गुजरात के अहमदाबाद से इंसानियत को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है. यहां वटवा इलाके में एक महीने की नवजात बच्ची को डेढ़ लाख रुपये में बेचने का आरोप लगा है. इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बच्ची को बेचने का आरोप उसके पिता की मुंहबोली बहन पर लगा है. पुलिस ने मामले में चार महिलाओं को गिरफ्तार किया. नवजात को सुरक्षित बरामद कर उसकी मां को सौंप दिया गया है. हालांकि पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और बच्ची के माता-पिता की भूमिका की भी जांच की जा रही है. जानकारी के मुताबिक वटवा के रहने वाले रॉकी चारण ने ऑटोरिक्शा खरीदने के लिए अपनी मुंहबोली बहन जागृति सुथार से एक लाख रुपये उधार लिया था. रॉकी ने यह रकम किस्तों में लौटाने का वादा किया था, लेकिन आर्थिक तंगी और पत्नी राधा की गर्भावस्था के कारण वह पैसे वापस नहीं कर पाया.
इसी दौरान राधा ने एक बच्ची को जन्म दिया. बच्ची के जन्म के करीब 20 दिन बाद राधा और रॉकी अपनी मुंहबोली बहन जागृति के घर पहुंचे. आरोप है कि उसी दौरान जागृति ने उनसे कहा कि अगर वे अपनी बच्ची उसे दे दें तो वह एक लाख रुपये का कर्ज माफ कर देगी. इतना ही नहीं, उसने बच्ची के बदले अलग से एक लाख रुपये देने और बच्ची का अच्छे घर में पालन-पोषण कराने की भी बात कही. राधा और रॉकी ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया. लेकिन करीब दस दिन पहले जागृति उनके घर पहुंची और बच्ची को अपने साथ ले गई. बाद में जब राधा और रॉकी रात का खाना खाने जागृति के घर पहुंचे तो बच्ची वहां नहीं थी. जब उन्होंने बच्ची के बारे में पूछा तो जागृति ने कथित तौर पर बताया कि उसने बच्ची को एक अच्छे परिवार में बेच दिया है और वहां उसे कोई परेशानी नहीं होगी.
ऑटो खरीदने के लिए लिया था 1 लाख रुपये का कर्ज
राधा ने अपनी बच्ची वापस मांगी तो जागृति ने पहले दिए गए एक लाख रुपये लौटाने की बात कही. जब बच्ची वापस नहीं मिली तो राधा ने 4 जुलाई को वटवा पुलिस थाने में जागृति सुथार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई. वटवा पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर ए.ए. वछेटा ने बताया कि शिकायत मिलते ही अलग-अलग टीमें बनाकर जांच शुरू की गई. सबसे पहले जागृति को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई. पूछताछ के आधार पर पुलिस ने जागृति समेत चार महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया.
जांच में सामने आया कि जागृति ने कृष्णा और मंजुला नाम की महिलाओं की मदद से नडियाद निवासी गीता प्रजापति को एक महीने की बच्ची 1.50 लाख रुपये में बेच दी थी. पुलिस के अनुसार, नवजात को नडियाद में गीता तक पहुंचाने का काम कृष्णा ने किया था. सौदे की रकम भी कृष्णा ने ही गीता से ली थी. पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि जागृति का संपर्क कृष्णा से मंजुला ने करवाया था. मंजुला एक आईवीएफ सेंटर में नौकरी करती है. हालांकि जांच में अब तक यह स्पष्ट हुआ है कि इस पूरे मामले में आईवीएफ सेंटर की कोई भूमिका नहीं है.
इंस्पेक्टर ए.ए. वछेटा के मुताबिक, सौदे के अनुसार बच्ची को बेचने के बाद मिलने वाले 1.50 लाख रुपये जागृति, कृष्णा और मंजुला के बीच बांटे जाने थे. अब तक की जांच में पता चला है कि जागृति को केवल 5 हजार रुपये मिले थे. बाकी रकम किसके पास गई और अन्य आरोपियों को कितनी रकम मिली, इसकी जांच अभी जारी है. पुलिस ने नवजात बच्ची को सुरक्षित बरामद कर उसकी मां राधा को सौंप दिया है. फिलहाल बच्ची अपने माता-पिता के पास सुरक्षित है. हालांकि इस मामले में एक और पहलू की भी जांच की जा रही है. पुलिस का कहना है कि बच्ची को कथित तौर पर करीब दस दिन पहले बेचा गया था, लेकिन एफआईआर 4 जुलाई को दर्ज कराई गई. इस देरी को लेकर भी जांच की जा रही है.
मां की शिकायत पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान जागृति ने दावा किया है कि बच्ची के माता-पिता को भी बच्ची को बेचने की जानकारी थी. इसी वजह से पुलिस को आशंका है कि कहीं पैसों के लेनदेन को लेकर विवाद होने के बाद एफआईआर तो दर्ज नहीं कराई गई. इसी आधार पर अब राधा और रॉकी की भूमिका की भी जांच की जा रही है. पुलिस का कहना है कि यदि जांच में बच्ची के माता-पिता की किसी भी तरह की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल इस मामले की जांच के लिए पुलिस की दो अलग-अलग टीमें विभिन्न पहलुओं पर काम कर रही हैं. वहीं चारों गिरफ्तार महिलाओं से लगातार पूछताछ की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क और पैसों के लेनदेन की सच्चाई सामने आ सके.