पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से अपनी स्पीच दी. इस दौरान उनके भाषण में एक बार फिर ऑपरेशन सिंदूर का खौफ दिखा. पाकिस्तानी पीएम ने एक बार अमेरिका का भारत-पाकिस्तान का संघर्ष रोकने का श्रेय देते हुए दावा किया कि, ट्रंप के 'समय पर हस्तक्षेप' की वजह से दक्षिण एशिया में बड़े पैमाने पर लोगों की जान बची. इसके साथ ही शहबाज शरीफ ने एक बार फिर कश्मीर मु्द्दा भी उठाया.
भारत ने 7 मई 2025 को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था. यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 नागरिकों की जान गई थी.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रुकवाया था. इसी हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए भी ट्रंप ने इस दावे को दोहराया. हालांकि भारत लगातार किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के दावे को खारिज करता रहा है.

ट्रंप की तारीफ में क्या बोले शहबाज?
करीब 23 मिनट के अपने संबोधन में शहबाज शरीफ ने ट्रंप की लीडरशिप की तारीफ की. उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के 'समय पर हस्तक्षेप' ने दक्षिण एशिया में करोड़ों लोगों की जान बचाने में मदद की. शरीफ ने अपने संबोधन में कश्मीर का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि अगर यह तय करना है कि दक्षिण एशिया दोबारा 2025 जैसी स्थिति में न पहुंचे तो कश्मीर मुद्दे का 'न्यायपूर्ण और निष्पक्ष समाधान' जरूरी है.
भारत संयुक्त राष्ट्र महासभा समेत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की ओर से कश्मीर को लेकर किए जाने वाले दावों को लगातार खारिज करता रहा है. भारत का स्पष्ट रुख है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और रहेगा. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के भाषण का जवाब देने के लिए भारत संयुक्त राष्ट्र में अपने 'राइट ऑफ रिप्लाई' का इस्तेमाल करेगा. परंपरा के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में तैनात युवा डिप्लोमैट्स में से किसी एक को पाकिस्तान के आरोपों और दावों का जवाब देने की जिम्मेदारी दी जाती है.
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सिंधु जल संधि का भी किया जिक्र
शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में सिंधु जल संधि (IWT) का मुद्दा भी उठाया. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कूटनीतिक और आर्थिक कदम उठाए थे. इनमें सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला भी शामिल था. भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद समेत आतंकवाद के सभी रूपों को समर्थन देना विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय तरीके से बंद नहीं करता, तब तक संधि स्थगित रहेगी.

शहबाज शरीफ ने पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच बातचीत कराने के लिए तेजी से कूटनीतिक प्रयास किए. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने वॉशिंगटन और तेहरान को इस्लामाबाद में एक मंच पर लाने में सफलता हासिल की. शरीफ के मुताबिक, इस्लामाबाद वार्ता से लेकर 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' तक संघर्ष खत्म कराने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए.
अपने संबोधन के दौरान शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का भी कई बार जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि बेहद कठिन परिस्थितियों में कूटनीति के लिए जगह बनाने में मुनीर के लगातार प्रयासों की अहम भूमिका रही.