सूडान में लंबे समय से जारी गृहयुद्ध के बीच साउथ कोर्डोफान से एक बार फिर बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है. यहां हुई हिंसा में कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई है. मृतकों में चार बच्चे भी शामिल हैं. स्थानीय मेडिकल संगठन सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क ने इन हत्याओं के लिए विद्रोही संगठन सूडान पीपुल्स लिबरेशन मूवमेंट-नॉर्थ (SPLM-N) से जुड़े लड़ाकों को जिम्मेदार ठहराया है.
सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क के मुताबिक, हिंसा साउथ कोर्डोफान के कर्दूद और अबू हमामा इलाकों में हुई. इन क्षेत्रों में ओटोरो समुदाय के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं. संगठन का दावा है कि हमलों में महिलाएं भी घायल हुई हैं. हिंसा के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपने घर छोड़ दिए और सुरक्षित जगह की तलाश में अबू हितान और राज्य की राजधानी कडुगली की ओर चले गए.
मेडिकल संगठन ने कहा कि अगर लोगों को उनकी जातीय पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया है, तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन है. संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से SPLM-N के नेतृत्व पर दबाव बनाने और नागरिकों के खिलाफ हिंसा रोकने की अपील की है.
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जमीन विवाद से बढ़ा जातीय तनाव
साउथ कोर्डोफान में SPLM-N से जुड़े लड़ाकों और ओटोरो समुदाय के बीच इस साल की शुरुआत में भी हिंसक संघर्ष हुआ था. बताया गया कि विवाद की शुरुआत जमीन को लेकर हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे यह टकराव जातीय तनाव में बदल गया. ताजा हिंसा के बाद इलाके में हालात और बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है.
2023 से जारी है सूडान में हिंसा
सूडान में अप्रैल 2023 से सेना और अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के बीच जंग जारी है. इस संघर्ष ने देश को गंभीर मानवीय संकट में धकेल दिया है. लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं और बड़ी आबादी भोजन, इलाज और सुरक्षित ठिकाने के लिए संघर्ष कर रही है.
अल जजीरा के मुताबिक, इस युद्ध में अब तक कम से कम 59 हजार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 1.4 करोड़ लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, करीब 3.37 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत है.
साउथ कोर्डोफान की ताजा हिंसा ने एक बार फिर यह चिंता बढ़ा दी है कि सूडान का संघर्ष अब जातीय हिंसा का और खतरनाक रूप ले सकता है. सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है, जो लगातार विस्थापन, हिंसा और मानवीय संकट के बीच फंसे हुए हैं.