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'क्वाड चीन के खिलाफ नहीं, इसका मकसद...', अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्या कहा

अटलांटा बैठक के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि क्वाड देशों का नहीं, बल्कि कुछ खास तरह के व्यवहारों का विरोध करता है. इस समूह ने सप्लाई-चेन की मजबूती, आर्थिक सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को भी प्राथमिकता दी.

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अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा क्वाड चीन या किसी दूसरे देश के खिलाफ नहीं बनाया गया है.(Photo: Reuters)
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा क्वाड चीन या किसी दूसरे देश के खिलाफ नहीं बनाया गया है.(Photo: Reuters)

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शनिवार को एक बड़ा बयान दिया. उन्होंने साफ कहा कि 'क्वाड' का गठन चीन या किसी दूसरे देश का विरोध करने के लिए नहीं किया गया है. रुबियो ने यह भी तर्क दिया कि इसका मुख्य उद्देश्य किसी खास देश को निशाना बनाना नहीं, बल्कि कुछ खास तरह के व्यवहारों और गतिविधियों से निपटना है.

अटलांटा में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, भारत और जापान के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद रुबियो ने यह बयान दिया. रुबियो ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि क्वाड चीन या किसी दूसरे देश के खिलाफ नहीं बनाया गया है. उन्होंने कहा, 'क्वाड किसी के भी खिलाफ नहीं है. यह कोई ऐसा मंच नहीं है जो किसी देश का विरोध करने के लिए बनाया गया हो.' 

हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि चारों देशों की चिंताएं बार-बार एक ही देश से जुड़ी हैं. उन्होंने सीधे तौर पर चीन का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा उसी की ओर था. उन्होंने कहा, 'क्वाड के भीतर हम जो चिंताएं जताते हैं, वह व्यवहार और गतिविधियों से जुड़ी हैं. यह गतिविधियां या व्यवहार बार-बार एक ही देश की ओर से आ रहे हैं. यह बात सभी के लिए स्पष्ट हैं.'

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'क्वाड चीन के खिलाफ नहीं बना'

रुबियो ने आगे चीन का नाम लेते हुए यह स्पष्ट किया कि यह गठबंधन चीन या किसी दूसरे देश के खिलाफ नहीं बना है. उन्होंने क्वाड को चार देशों के बीच एक ऐसा सहयोग बताया, जिनके साझा हित हैं और जो कुछ खास व्यवहारों का मिलकर विरोध करते हैं. 

यह भी पढ़ें: आतंकवाद, ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा... क्वाड में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने क्या मुद्दे उठाए

खास बाय यह है कि रुबियो की हालिया टिप्पणी ऐसे वक्त में आई है, जब क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों ने दुनिया भर में सप्लाई चेन को मजबूत करने का संकल्प लिया. साथ ही, उन्होंने आर्थिक दबाव, निर्यात पर रोक लगाने और बाजार से जुड़े गलत तरीकों पर भी गहरी चिंता जताई. हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर चीन का नाम नहीं लिया.

हिंद-प्रशांत समूह के चार सदस्य देशों का यह संयुक्त बयान ऐसे समय में आया है जब अहम खनिजों के निर्यात पर चीन की रोक को लेकर वैश्विक तनाव बढ़ रहा है. वहीं, अमेरिका G20 के उन देशों को एकजुट करने की कोशिश कर रहा है जो रेयर अर्थ और दूसरे अहम खनिजों पर चीन के दबदबे को लेकर चिंतित हैं. क्वाड ने आर्थिक दबाव को लेकर चिंता भी जताई है. 

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संयुक्त बयान में कहा गया, "उन्होंने आर्थिक दबाव को लेकर गहरी चिंता जताई है. इसमें मनमाने ढंग से निर्यात पर लगाई गई पाबंदियां, और ऐसी गैर-बाजार नीतियां व तौर-तरीके शामिल हैं, जिनके कारण उत्पादन क्षमता जरूरत से ज्यादा हो जाती है और महत्वपूर्ण उद्योगों में वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होती है."

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