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होर्मुज जैसी होगी बाल्टिक सागर की हालत? पुतिन की चेतावनी ने बढ़ाई यूरोप की टेंशन

यूक्रेन के साथ जारी जंग के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोपीय देशों को साफ संदेश दिया है कि मॉस्को युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी टकराव का जवाब देने के लिए तैयार है. पुतिन ने 2030 तक रूस से संभावित संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि अगर रूस और यूरोप के बीच सीधी जंग छिड़ी तो कोई भी देश जीतकर नहीं निकलेगा.

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पुतिन ने यूरोप को दी दोटूक चेतावनी दी है (Photo-File)
पुतिन ने यूरोप को दी दोटूक चेतावनी दी है (Photo-File)

पिछले साढ़े चार साल से यूक्रेन से जंग लड़ रहे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि उनका देश यूरोप के साथ युद्ध नहीं चाहता, लेकिन लड़ाई के लिए तैयार है. नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के साथ अपनी टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि 'यूरोप में कई देश 2030 तक रूस के साथ संभावित संघर्ष की तैयारी कर रहे हैं. जहां तक हमारी बात है, हम भी युद्ध के लिए तैयार हैं.'

हालांकि पुतिन ने ये भी कहा कि रूस यूरोप के साथ अपने संबंध फिर से सुधारने के लिए भी तैयार है, चाहे वो यूरोपीय संघ हो या अलग-अलग देश. राष्ट्रपति पुतिन ने यूरोपीय देशों को चेतावनी भी दी और कहा कि रूस और यूरोप के बीच सीधा युद्ध होता है, तो इसमें कोई भी पक्ष विजेता नहीं होगा और इसके विनाशकारी परिणाम होंगे और किसी को भी ये बात नहीं भूलनी चाहिए.

होर्मुज स्ट्रेट जैसे हो सकते हैं बाल्टिक सागर में हालात 

मॉस्को में रूस-अफ्रीका शिखर सम्मेलन के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बाल्टिक सागर में आवाजाही पर कथित पाबंदियों और रूसी जहाजों को लेकर यूरोप की नीतियों पर भी आपत्ति जताई और चेतावनी दी है कि तनाव बढ़ने पर हालात होर्मुज स्ट्रेट से भी ज्यादा खराब हो सकते हैं.

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राष्ट्रपति पुतिन कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि सभी पक्ष अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पालन करेंगे. और अगर ऐसा नहीं हुआ, तो बाल्टिक सागर में भी वैसी ही स्थिति पैदा हो जाएगी, जैसी होर्मुज स्ट्रेट में है. क्या कोई चाहता है कि बाल्टिक सागर में भी वैसी ही स्थिति हो, जैसी फारस की खाड़ी या होर्मुज स्ट्रेट में हैं ? मुझे नहीं पता. हम ऐसा नहीं चाहते, लेकिन किसी भी चुनौती का जवाब जरूर देंगे.

यह भी पढ़ें: क्या यूक्रेन से डर गए पुतिन... घर के चारों तरफ 50 एयर डिफेंस सिस्टम तैनात

यूरोपीय देशों को रूसी हमले का सता रहा डर!

लातविया के संविधान संरक्षण ब्यूरो और यूरोपीय सैन्य अधिकारियों की रिपोर्टों के मुताबिक यूक्रेन युद्ध के बाद  रूस 2030 से 2035 के बीच में अपनी सेना का पुनर्गठन करके यूरोपीय देशों की सीमाओं पर चुनौती पेश कर सकता है.

इसको देखते हुए यूरोपीय संघ और नेटो ने अपनी 'Defence Readiness Roadmap 2030' के तहत सैन्य खर्च बढ़ाना शुरू कर दिया है, ताकि किसी भी संभावित खतरे का मुकाबला किया जा सके. ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों के खुफिया अनुमानों में भी 2030 के दशक के करीब के समय को सामरिक रूप से संवेदनशील माना गया है.

रूस और यूरोपीय देशों में तनाव की वजह क्या है?

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दरअसल यूक्रेन में जंग की वजह से रूस और यूरोपीय देशों के संबंध बेहद खराब दौर से गुजर रहे हैं. रूस यूरोपीय देशों की ओर से यूक्रेन को हथियार दिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताता रहा है.. साथ ही रूस दावा करता है कि अगर पश्चिमी देश यूक्रेन को हथियार नहीं देते तो लड़ाई कब के खत्म हो गई होती. वहीं, यूरोपीय देशों का कहना है कि पुतिन के विस्तारवादी नीतियों को रोकने के लिए यूक्रेन को सैन्य मदद देना एक दम सही कदम है.

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