कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को महाराष्ट्र के नासिक में प्रदेश के जिलाध्यक्षों से बात की. पार्टी के 'संगठन सृजन अभियान' के तहत आयोजित शिविर में प्रदेश के 68 जिलाध्यक्ष इकट्ठा हुए थे. इस दौरान राहुल गांधी ने कांग्रेस की विचारधारा, जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत करने और आम लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं पर काम करने पर जोर दिया. शिविर में शामिल जिलाध्यक्षों के मुताबिक राहुल गांधी ने RSS का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी अपनी एक विचारधारा है और हाथ-पैर टूट जाएं तो भी वह RSS की विचारधारा को स्वीकार नहीं करेंगे.
अहिल्यानगर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सचिन गुर्जर ने आजतक से कहा कि राहुल गांधी ने जिलाध्यक्षों से कांग्रेस की विचारधारा पर मजबूती से टिके रहने की बात कही. गुजर के मुताबिक राहुल गांधी ने कहा, 'कांग्रेस की एक विचारधारा है. मेरी भी एक विचारधारा है. मेरे हाथ-पैर भी टूट जाएं तो भी मैं RSS या उनके ऑफिस में नहीं जाऊंगा.'
राहुल गांधी ने जिलाध्यक्षों को केवल पार्टी नेताओं के आगे-पीछे घूमने के बजाय आम लोगों के बीच जाने की नसीहत दी. उन्होंने कहा कि लोग खुद नेताओं के पास नहीं आएंगे, क्योंकि वे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी और समस्याओं से जूझ रहे हैं. इसलिए कांग्रेस के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को खुद उनके बीच जाना होगा और उनके मुद्दों पर काम करना होगा.
गड्ढे खोदने से आम लोगों के घर रहने तक की ट्रेनिंग
रत्नागिरी कांग्रेस की जिलाध्यक्ष सोनललक्ष्मी घाग ने आजतक को बताया कि 10 दिनों के शिविर में जिलाध्यक्षों को जमीनी स्तर पर आम लोगों और मजदूरों की जिंदगी समझने के लिए अलग-अलग गतिविधियां कराई गईं.
उन्होंने बताया कि मनरेगा के काम को समझने के लिए जिलाध्यक्षों से गड्ढे खुदवाए गए, जिससे कई लोगों के हाथों में छाले तक पड़ गए. इसका उद्देश्य यह समझना था कि एक मजदूर अपनी मजदूरी के लिए कितनी मेहनत करता है और अगर उसकी मजदूरी रोक दी जाए तो उसके परिवार पर क्या असर पड़ता है.
ट्रेनिंग के दौरान जिलाध्यक्षों को एक दिन सामान्य परिवारों के घरों में रहने के लिए भी भेजा गया, ताकि वे करीब से आम लोगों की जिंदगी और उनकी समस्याओं को समझ सकें.
'बड़ी-बड़ी बातें करने से पहले घर की महिलाओं का सम्मान करें'
राहुल गांधी ने जिलाध्यक्षों के साथ-साथ उनके परिवार के सदस्यों से भी बातचीत की. सोनललक्ष्मी घाग के मुताबिक राहुल ने पार्टी नेताओं को परिवार में महिलाओं के सम्मान का संदेश देते हुए कहा कि आप बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और राजनेता बनते हैं, लेकिन सबसे पहले अपने घर की महिलाओं को सम्मान देना सीखिए.
शिविर में जिलाध्यक्षों के मानसिक विकास और शारीरिक फिटनेस से जुड़ी गतिविधियां भी कराई गईं. सचिन गुजर के मुताबिक 'जिजित्सु' नाम से एक गतिविधि राहुल गांधी के फिजिकल ट्रेनर की ओर से कराई गई, जिसका उद्देश्य शारीरिक फिटनेस के साथ मानसिक विकास पर काम करना था.
महाराष्ट्र कांग्रेस के बड़े नेताओं से भी राहुल की बैठक
जिलाध्यक्षों के शिविर से पहले राहुल गांधी ने महाराष्ट्र कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ बैठक की. इसमें राज्य से जुड़े कई राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा हुई. कांग्रेस नेताओं ने नाशिक कुंभ से जुड़े कार्यों में कथित भ्रष्टाचार, महाराष्ट्र में SIR की स्थिति, किसानों की आत्महत्या, प्रस्तावित शक्तिपीठ हाईवे के खिलाफ किसानों के विरोध और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर राहुल गांधी से चर्चा की.
बीजेपी की ओर से राहुल गांधी के खिलाफ किए जा रहे प्रदर्शनों को लेकर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि कांग्रेस नारी शक्ति वंदन कानून का विरोध नहीं करती है और इसे लेकर गलत बातें फैलाई जा रही हैं. उन्होंने सवाल किया कि क्या RSS अपने संगठन का अध्यक्ष किसी महिला को बनाएगा?
आदिवासी छात्रों से भी मिले राहुल गांधी
नाशिक दौरे के दौरान राहुल गांधी ने आंदोलन कर रहे आदिवासी छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की. आदिवासी विद्यार्थी कृति समिति से जुड़े सोनू गायकवाड़ के मुताबिक कुल 24 छात्र राहुल गांधी से मिलने पहुंचे थे और उन्होंने करीब 15 छात्रों से व्यक्तिगत रूप से लगभग पांच-पांच मिनट तक बातचीत की.
छात्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने उनकी समस्याओं और आंदोलन को समर्थन देने का भरोसा दिलाया. छात्रों का कहना है कि राहुल गांधी महाराष्ट्र के आदिवासी स्कूलों और हॉस्टलों में लागू सेंट्रल किचन सिस्टम को देखने के लिए भी आ सकते हैं.
राहुल गांधी की महाराष्ट्र में हुई बैठकों और संगठनात्मक गतिविधियों से साफ है कि कांग्रेस अब चुनाव के समय ही नहीं, बल्कि लगातार संगठन को जमीन पर सक्रिय रखने की रणनीति पर काम कर रही है. राहुल जिलाध्यक्षों को बड़े नेताओं के आसपास रहने के बजाय Gen Z, मजदूरों, किसानों, छात्रों और आम लोगों के बीच जाकर उनके मुद्दों पर काम करने का संदेश दे रहे हैं. अब सवाल यह है कि कांग्रेस इस कवायद के जरिए अपने संगठन को कितना मजबूत कर पाती है और पार्टी के नेता 'नेतागिरी' से निकलकर आम लोगों से कितना जुड़ पाते हैं.