अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारतीय समयानुसार 2 अप्रैल की सुबह राष्ट्र को संबोधित करेंगे, जिसमें ईरान के साथ जारी युद्ध को खत्म करने से जुड़े ऐलान की उम्मीद की जा रही है. ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिए थे कि अमेरिका ने अपने सैन्य टार्गेट्स हासिल कर लिए हैं और होर्मुज स्ट्रेट खुला रहे या बंद, इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता.
इस बीच, 31 मार्च 2026 को चीन और पाकिस्तान ने बीजिंग में उच्च स्तरीय चर्चा के बाद एक पांच सूत्री शांति पहल का प्रस्ताव रखा है. पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार और चीनी विदेश मंत्री वांग यी द्वारा पेश किए गए इस प्लान में तत्काल सीजफायर और शांति वार्ता शुरू करने पर जोर दिया गया है.

हालांकि, ईरान ने पाकिस्तान को अमेरिका के साथ सीधे मध्यस्थ बनाने के विचार का विरोध किया है, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर जंग खत्म करने की अपील का स्वागत किया है. अब सबकी निगाहें ट्रंप के संबोधन पर हैं कि क्या वे इस शांति प्रस्ताव या अपनी जीत के दावे के साथ युद्ध खत्म करेंगे.
चीन और पाकिस्तान का शांति फॉर्मूला
बीजिंग में घोषित इस योजना के पांच मुख्य बिंदु हैं. सबसे पहले, सभी पक्षों से तत्काल युद्धविराम की अपील की गई है. दूसरा, कूटनीति और संवाद को सिर्फ एक विकल्प बताते हुए शांति वार्ता शुरू करने की वकालत की गई है. तीसरा, नागरिक बुनियादी ढांचे जैसे ऊर्जा केंद्रों और परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमलों को रोकने की मांग है. चौथा, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना और पांचवां, संयुक्त राष्ट्र के चार्टर को मजबूत करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर शांति ढांचा तैयार करना.
चीन ने जहां पाकिस्तान को एक मध्यस्थ के रूप में समर्थन दिया है, वहीं ईरान का रुख थोड़ा अलग है. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने पाकिस्तान को अमेरिका के साथ सीधे मध्यस्थ के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. हालांकि, तेहरान ने मिडिल ईस्ट में शांति बहाली और युद्ध खत्म करने के आह्वान का समर्थन किया है. ईरान का यह रुख दिखाता है कि वह कूटनीतिक समाधान तो चाहता है, लेकिन मध्यस्थों के चुनाव में बेहद सतर्क है.