दक्षिण अमेरिकी देश पराग्वे में तेजी से बढ़ रहे एक डिजिटल बैंक के डूबने से बड़ा वित्तीय और राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है. देश की करीब 65 लाख आबादी में लगभग 30 लाख ग्राहक अपनी बचत का पैसा इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं. इस संकट में सरकारी फंड के करोड़ों डॉलर भी फंस गए हैं. इसके बाद राष्ट्रपति सैंटियागो पेना को पद से हटना पड़ा.
पराग्वे की सीनेट ने पेना को महाभियोग के जरिए राष्ट्रपति पद से हटा दिया. इसके बाद उपराष्ट्रपति पेड्रो एलियाना ने नए राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली. महाभियोग के बाद पेना को हिरासत में लिया गया और फिर उन्हें नजरबंद कर दिया गया.
इस पूरे संकट के केंद्र में उएनो बैंक है. यह एक डिजिटल बैंक है, जिसका नियंत्रण ग्रुपो वास्केज के पास था. 3 नवंबर को पराग्वे के केंद्रीय बैंक ने उएनो बैंक को अपने नियंत्रण में ले लिया. नियामकों को बैंक की वित्तीय स्थिति में तेजी से गिरावट मिली थी. इसके बाद बैंक के खिलाफ जांच, विरोध प्रदर्शन और राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हुई.
उएनो बैंक कैसे बना बड़ा बैंक
पराग्वे ब्राजील, अर्जेंटीना और बोलीविया से घिरा दक्षिण अमेरिका का एक देश है. इसकी अर्थव्यवस्था कृषि उत्पादों के निर्यात और जलविद्युत पर काफी निर्भर है. ग्रुपो वास्केज ने 2021 में फिनांसेरा एल कोमर्सियो को खरीदा और इसे फिनांसेरा उएनो में बदल दिया. फरवरी 2022 में बैंक ने अपना डिजिटल बैंकिंग ब्रांड शुरू किया. इसके बाद 2024 में उसने विजन बैंक का अधिग्रहण कर उसे अपने साथ मिला लिया. इससे बैंक के ग्राहकों और कारोबार का दायरा तेजी से बढ़ा.
रॉयटर्स के मुताबिक, उएनो बैंक के करीब 30 लाख ग्राहक थे और वह करीब 85 करोड़ डॉलर के सरकारी फंड का प्रबंधन करता था. इसमें सरकारी संस्थानों और पेंशन से जुड़े फंड भी शामिल थे.
बैंक क्यों डूबा?
उएनो बैंक की वित्तीय स्थिति खराब होने के पीछे उसकी पूंजी और कर्ज की गुणवत्ता में गिरावट को अहम वजह माना गया. एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, पराग्वे के केंद्रीय बैंक ने बैंक की संपत्तियों में कमियां, ठीक से दर्ज नहीं किए गए लेनदेन और ग्रुपो वास्केज से जुड़ी कंपनियों को दिए गए कर्ज की पहचान की.
केंद्रीय बैंक के निरीक्षकों ने जून में ही बैंक के अंदरूनी कर्ज को लेकर जोखिम की पहचान कर ली थी. आरोप है कि बैंक ने अपने मालिकों से जुड़ी कंपनियों को बड़ी रकम का कर्ज दिया, जो कानूनी सीमा से ज्यादा था और इसके लिए पर्याप्त गारंटी भी नहीं थी. नियामकों ने जब उएनो के खातों को ठीक किया तो बैंक की पूंजी कानूनी तौर पर जरूरी न्यूनतम स्तर की आधी से भी कम रह गई. इसके बाद 3 नवंबर को केंद्रीय बैंक ने बैंक के खिलाफ कार्रवाई शुरू की. जमा और वसूली योग्य संपत्तियों को दूसरे बैंकों में भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई.
सरकारी फंड भी फंसा
बैंक के संकट का असर आम ग्राहकों के साथ सरकारी फंड पर भी पड़ा. एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, राज्य के पेंशन और स्वास्थ्य कोष के करीब 38 करोड़ डॉलर उएनो बैंक में जमा और निवेश थे. बैंक के जरिए पेंशन पाने वाले करीब 32 हजार सेवानिवृत्त लोग भी प्रभावित हुए. सरकार ने बाद में ऐसा कानून मंजूर किया, जिसके तहत एक राज्य गारंटी फंड से प्रभावित जमाकर्ताओं को पांच कामकाजी दिनों के भीतर पैसा लौटाने की व्यवस्था की गई. 5 नवंबर से छोटे खातों वाले ग्राहकों को शुरुआती भुगतान भी शुरू कर दिया गया.
राष्ट्रपति पेना का बैंक से क्या संबंध था?
इस पूरे मामले में राष्ट्रपति सैंटियागो पेना का नाम इसलिए जुड़ा क्योंकि उनके ग्रुपो वास्केज से संबंध रहे हैं. पेना अर्थशास्त्री और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में काम कर चुके हैं. वह अगस्त 2023 में पराग्वे के राष्ट्रपति बने थे. रिपोर्टों के मुताबिक, पेना के पास पहले ग्रुपो वास्केज में हिस्सेदारी थी. हालांकि, उनका कहना है कि उन्होंने मार्च 2025 में अपनी हिस्सेदारी बेच दी थी और बैंक में सीधे निवेश से इनकार किया है.
वहीं, फिनांसेरा उएनो के पूर्व प्रमुख कार्लोस कार्वालो को पेना ने पराग्वे के केंद्रीय बैंक का अध्यक्ष बनाया था. उएनो बैंक की निगरानी को लेकर आलोचना के बाद कार्वालो ने 3 नवंबर को राष्ट्रपति के कहने पर पद से इस्तीफा दे दिया.
अभियोजकों के सामने पेश हुए पेना
महाभियोग के एक दिन बाद शनिवार को पूर्व राष्ट्रपति सैंटियागो पेना अभियोजकों के सामने पेश होने के लिए अटॉर्नी जनरल के कार्यालय पहुंचे. वह उएनो बैंक के संकट से जुड़े मामले में जांच का सामना कर रहे हैं. अभियोजकों ने कहा है कि पेना के खिलाफ आरोप अभी तय किए जा रहे हैं और इनमें प्रभाव के गलत इस्तेमाल का आरोप भी शामिल हो सकता है.
पराग्वे के अभियोजकों ने 6 नवंबर को पेना और पूर्व केंद्रीय बैंक प्रमुख कार्लोस कार्वालो की गिरफ्तारी का आदेश दिया था. पेना को अपने घर में हिरासत में रखने का निर्देश दिया गया था, जब तक कि उन्हें आर्थिक अपराध और भ्रष्टाचार निरोधक इकाई के सामने पेश नहीं किया जाता.