अमेरिका और ईरान के बीच चल रही डिप्लोमैटिक कोशिशों को बड़ा झटका लगा है. कतर के एक अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि दोहा पहुंचे टॉप US दूत ईरान के साथ किसी हाई-लेवल मीटिंग में हिस्सा नहीं लेंगे. इस फैसले के बाद ईरान युद्ध को हमेशा के लिए रोकने और होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह फिर से खोलने की कोशिशों की प्रोग्रेस पर सवाल खड़े हो गए हैं.
कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने बताया कि इस हफ्ते बातचीत रीजनल सिक्योरिटी जैसे मुद्दों पर टेक्निकल लेवल पर होगी. इसके बाद में इसे सीनियर लेवल तक बढ़ाया जा सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और दूत स्टीव विटकॉफ के मंगलवार को दोहा पहुंचने से पहले वीकेंड में गोलीबारी हुई थी.
इस घटना ने अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए अंतरिम समझौते की परीक्षा ले ली. 14 बिंदू वाले इस समझौते में दोनों पक्षों को लड़ाई में स्थाई युद्धविराम पर बातचीत के लिए 60 दिन का समय दिया गया था. यह संघर्ष 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के साथ शुरू हुआ था. इसका मकसद न्यूक्लियर प्रोग्राम जैसे मुद्दों को सुलझाना भी था.
इस लड़ाई ने ग्लोबल ट्रेड को प्रभावित किया. तेल और दूसरे सामानों की सप्लाई में रुकावट आई. खाड़ी देशों को ईरानी एयरस्ट्राइक का सामना करना पड़ा. इस संघर्ष में हजारों लोगों की मौत हुई, जिनमें ज्यादातर ईरान और लेबनान के लोग शामिल थे. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बघाई ने कहा कि अंतरिम डील पर बातचीत दोहा में होने की संभावना है.
उन्होंने कहा कि इसमें ईरान के फ्रीज किए गए एसेट्स को रिलीज करने का मुद्दा भी शामिल है. बघाई ने कहा, "आने वाले दिनों में अमेरिकी पक्ष के साथ किसी भी लेवल पर कोई मीटिंग तय नहीं की गई है." वहीं व्हाइट हाउस ने सोमवार को कहा कि जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ हाई-लेवल मीटिंग करेंगे और टेक्निकल बातचीत भी फिलहाल जारी रहेगी.
कतर के अधिकारी माजिद अल अंसारी ने कहा कि बातचीत कई ट्रैक पर चल रही है. उन्होंने बताया, "हमारा न्यूक्लियर साइड पर एक ट्रैक है, आपका इकोनॉमिक और स्टेट परफॉर्मेंस इश्यू पर एक ट्रैक है, आपका सिक्योरिटी और रीजनल सिक्योरिटी पर एक ट्रैक है." यानी बातचीत में परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक मुद्दे और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषय शामिल हैं.
डिप्लोमैटिक कदमों पर अनिश्चितता के बावजूद तेल की कीमतों में गिरावट आई है. डी-एस्केलेशन की उम्मीदों के बीच तेल बाजार में नरमी देखी गई. साल 2020 में कोविड-19 महामारी के बाद से यह सबसे बड़ा तिमाही नुकसान बताया जा रहा है. सीजफायर के बावजूद तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ. ईरान ने रविवार को कुवैत और बहरीन में एयरस्ट्राइक किए थे.
इस युद्ध ने ग्लोबल महंगाई पर भी असर डाला है. नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ा है. ये चुनाव US कांग्रेस पर कंट्रोल तय करेंगे. ट्रंप और ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट गैसोलीन रिटेलर्स से कीमतें कम करने की अपील कर रहे हैं. फॉस्फेट फर्टिलाइजर के इंपोर्ट पर ड्यूटी कम करने की मंजूरी दी गई है.