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तेल भंडार, सऊदी बॉर्डर और लाल सागर पर पकड़... इस एक शहर के पीछे क्यों पड़े हैं हूती विद्रोही?

यमन में हूती की पश्चिमी बढ़त के बीच लड़ाई का फोकस अब मारिब पर आ गया है, जहां सरकारी बल बाहरी इलाकों में झड़पों के बीच बचाव में जुटे हैं. तेल और गैस के बड़े केंद्र मारिब पर खतरा बढ़ने से सरकार की कमाई, मोर्चे की दिशा और बाब अल-मंदेब के आसपास तनाव साथ-साथ गहरा रहा है.

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यमन के हूती लगातार सऊदी समर्थक सरकार पर दबाव बना रहे हैं. (Photo- ITG)
यमन के हूती लगातार सऊदी समर्थक सरकार पर दबाव बना रहे हैं. (Photo- ITG)

यमन में हूती विद्रोहियों की बढ़ती ताकत के बीच अब रणनीतिक रूप से बेहद अहम मारिब पर दबाव बढ़ता दिख रहा है. पश्चिमी यमन में लगातार जमीन गंवा रही यमन सरकार अपनी रणनीति बदलती नजर आ रही है. खोए हुए इलाकों को वापस लेने की कोशिश के बजाय सरकार अब अपने बचे हुए गढ़ों को बचाने पर ज्यादा ध्यान दे रही है. इनमें सबसे अहम मारिब है, जो यमन का तेल-गैस केंद्र और सरकार की आमदनी के बड़े सोर्सेज में से एक है.

सरकारी फौज अल-मखा (मोचा या मोखा शहर) और ताइज के पश्चिम में गंवाए इलाकों, जिनमें बाब अल-मंदब भी शामिल है, को वापस लेने के बजाय मारिब जैसे बचे हुए इलाकों को बचाने में जुटी है. वहीं हूती ताइज के साथ-साथ मारिब के बाहरी इलाकों में भी दबाव बढ़ा रहे हैं. सरकार फिलहाल हूतियों की बढ़त रोकने के लिए बड़े पैमाने पर सऊदी हवाई हमलों पर निर्भर है.

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मारिब क्यों है इतना अहम?

मारिब का महत्व सिर्फ इसलिए नहीं है कि यह सरकार के कब्जे में है. यह यमन का अहम तेल-गैस इलाका है. यहां घरेलू इस्तेमाल के लिए देश का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार मौजूद है. ऐसे में मारिब पर कब्जा सरकार की आर्थिक रीढ़ को बड़ा झटका दे सकता है.

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मोखा शहर पर हूतियों के कब्जे के बाद जश्न मनाते समर्थक. (Photo- AP)

 

भौगोलिक तौर पर भी मारिब बेहद अहम है. यह राजधानी सना से करीब 120 किलोमीटर दूर है और सऊदी बॉर्डर से कमोबेश 340 किलोमीटर दूर है. इसके आसपास अल-जौफ, हद्रामौत, शब्वा और अल-बैदा जैसे इलाके हैं. मारिब शहर सऊदी अरब की सीमा से लगे अल-वादिया बॉर्डर क्रॉसिंग की तरफ जाने वाले प्रमुख रास्तों में से एक पर स्थित है. यही रास्ता पूर्वी मारिब के तेल क्षेत्रों से भी जुड़ता है.

यानी मारिब पर कब्जा हूतियों को सऊदी सीमा के करीब पहुंचने और उत्तरी यमन में अपनी सैन्य पकड़ मजबूत करने का मौका दे सकता है. फिलहाल मारिब शहर और उसके आसपास का पूर्वी-मध्य हिस्सा सरकार के नियंत्रण में है. इसे उत्तरी यमन में सरकार का आखिरी बड़ा गढ़ माना जा रहा है.

मारिब प्रांत के पीछे क्यों पड़े हैं हूती?

यमन का मारिब शहर सऊदी सीमा से कमोबेश 340 किलोमीटर दूर है. यहां 2 मिलियन से ज़्यादा बेघर लोग, यमन के बड़े आर्मी बेस, तेल और गैस फील्ड और एक खास पावर स्टेशन हैं. हूतियों ने बार-बार शहर पर कब्जा करने की कोशिश की है, लेकिन पिछले हमले नाकाम रहे हैं. यमनी मीडिया ने बताया कि हूतियों ने मारिब प्रांत के इलाकों में बड़ी संख्या में लड़ाके और मिलिट्री इक्विपमेंट भेजे हैं, जिससे एक और हमले की तैयारी का डर बढ़ गया है.

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रिपोर्ट के मुताबिक, यमन के पश्चिमी तट पर हूती विद्रोहियों की बड़ी बढ़त के बाद यह बढ़ोतरी हुई है, जिसमें लाल सागर के बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा करना और बाब अल-मंदाब इलाके की ओर बढ़ना शामिल है. यमनी सेना ने बताया कि उन्हें पता था कि मारिब हूतियों का अगला बड़ा टारगेट बन सकता है. उन्होंने कहा, "हम जानते हैं कि नया दबाव मारिब पर होगा."

कई मोर्चों पर एक साथ बढ़ रहा दबाव

हाल के हफ्तों में यमन में लड़ाई कई मोर्चों पर फैल गई है. पश्चिमी तट और बाब अल-मंदब के पास मोखा और होदेदा के आसपास भीषण झड़पें हुई हैं. सऊदी सीमा से लगे अल-जौफ और धालेआ में भी लड़ाई तेज हुई है. पिछले दो हफ्तों में ताइज, पश्चिमी तट, अल-जौफ, मारिब और धालेआ में मिलाकर सैकड़ों लोगों के मारे जाने और 880 के घायल होने की खबर है.

हूतियों ने सऊदी समर्थक सरकार के वाहन को उड़ाया. (Photo- AFP)

 

तटीय इलाकों में बढ़त के बाद हूतियों ने लाहज और मारिब की तरफ भी रुख किया है. मारिब के बाहरी इलाकों में झड़पों की खबरें सामने आई हैं. रिपोर्ट्स में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड यानी IRGC की ओर से हूतियों को हथियार और दिशा देने के दावे भी किए गए हैं.

यह भी पढ़ें: हूती हमलों के बाद सऊदी के साथ खड़ा हुआ पाकिस्तान, शहबाज शरीफ ने फोन पर की क्राउन प्रिंस से बात

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मारिब हूतियों के हाथ लगा तो क्या होगा?

मारिब पर कब्जा हूतियों के लिए एक साथ कई बड़े फायदे ला सकता है. पहला, सरकार के तेल-गैस संसाधनों और आमदनी पर सीधा असर पड़ेगा. दूसरा, उन्हें सऊदी सीमा के करीब रणनीतिक बढ़त मिलेगी. तीसरा, उत्तरी यमन पर उनका नियंत्रण काफी मजबूत हो सकता है.

इसके साथ ही पश्चिमी तट और बाब अल-मंदब की तरफ बढ़त हूतियों को लाल सागर के अहम शिपिंग रूट पर भी ज्यादा दबाव बनाने की ताकत दे सकती है. यही वजह है कि मारिब की लड़ाई अब सिर्फ यमन के भीतर सत्ता की जंग नहीं रह गई है. इसके असर का दायरा सऊदी अरब, लाल सागर और पूरे क्षेत्र तक पहुंच सकता है.

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