मिडिल-ईस्ट में जंग के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक और विवादित कदम उठाया है. ट्रंप सरकार ने व्हाइट हाउस के बगल में स्थित 'आइजनहावर एग्जीक्यूटिव ऑफिस बिल्डिंग' के परिसर में क्रिस्टोफर कोलंबस का स्टैचू लगाया है.
ये प्रतिमा उस मूल मूर्ति की रेप्लिका है, जिसे 2020 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बाल्टीमोर के बंदरगाह में फेंक दिया था. अब क्रिस्टोफर कोलंबस को सम्मान देने के लिए ट्रंप सरकार ने इसे फिर से लगाया है.
राष्ट्रपति ट्रंप कोलंबस को 1492 के उस मिशन के नेता के रूप में देखते हैं, जिसे अमेरिका में यूरोपीय उपनिवेशवाद और आधुनिक आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था की अनौपचारिक शुरुआत माना जाता है.
व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, 'इस व्हाइट हाउस में, क्रिस्टोफर कोलंबस एक हीरो हैं और राष्ट्रपति ट्रंप ये कोशिश करेंगे कि आने वाली पीढ़ियों तक उनका इसी तरह सम्मान किया जाए.'
संगमरमर से बनी इस नई मूर्ति को मैरीलैंड के मूर्तिकार विल हेम्सली ने तैयार किया है. 'इटालियन अमेरिकन ऑर्गेनाइजेशन यूनाइटेड' के अध्यक्ष जॉन पिका ने कहा, 'हम खुश हैं कि प्रतिमा को एक ऐसी जगह मिल गई है जहां वो शांति से चमक सकेगी और सुरक्षित रहेगी.' इस संगठन ने प्रतिमा को व्हाइट हाउस के पास लगाने के लिए संघीय सरकार को कर्ज पर दिया है.
6 साल पहले मचा था बवाल
4 जुलाई 2020 को जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद भड़के गुस्से के दौरान मूल प्रतिमा को प्रदर्शनकारियों ने बाल्टीमोर के इनर हार्बर में फेंक दिया था. प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि इतालवी खोजकर्ता अमेरिका के मूल निवासियों के नरसंहार और शोषण के लिए जिम्मेदार था.
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अमेरिका में प्रतिमाओं और इतिहास को लेकर समाज बंटा हुआ है. आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका की लगभग 18% आबादी लातिनी या हिस्पैनिक है और करीब 1.1% लोग अमेरिकी भारतीय हैं, जो अक्सर कोलंबस की विरासत का विरोध करते हैं. वहीं, करीब 1.6 करोड़ इतालवी-अमेरिकी कोलंबस को अपने गौरव के रूप में देखते हैं.