दिल्ली-NCR में प्रदूषण बढ़ने के कारण ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण लागू किया जाएगा. एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 300 के पार पहुंचने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने यह फैसला लिया है. आयोग की बैठक में GRAP-2 लागू करने का निर्णय लिया गया. इसका आधिकारिक आदेश जल्द जारी किया जाएगा.
दिल्ली में सोमवार को इस सीजन में पहली बार हवा की गुणवत्ता 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंच गई. राजधानी का औसत AQI 324 दर्ज किया गया. इस साल 4 फरवरी को AQI 339 था. इसके बाद सोमवार को प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा रहा. यानी करीब 9 महीने बाद हवा इतनी खराब हुई. शाम 4 बजे जहांगीरपुरी में AQI सबसे ज्यादा 436 दर्ज किया गया. रोहिणी में यह 415 और पंजाबी बाग में 413 रहा. इन तीनों इलाकों में हवा की हालत 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच गई थी.
दिल्ली के 58 निगरानी केंद्रों में से 37 पर हवा की गुणवत्ता 'बहुत खराब' रही. 17 केंद्रों पर यह 'खराब' श्रेणी में दर्ज की गई. तीन केंद्रों पर हवा 'गंभीर' श्रेणी में थी, जबकि सिर्फ एक केंद्र पर हवा की गुणवत्ता 'मध्यम' रही.
5 नवंबर तक हवा की गुणवत्ता 'बहुत खराब'
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, AQI 301 से 400 के बीच होने पर हवा 'बहुत खराब' और 401 से 500 के बीच होने पर 'गंभीर' मानी जाती है. दिल्ली में PM2.5 प्रदूषण का मुख्य कारण बना हुआ है. इसके छोटे कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं और खून में भी मिल सकते हैं. दिल्ली के लिए जारी अनुमान के मुताबिक, 3 से 5 नवंबर तक हवा की गुणवत्ता 'बहुत खराब' रह सकती है. इसके बाद अगले छह दिनों में थोड़ा सुधार होने की उम्मीद है और हवा 'खराब' श्रेणी में पहुंच सकती है.
इससे पहले 21 अक्टूबर 2026, बुधवार को दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज-1 लागू किया गया था. GRAP को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने प्रदूषण पर काबू पाने के लिए तैयार किया था. इसके तहत प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ अलग-अलग चरणों में पाबंदियां लगाई जाती हैं.
GRAP स्टेज-2 में क्या-क्या पाबंदियां होंगी?
GRAP के दूसरे चरण में स्टेज-1 के तहत लागू सभी नियम जारी रहेंगे. इसके साथ ही प्रदूषण कम करने के लिए कुछ अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे. इस दौरान निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाया जा सकता है. सड़कों पर धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी का छिड़काव बढ़ाया जाएगा.
इसके अलावा होटल, रेस्तरां और सड़क किनारे मौजूद ढाबों में तंदूर या दूसरे कामों के लिए कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक रहेगी. निर्माण स्थलों पर धूल रोकने से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करना जरूरी होगा.
GRAP स्टेज-3 में क्या होगा?
तीसरे चरण में स्टेज-1 और स्टेज-2 की पाबंदियां भी जारी रहेंगी. इसके अलावा गैर-जरूरी निर्माण और तोड़फोड़ के कामों पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी. इसमें मिट्टी की खुदाई, नींव के लिए पाइलिंग, खुली खाई खोदना, वेल्डिंग, पेंटिंग, प्लास्टर और टाइल लगाने जैसे काम शामिल होंगे.
कच्ची सड़कों और खुले इलाकों में सीमेंट, रेत, बालू, गिट्टी और फ्लाई ऐश जैसी निर्माण सामग्री ले जाने पर भी पाबंदी रहेगी. इस चरण में स्टोन क्रशर, ईंट भट्ठे और खनन से जुड़े काम बंद कर दिए जाएंगे. इसके साथ ही बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल वाली चार पहिया हल्की गाड़ियों के चलने पर रोक लगाई जाएगी. स्कूलों में कक्षाएं ऑनलाइन मोड में चलाने का निर्देश भी दिया जा सकता है.
GRAP स्टेज-4 में कौन से प्रतिबंध लगेंगे?
GRAP का चौथा चरण तब लागू किया जाएगा, जब AQI 450 के पार पहुंच जाएगा. इस दौरान प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए और सख्त कदम उठाए जाएंगे. हाईवे, सड़क, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज, बिजली ट्रांसमिशन और दूसरी सार्वजनिक परियोजनाओं समेत सभी तरह के निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी जाएगी.
इस चरण में वाहनों के इस्तेमाल पर भी कड़ी पाबंदियां लगाई जाएंगी. छोटी कक्षाओं के लिए ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड में पढ़ाई कराने का निर्देश दिया जा सकता है. इसके अलावा सरकारी और निजी दफ्तरों में 50 फीसदी कर्मचारियों के साथ काम करने और बाकी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम देने का विकल्प लागू किया जा सकता है. सरकार प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए कुछ अतिरिक्त प्रतिबंध भी लगा सकती है.