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ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा कहां हैं? ट्रंप का आया बयान, बोले- मैं जानता हूं...

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सुप्रीम लीडर का जिक्र करते हुए कहा कि इस बात की पूरी संभावना है कि वह गंभीर रूप से घायल हैं. वहीं ट्रंप ने यह भी कहा है कि ईरान के साथ वे समझौते के बहुत पास हैं.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हम समझौते के बहुत पास हैं. (Photo: ITG)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हम समझौते के बहुत पास हैं. (Photo: ITG)

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बना हुआ है. संभावित समझौते को लेकर चर्चाएं जरूर हो रही हैं, लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का जिक्र करते हुए कहा, 'मैं यह नहीं कहना चाहता कि मुझे पता है कि वह कहां हैं, लेकिन इस बात की पूरी संभावना है कि वह गंभीर रूप से घायल हैं.'

बता दें, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़ा हमला किया था, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने की खबर सामने आई. इसके बाद 9 मार्च को अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त कर दिया गया.

इस बीच, मोजतबा खामेनेई की स्थिति को लेकर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है. कुछ लोगों का मानना है कि वे भी हमले का शिकार हो गए थे, जबकि कुछ का कहना है कि वे बुरी तरह जख्मी हैं.

वहीं, ईरान के मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि हम समझौते के बहुत पास हैं. अगर समझौता नहीं भी होता है, तो भी हम किसी न किसी तरह इसे संभाल लेंगे और दोनों ही सूरतों में फायदा हमारा ही होगा.

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नुकसान की भरपाई के रास्ते तलाश रहा अमेरिका

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष से खाड़ी देशों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है. जानकारी के मुताबिक अब अमेरिका इस नुकसान की भरपाई के लिए एक नई रणनीति पर काम कर रहा है, जिसके तहत ईरान के फ्रीज किए गए फंड्स का इस्तेमाल किया जा सकता है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अपनी टीम को खाड़ी देशों में ईरानी हमलों से हुए नुकसान का आकलन करने का निर्देश दिया है. 

अमेरिका ऐसे विकल्प तलाश रहा है, जिनके जरिए प्रतिबंधों के कारण फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों का उपयोग खाड़ी देशों को मुआवजा देने के लिए किया जा सके. उद्देश्य यह है कि भविष्य में अगर ईरान की ओर से किसी प्रकार का हमला होता है और उससे नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई इन फंड्स से की जा सके.

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