28 जुलाई, 1945 को एक अमेरिकी सैन्य विमान एम्पायर स्टेट बिल्डिंग से टकरा गया था. इसमें 14 लोगों की मौत हो गई. यह विचित्र दुर्घटना घने कोहरे के कारण हुई थी. बताया जाता है कि पायलट को बिल्डिंग दिखाई ही नहीं दी और प्लेन सीधा एम्पायर स्टेट बिल्डिंग से जा टकराया. यह प्लेन बी-25 मिशेल बमवर्षक विमान था. इस विमान में दो पायलट सवार थे. विमान मैसाचुसेट्स के बेडफोर्ड से न्यूयॉर्क शहर के लागुआर्डिया हवाई अड्डे के लिए उड़ान भर रहा था.
शनिवार की सुबह जब विमान महानगर क्षेत्र में पहुंचा, तो घना कोहरा छाया हुआ था. हवाई यातायात नियंत्रकों ने विमान को इसके बजाय नेवार्क हवाई अड्डे की ओर जाने का निर्देश दिया. इस नए उड़ान मार्ग के तहत विमान मैनहट्टन के ऊपर से गुजरा. चालक दल को विशेष रूप से चेतावनी दी गई थी कि उस समय शहर की सबसे ऊंची इमारत, एम्पायर स्टेट बिल्डिंग, दिखाई नहीं दे रही थी.
बेहतर दृश्यता की तलाश में बमवर्षक विमान अपेक्षाकृत धीमी गति से और काफी नीचे उड़ रहा था. तभी वह मिडटाउन में क्रिसलर बिल्डिंग के पास पहुंचा. उसने इमारत से बचने के लिए अचानक दिशा बदली, लेकिन इस प्रयास से वह सीधे एम्पायर स्टेट बिल्डिंग के उत्तरी हिस्से में, 79वीं मंजिल के पास जा टकराया.
टकराते ही विमान का ईंधन फट गया, जिससे इमारत के अंदर 75वीं मंजिल तक आग फैल गई और इमारत की दीवार में हुए छेद से भी लपटें निकलने लगीं. विमान का एक इंजन इमारत के आर-पार जाकर सड़क के दूसरी ओर एक पेंटहाउस अपार्टमेंट में जा गिरा. विमान के अन्य हिस्से आसपास की इमारतों में धंस गए. दूसरे इंजन ने लिफ्ट की केबल तोड़ दी, जब एक महिला लिफ्ट में सवार थी.
आपातकालीन ऑटो ब्रेक ने महिला को नीचे गिरने से बचा लिया, लेकिन इंजन शाफ्ट में गिरकर उसके ऊपर जा गिरा. फुर्ती से काम करते हुए बचावकर्मियों ने महिला को लिफ्ट से बाहर निकाला और उसकी जान बचाई. शनिवार होने के कारण इमारत में सामान्य से कम कर्मचारी मौजूद थे. इमारत में केवल 11 लोग मारे गए, जिनमें से कुछ ज्वलनशील ईंधन से झुलस गए और कुछ इमारत से बाहर फेंके जाने के कारण मारे गए.
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सभी 11 पीड़ित राष्ट्रीय कैथोलिक कल्याण सम्मेलन के युद्ध राहत सेवा विभाग के कर्मचारी थे, जिनके कार्यालयों में विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था. विमान में सवार तीनों लोग भी मारे गए.
एम्पायर स्टेट बिल्डिंग की एक दीवार में 18 फीट चौड़ा और 20 फीट लंबा छेद हो गया था. हालांकि इमारत की संरचनात्मक मजबूती पर कोई असर नहीं पड़ा, लेकिन इस दुर्घटना से लगभग 10 लाख डॉलर का नुकसान हुआ, जो आज के हिसाब से लगभग 10.5 मिलियन डॉलर के बराबर है.