. इशारा साफ था कि राजद और वाम दल का सहयोग उन्हें नहीं मिलाय
रात 8 बजते-बजते नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विधानसभा को खाली कर दिया. मिठाई और आतिशबाजी का दौर बीजेपी दफ्तर में भी चला. हालांकि कांग्रेस को एक बार फिर अपने रूलिंग स्टेट, जहां वह सरकार में शामिल है, वहां से भी मुंह की खानी पड़ी जिससे उनके नेताओं में खलबली है. इसका कितना असर वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार की सेहत पर पड़ेगा, यह देखना अभी बाकी है.