scorecardresearch
 

हूती विद्रोहियों के हमले तेज, मक्का-जेद्दा समेत सऊदी के इन 7 शहरों पर खतरा

हूती विद्रोहियों के हमले के बीच सऊदी अरब में तनाव फिर बढ़ गया है. इससे मक्का, जेद्दा, यानबू समेत सात शहरों में सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया है. यानबू हूती हमलों के लिए संवेदनशील क्षेत्र माना जा रहा है. वहीं मक्का के पास भी ड्रोन हमले की कोशिश हुई.

Advertisement
X
हूती हमलों के बीच सऊदी के सात शहरों के लिए अलर्ट जारी किया गया है. (File Photo-Reuters)
हूती हमलों के बीच सऊदी के सात शहरों के लिए अलर्ट जारी किया गया है. (File Photo-Reuters)

सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच तनाव फिर बढ़ गया है. हूती लगातार सऊदी के कई इलाकों को निशाना बनाने का दावा कर रहे हैं. दूसरी तरफ सऊदी भी यमन में हूती ठिकानों पर हमले कर रहा है.

इस बीच सऊदी के 7 शहरों में खतरे का अलर्ट जारी किया गया है. इनमें मक्का और जेद्दा जैसे बड़े शहर भी शामिल हैं. सऊदी अरब में 7 शहरों में सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया है. इनमें मक्का, जेद्दा, यानबू, अब्हा, जाजान, अलउला और ताइफ शामिल हैं. 

यानबू खास तौर पर अहम है. यह लाल सागर के किनारे स्थित सऊदी का प्रमुख तेल बंदरगाह है. यहां से बड़ी मात्रा में तेल की ढुलाई होती है. जाजान और अब्हा जैसे दक्षिणी इलाके भी पहले हूती हमलों का निशाना बन चुके हैं.

इन अलर्ट का मतलब यह नहीं है कि इन सभी शहरों पर हमला हो चुका है. सऊदी अधिकारियों ने क्षेत्र में संभावित खतरे को लेकर अलर्ट रहने की अपील की है.

यह भी पढ़ें: हूती हमले के बीच साउथ यमन से भाग रहे लोग, 1 लाख लोगों के विस्थापित होने का खतरा

Advertisement

इस पूरे घटनाक्रम में मक्का का जिक्र सबसे ज्यादा अहम है. मक्का मुस्लिमों का सबसे पवित्र शहर है. यहां काबा और मस्जिद अल-हरम स्थित हैं. सऊदी डिफेंस अधिकारियों के मुताबिक, मक्का के पास एक हूती ड्रोन को एयर डिफेंस ने इंटरसेप्ट किया. 

यह मक्का को लेकर हाल के तनाव में दूसरी ऐसी कोशिश बताई गई है.  इससे पहले 2017 में भी मक्का की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइल दागे जाने की घटना हुई थी. हालांकि हूती पक्ष ने मक्का को निशाना बनाने के सऊदी के आरोप से इनकार किया है.

 सऊदी पर हमला क्यों कर रहे हैं हूती विद्रोही?

दरअसल, इसकी जड़ यमन की पुरानी जंग में है. हूती संगठन यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखता है. दूसरी तरफ यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को सऊदी का समर्थन मिला हुआ है. सऊदी अरब ने 2015 में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था.

यह भी पढ़ें: जेद्दा, जाजान और आभा... हूती विद्रोहियों के ताजा हमलों के बाद सऊदी के तीन शहरों के लिए इमरजेंसी अलर्ट जारी

2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से बड़े स्तर की लड़ाई काफी हद तक थम गई थी. लेकिन हाल के महीनों में संघर्ष फिर तेज हो गया. अब यमन के पश्चिमी हिस्से और लाल सागर के आसपास लड़ाई बढ़ रही है. हूती लाल सागर के रणनीतिक इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं.

Advertisement

हूती की बढ़त सिर्फ यमन तक सीमित नहीं है. उनकी गतिविधियां लाल सागर के एक बेहद अहम समुद्री रास्ते तक पहुंच गई हैं. इसे बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट कहा जाता है. यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है.

दुनिया के लिए यह रास्ता इसलिए अहम है क्योंकि यहां से तेल और दूसरे सामान की बड़ी मात्रा में आवाजाही होती है. अगर इस रास्ते पर लंबे समय तक खतरा बना रहता है तो जहाजों को दूसरे रास्ते अपनाने पड़ सकते हैं. इससे समय और परिवहन लागत दोनों बढ़ सकते हैं.

यह भी पढ़ें: तेल भंडार, सऊदी बॉर्डर और लाल सागर पर पकड़... इस एक शहर के पीछे क्यों पड़े हैं हूती विद्रोही?

तेल पर क्यों पड़ सकता है असर?

सऊदी अरब दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में है. उसके लिए लाल सागर का रास्ता बेहद अहम है. खासकर तब जब खाड़ी क्षेत्र में दूसरे समुद्री रास्तों पर भी तनाव बना हुआ है.

सऊदी का ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन नेटवर्क खाड़ी क्षेत्र से तेल को लाल सागर के बंदरगाहों तक पहुंचाता है. इस रास्ते में किसी तरह की बड़ी रुकावट आने पर सऊदी के तेल निर्यात पर असर पड़ सकता है. हाल में इस पाइपलाइन को नुकसान पहुंचने की घटना ने भी चिंता बढ़ाई है.

Advertisement

हूती हमलों और सऊदी की जवाबी कार्रवाई से अब लड़ाई का दायरा सिर्फ यमन तक सीमित नहीं दिख रहा. सऊदी के शहर और ऊर्जा से जुड़े ठिकाने भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. इससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ रहा है.

हाल के हमलों में सऊदी अधिकारियों ने बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने की जानकारी दी थी. दक्षिणी सऊदी के अब्हा, जाजान और खमीस मुशैत जैसे इलाकों में पहले भी मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आई हैं.

यह भी पढ़ें: फिर निशाना चूकी चीनी मिसाइल, हूती थे टारगेट लेकिन यमन के रेगिस्तान में ही गिर गई

ऐसे में मक्का, जेद्दा और यानबू जैसे इलाकों तक खतरे के अलर्ट पहुंचना इस संघर्ष के बढ़ते दायरे को समझने के लिए अहम है. अभी सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह तनाव सीमित हमलों तक रहेगा या लाल सागर और बाब-अल-मंदेब के रास्ते बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप लेगा.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement