अफगानिस्तान की ओर से लगातार हो रहे हमलों के आगे पाकिस्तान ने घुटने टेक दिए हैं. शहबाज सरकार ने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से अपील की है कि वो आतंकवादियों को अफगान की धरती का इस्तेमाल करके हमले करने से रोके.
दोनों पड़ोसी देशों के बीच लगातार हो रही सीमा झड़पों और अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमलों की वजह से तनाव काफी बढ़ गया है. ऐसे में पाकिस्तान ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि ये सशस्त्र समूह तालिबान के अपने शासन के लिए भी बड़ा खतरा बन सकते हैं.
पाकिस्तानी टेलीविजन पर टेलीकास्ट एक थिंक टैंक के कार्यक्रम में बोलते हुए, पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने बताया कि उन्होंने जुलाई 2025 में अपनी काबुल यात्रा के दौरान अफगान प्रधानमंत्री मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद को पहले ही ये चेतावनी दी थी.
'आतंकवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रहे तो...'
डार ने कहा, 'मैंने उन्हें याद दिलाया था कि अगर अफगान अधिकारी अपनी धरती से सक्रिय आतंकवादी समूहों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने में नाकाम रहे, तो वो दिन दूर नहीं जब ये समूह उनकी अपनी सरकार के लिए भी खतरा बन जाएंगे.' हालांकि, उन्होंने ये नहीं बताया कि इस पर अफगानिस्तान की ओर से क्या प्रतिक्रिया दी गई थी और काबुल की तरफ से भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं आई.
आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप
पाकिस्तान लगातार काबुल पर पाकिस्तानी तालिबान यानी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), प्रतिबंधित बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट जैसे चरमपंथी संगठनों को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है. हालांकि TTP अफगानिस्तान के सत्ताधारी तालिबान से अलग है, लेकिन उसके साथ उसके गहरे संबंध हैं.
विदेश मंत्री ने कहा कि अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान के राजनयिक और आर्थिक प्रयासों से उसकी सुरक्षा मांग यानी अफगान धरती से सक्रिय आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई पर कोई सार्थक प्रगति नहीं हुई है. उन्होंने कहा, 'अच्छे पड़ोसी संबंध दोनों तरफ की जिम्मेदारी हैं. इसका मतलब ये नहीं है कि हम चुपचाप एक के बाद एक हमले सहते रहें.'
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक स्थिर और समृद्ध अफगानिस्तान चाहता है, लेकिन सीमा पार से लगातार मिल रहे आतंकवादी खतरों को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
बाड़ निर्माण और टीटीपी सबसे बड़ा खतरा
डार ने बताया कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ अपनी 2,600 किलोमीट लंबी सीमा पर बाड़ लगाने का काम लगभग 95 प्रतिशत पूरा कर लिया है. ये बाड़ 2017 में पाकिस्तानी सेना की चौकियों पर सीमा पार से हुए हमलों के बाद शुरू की गई थी. उन्होंने TTP को पाकिस्तान के सबसे गंभीर सुरक्षा खतरों में से एक बताया, जो स्कूलों, मस्जिदों, बाजारों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाता है.
इसी कार्यक्रम में बोलते हुए सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने भी हिंसा बढ़ने के लिए TTP सहित अफगानिस्तान आधारित आतंकवादियों को जिम्मेदार ठहराया. तरार ने संयुक्त राष्ट्र और स्वतंत्र मूल्यांकनों का हवाला देते हुए कहा कि अफगानिस्तान में 6,000 से ज्यादा TTP लड़ाके और कुल मिलाकर 20,000 से ज्यादा उग्रवादी मौजूद हैं.
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उन्होंने आरोप लगाया कि 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद से TTP अफगान धरती का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ भर्ती, प्रशिक्षण और हमलों की योजना बनाने के लिए कर रहा है.
बता दें कि संयुक्त राष्ट्र मिशन इन अफगानिस्तान (UNAMA) ने सितंबर में अपनी रिपोर्ट में बताया था कि इस साल अफगानिस्तान में सीमा पार से हुई हिंसा में 1,100 से ज्यादा नागरिक हताहत (मृत और घायल) हुए हैं.