समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर भारतीय जनता पार्टी और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या में लोगों की धार्मिक आस्था और भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. BJP के भीतर सत्ता और नियंत्रण की लड़ाई चल रही है. लोगों की आस्था को नजरअंदाज किया जा रहा है.
लखनऊ में पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों की बैठक के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि राम मंदिर चंदा विवाद ने BJP के अंदर चल रही खींचतान को सामने ला दिया है. उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व लोगों की धार्मिक आस्था की रक्षा करने के बजाय अपने अंदरूनी विवादों में उलझा हुआ है. मौजूदा विवाद सत्ताधारी दल के भीतर नियंत्रण की लड़ाई को उजागर करता है.
अखिलेश ने आरोप लगाया, "हमारी आस्था और भक्ति के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. सब जानते हैं कि क्या हो रहा है, फिर भी वे चुप हैं. डबल इंजन वाली सरकार मिलकर काम नहीं कर रही है, बल्कि टकराव की स्थिति में है. सत्ता की लड़ाई चल रही है और उन्हें आस्था या भक्ति की कोई परवाह नहीं है." उन्होंने आगे कहा कि सत्ता में बैठे लोग खजाने के लालच में अंधे हो गए हैं.
सपा प्रमुख ने इस पूरे मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम की जांच का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि जांच का तरीका भी BJP के अंदरूनी संघर्ष को दिखाता है. उन्होंने कहा, "यदि यह मामला प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई या इनकम टैक्स का होता तो जांच दिल्ली में होती. लेकिन दिल्ली के देखने से पहले ही लखनऊ ने कमान संभाल ली. यह सत्ता की लड़ाई का नतीजा है."
श्रीराम का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने भक्तों, संतों, सुप्रीम कोर्ट, लोकसभा स्पीकर, अयोध्या के नागरिकों और PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समाज से इस पूरे विवाद पर ध्यान देने की अपील की है. उन्होंने आरोप लगाया कि BJP झूठा प्रोपेगैंडा फैलाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है. BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के लखनऊ दौरे पर भी तंज कसा.
उन्होंने दावा किया कि इस दौरे ने पार्टी संगठन और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच की अनबन को उजागर कर दिया. उन्होंने कहा, "जब उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष आए, तो ऐसा लगा जैसे लखनऊ में कर्फ्यू लगा दिया गया हो. संगठन और सरकार के बीच गंभीर टकराव है." नितिन नवीन के पार्टी नेताओं के साथ चाय की दुकान पर जाने को लेकर भी अखिलेश ने कटाक्ष किया.
उन्होंने कहा, "जब आपके पास करने के लिए कुछ नहीं होता, तो आप चाय पीते हैं." उन्होंने जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर का मुद्दा भी उठाया. आरोप लगाया कि BJP ने समाजवादी आंदोलन से नफरत की वजह से इस परियोजना की अनदेखी की है. JPNIC केवल एक इमारत नहीं, बल्कि जयप्रकाश नारायण के राजनीतिक जीवन को समर्पित एक संग्रहालय था.
उन्होंने कहा कि जब BJP की स्थापना हुई थी, तब उसके सामने वैचारिक दिशा तय करने का सवाल था और उसने समाजवादी तथा सेक्युलर राजनीति की छवि अपनाने की कोशिश की थी. अखिलेश ने दावा किया कि पार्टी के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष ने खुद को समाजवादी विचारधारा से जोड़ने के लिए जयप्रकाश नारायण की छवि का इस्तेमाल किया था.