पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जेल से बाहर लाने के लिए उनकी पार्टी प्रदर्शन में डटी है. इस बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) को बातचीत के लिए बुलाया है. हालांकि उन्होंने विपक्षी पार्टी से अपना 'लॉन्ग मार्च' तुरंत रद्द करने के लिए कहा है.
बता दें कि PTI ने खैबर पख्तूनख्वा के लक्की मरवत शहर से अपना मार्च शुरू किया था. पार्टी इस्लामाबाद में धरना देकर इमरान खान की रिहाई की मांग करना चाहती है.
इसे लेकर सरकार और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की पार्टी पीपीपी के साथ पीटीआई की दो दिनों तक लगातार बैठकें हुई थीं. हालांकि, ये बातचीत बेनतीजा रही.
बैठक बेनतीजा रहने के बाद प्रधानमंत्री शरीफ ने आरोप लगाया कि इस बातचीत का कोई सकारात्मक नतीजा इसलिए नहीं निकला क्योंकि विपक्षी दल का मकसद वार्ताओं को असफल करना था. उन्होंने दावा कि पीटीआई ने उन मुद्दों पर भी बदलाव की मांग रखी, जिन पर पहले ही सहमति बन चुकी थी.
जेल में मुलाकात को लेकर फंसा पेच
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, शनिवार दोपहर शुरू हुआ बैठकों का दूसरा दौर पूरी रात चला था, लेकिन रविवार तड़के ये बताया गया इमरान खान से मुलाकात के मुद्दे पर बातचीत रुक गई. पीटीआई की जिद थी कि विरोध प्रदर्शन वापस लेने से पहले उन्हें जेल में इमरान खान से मिलने की अनुमति दी जाए. लेकिन सरकार की सख्त शर्त थी कि मुलाकात से पहले मार्च और विरोध प्रदर्शन को पूरी तरह खत्म किया जाए.
अब पाकिस्तानी पीएम का पीटीआई को फिर से मुलाकात करने के न्योते ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सरकार इमरान खान की रिहाई की शर्त मान जाएगी?
वार्ता नाकाम होने के बाद पीटीआई का विरोध काफिला फिलहाल खैबर पख्तूनख्वा में ही है और उम्मीद है कि हफ्ते के आखिर तक वो इस्लामाबाद की तरफ कूच करेगा. हालांकि, टकराव टालने के लिए पर्दे के पीछे से बातचीत अभी भी जारी है, क्योंकि दोनों पक्ष आम जनता और सुरक्षा एजेंसियों के बीच किसी भी हिंसा से बचना चाहते हैं.
PTI के प्रदर्शन पर शहबाज शरीफ की चेतावनी
सरकार पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि अगर मार्च नहीं रुका तो इसे रोकने के लिए बल प्रयोग भी किया जा सकता है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देश की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि साल 2023 में डिफॉल्ट होने से बाल-बाल बचने के बाद देश की अर्थव्यवस्था अब पटरी पर लौट रही है.
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उन्होंने कहा कि पिछले ढाई सालों में सभी ने मिलकर अर्थव्यवस्था में सुधार किया है और मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता हासिल की है. ऐसे में इस तरह के प्रदर्शन देश की आर्थिक तरक्की को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं.