scorecardresearch
 

बदले मुइज्जू... इंडिया आउट का नारा देने वाले राष्ट्रपति अब भारत को कह रहे शुक्रिया!

मालदीव के जो नेता "इंडिया आउट" का नारा देकर सत्ता में आए थे, वे अब मालदीव के इंफ्रास्ट्रक्चर को बदलने में भारत की भूमिका के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा कर रहे हैं. राष्ट्रपति मुइज्जू की नीतियों में आया यह बदलाव इकोनॉमिक्स की मजबूरियों की कहानी कहता है.

Advertisement
X
भारत मालदीव के इंफ्रा प्रोजेक्ट को फाइनेंस कर रहा है. (Photo: PTI)
भारत मालदीव के इंफ्रा प्रोजेक्ट को फाइनेंस कर रहा है. (Photo: PTI)

मालदीव के मौजूदा राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने 2023 में "इंडिया आउट" कैंपेन के दम पर देश का सर्वोच्च पद हासिल किया था. इस कैंपेन के दौरान मुइज्जू ने आईलैंड पर तैनात भारतीय सैन्य कर्मियों को हटाने की मांग की थी. तीन साल बाद 2026 में मुइज्जू नई दिल्ली के सहयोग से चल रहे एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की तारीफ कर रहे हैं और इसे 'मालदीव और भारत के बीच करीबी और मजबूत रिश्तों' का प्रतीक बता रहे हैं.

पहली बार राष्ट्रपति बने मुइज्जू के लिए यह एक बड़ा बदलाव है. मुइज्जू के राष्ट्रपति बनते ही नई दिल्ली और माले के बीच पहले से अच्छे रहे रिश्तों में काफी खटास आ गई थी. बता दें कि भारत न केवल हिंद महासागर के इस आईलैंड नेशन के लिए आर्थिक मदद का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है, बल्कि मालदीव की सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक की देखरेख भी कर रहा है.

मुइज्जू की ये हालिया टिप्पणी निर्माणाधीन थिलामाले ब्रिज के निरीक्षण के दौरान आई. मालदीव गणराज्य के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार मुइज्जू ने इसे नई दिल्ली और माले के बीच मजबूत रिश्तों का प्रतीक बताया.

उन्होंने यह टिप्पणी नेशनल इंजीनियर्स डे पर एक खास मीडिया ब्रीफिंग के दौरान की, जब वे माले और विलिमाले द्वीपों को जोड़ने वाले पुल के हिस्से पर पहुंचे थे.

Advertisement

प्रेस से बात करते हुए मुइज्जू ने 'ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट' को भारत सरकार और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दी गई "खास प्राथमिकता" पर ज़ोर दिया. इस प्रोजेक्ट का मकसद माले, विलिमाले, गुलहिफालहू और थिलाफुशी द्वीपों को आपस में जोड़ना है.

उनके ऑफिस के मुताबिक मुइज्जू  ने प्रधानमंत्री मोदी और हाई कमिश्नर जी. बालासुब्रमण्यन का "दिल से आभार" भी जताया. साथ ही उन्होंने कहा कि थिलामाले ब्रिज के निर्माण में हुई प्रगति "दोनों देशों की टेक्निकल टीमों की समर्पित कोशिशों से ही संभव हो पाई है."

थिलामाले ब्रिज क्या है?

थिलामाले ब्रिज जिसे राष्ट्रपति मुइज्जू ने नई दिल्ली के साथ द्वीप समूह के मज़बूत रिश्तों का प्रतीक बताया है, महात्वाकांक्षी 'ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट' का मुख्य हिस्सा है.

GMCP सड़कों, पुलों और कॉज़वे का 6.7 किलोमीटर लंबा नेटवर्क है, जिसे राजधानी माले को आसपास के द्वीपों जैसे कि विलिमाले, गुलहीहालहु और थिलाफुशी से जोड़ने के लिए बनाया गया है.

हालांकि यह प्रोजेक्ट तय समय से कई साल पीछे चल रहा है, लेकिन पूरा होने पर यह मालदीव को उसके एयरपोर्ट, राजधानी शहर और औद्योगिक व बंदरगाह वाले इलाकों के बीच एक पूरा हाईवे कनेक्शन देगा.

इस प्रोजेक्ट के लिए पूरी फंडिंग भारत कर रहा है. भारत ने अपने एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक से 400 मिलियन डॉलर की लाइन ऑफ़ क्रेडिट और अलग से 100 मिलियन डॉलर की ग्रांट दी है. इस प्रोजेक्ट की शुरुआत अगस्त 2022 में तत्कालीन मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी जबकि इसके निर्माण का काम भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी 'एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड' को सौंपा गया था. 

Advertisement

कैसे बदल गए मुइज्जू?

मुइज़ू को चीन का समर्थक माना जाता है. 2023 में राष्ट्रपति चुने जाने के बाद उनकी पहली विदेश यात्रा चीन की थी. 

उस यात्रा के दौरान उन्होंने चीन को मालदीव के "सबसे करीबी सहयोगियों और विकास में साझेदारों" में से एक बताया था. साथ ही शी जिनपिंग के साथ मिलकर उन्होंने चीन के साथ संबंधों को "व्यापक रणनीतिक सहयोग साझेदारी" के स्तर तक बढ़ाया और इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश, डिजिटल और ग्रीन इकोनॉमी, कृषि, आपदा प्रबंधन और 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' से जुड़े 20 समझौतों पर हस्ताक्षर किए.

फिर भी चीन और खाड़ी देशों के साथ वैकल्पिक साझेदारी बनाने की उनकी कोशिशों से उन्हें वैसी आर्थिक मदद नहीं मिल पाई जैसी वे चाहते थे. मालदीव के पत्रकार और लेखक इब्राहिम माहिल मोहम्मद के 2025 के 'ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन' विश्लेषण के अनुसार चीन से मिलने वाली आर्थिक मदद काफी धीमी रही. इसकी वजह मालदीव पर पहले से मौजूद कर्ज का बोझ और कर्ज के रीस्ट्रक्चरिंग के अनुरोध थे, जो देश की नए कर्ज लेने की क्षमता को सीमित करते हैं.

यहीं पर भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया. नई दिल्ली ने 2024 में मालदीव को उसके आर्थिक संकट से प्रभावी ढंग से बाहर निकाला. इसके बाद उसी साल अक्टूबर में भारत की राजकीय यात्रा के दौरान मुइज़ू ने नई दिल्ली को भरोसा दिलाया कि "मालदीव एक सच्चा दोस्त बना रहेगा."

Advertisement

उन्होंने कर्ज के संकट को टालने में मदद के लिए भारत सरकार का आभार भी जताया और भारत की तारीफ करते हुए उसे "फ़र्स्ट रिस्पॉन्डर" बताया, जो जरूरत के समय मालदीव के साथ खड़ा रहा है. इसके अलावा भारत उन चुनिंदा देशों में से एक है जो इस आईलैंड में बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाओं में निवेश करने के लिए अभी भी तैयार है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement