फ्रांस की राजधानी पेरिस में नाबालिग लड़कियों को ऑनलाइन ब्लैकमेल करके यौन शोषण करने वाले आरोपी भारतीय युवक पर मुकदमा शुरू हो गया है. इस आरोपी ने लड़कियों को मजबूर किया कि वो खुद को नुकसान पहुंचाएं.
फ्रांसीसी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी की पहचान रोहन राणे (29) के रूप में हुई है. रोहन मूल रूप से भारत का रहने वाला है और वो फ्रांस के एंटीब्स के एक बिजनेस स्कूल में पढ़ाई करने गया था. पढ़ाई पूरी करने के बाद वो फिटनेस कोच के तौर पर काम करने लगा था।.
रोहन राणे पर नाबालिगों को टॉर्चर करने, जबरन वसूली और बच्चों से जुड़े यौन शोषण सामग्री (CSAM) को प्रसारित करने जैसे कई आरोप दर्ज हैं.
बंद कमरे में हो रहा ट्रायल
फ्रांसीसी पुलिस ने उसे साल 2021 में गिरफ्तार किया था. पेरिस की एक स्पेशल क्रिमिनल कोर्ट में इस मामले की सुनवाई सोमवार से शुरू हुई है, जो शुक्रवार तक चलने की उम्मीद है. खास बात ये है कि आरोपी के ट्रायल को पूरी तरह बंद कमरे (इन-कैमरा) में चलाया जा रहा है. अगर कोर्ट में आरोप साबित हो जाते हैं, तो रोहन को उम्रकैद की सजा तक हो सकती है.
कैसे खुला था इस खतरनाक सिंडिकेट का राज?
नवंबर 2020 में अमेरिकी संस्था 'नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रेन' (NCMEC) ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर एक 12 साल की बच्ची से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री की सूचना दी थी. जांच एजेंसियों के मुताबिक, रोहन राणे 'डिस्कॉर्ड' मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर 'CVLT' नाम के एक सीक्रेट ऑनलाइन ग्रुप से जुड़ा हुआ था और उस लीड कर रहा था.
इस ग्रुप के सदस्य नव-नाजी, नस्लवादी और यहूदी-विरोधी विचार रखते थे और कमजोर और किशोर उम्र की लड़कियों को अपना निशाना बनाते थे.
'सेक्सटॉर्शन' के जरिए फैलाया आतंक
अखबार 'ले मोंड' की रिपोर्ट के मुताबिक, ये गिरोह लड़कियों की न्यूड तस्वीरें हासिल करने के लिए 'सेक्सटॉर्शन' यानी यौन ब्लैकमेलिंग का सहारा लेता था. इसके बाद तस्वीरें पब्लिक करने की धमकी देकर और डरा-धमकाकर पीड़ित लड़कियों को यौन कृत्यों के लिए मजबूर किया जाता था. ये गिरोह उन्हें खुद को शारीरिक नुकसान पहुंचाने के लिए मजबूर करता था.
जस्टिस डिपार्टमेंट ने अपने डॉक्यूमेंट में बताया कि ये गिरोह पीड़ितों को अपने बाल काटकर खाने के लिए कहता था. आरोपी लड़कियों को अपना पेशाब पीने, खुद को घूंसा मारना, खुद को नस्लभेदी गालियां देने और रेजर ब्लेड से CVLT सदस्यों के नाम अपनी स्किन पर गुदवाने के लिए मजबूर करता था.
ये अंतरराष्ट्रीय दायरा कई देशों तक फैला हुआ था. जांच में अमेरिका, ब्रिटेन, डेनमार्क, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, एस्टोनिया और नीदरलैंड्स जैसे कई देशों में करीब 100 पीड़ितों की पहचान की गई है. इस मुकदमे में अमेरिका की 18 से 21 साल की उम्र की पांच लड़कियां बतौर सिविल पक्षकार शामिल हुई हैं, जिनके वीडियो लिंक के जरिए गवाही देने की उम्मीद है.
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बंद कमरे में क्यों चल रही है सुनवाई?
अमेरिकी अधिकारियों की स्पेशल रिक्वेस्ट पर पेरिस की अदालत ने इस मुकदमे को बंद कमरे में सुनने का आदेश दिया. इसके पीछे की वजह ये बताई गई कि आरोपी का ये गिरोह पहले भी पीड़ितों और गवाहों को डराने-धमकाने की कोशिश कर चुका है और अमेरिकी अभियोजकों को भी धमकियां दी गई थीं.