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'फैसला अब अमेरिका करे...', 3 शर्तों के साथ 7 दिन में होर्मुज खोलने को तैयार ईरान

ईरान ने अमेरिका के सामने 7 दिन का प्लान रखा है. तीन शर्तें मानने पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने की बात कही है. इसके बाद परमाणु मुद्दे पर बातचीत फिर शुरू हो सकती है.

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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. (Photo: Reuters)
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. (Photo: Reuters)

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका के सामने एक प्रस्ताव रखा है. ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका उसकी तीन शर्तें मान लेता है, तो सात दिन के भीतर यह अहम समुद्री रास्ता खोल दिया जाएगा. इसके साथ ही दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत भी फिर शुरू हो सकती है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अब फैसला अमेरिका को करना है.

अराघची के मुताबिक, ईरान ने यह प्रस्ताव कतर के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया है. इस प्लान के तहत अमेरिका को कुछ कदम उठाने होंगे. उनका कहना है कि ये कदम नए नहीं हैं, बल्कि जून में हुए समझौते में पहले से शामिल हैं. अमेरिका के प्रस्ताव स्वीकार करते ही सात दिन की समयसीमा शुरू होगी.

ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं 3 शर्तें

ईरान के प्रस्ताव में अमेरिका से तीन मुख्य कदम उठाने को कहा गया है.

  1. ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाई जाए.
  2. ईरान के तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में छूट दी जाए.
  3. ऐसा युद्धविराम लागू किया जाए, जिसमें लेबनान भी शामिल हो.

अराघची ने कहा कि अमेरिका की ओर से उठाए जाने वाले कदम चार से पांच दिन में पूरे किए जा सकते हैं. इसके बाद छठे दिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोल दिया जाएगा. सातवें दिन अमेरिका के साथ बातचीत फिर शुरू होगी.

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'फैसला अब अमेरिका के हाथ में'

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अब्बास अराघची ने कहा कि 'फैसला अब अमेरिका के हाथ में है'. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान दबाव, धमकी या डराने की कोशिश को स्वीकार नहीं करेगा. उनके मुताबिक, ईरान दबाव में अपने संप्रभु अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा.

अराघची ने कहा कि अगर अमेरिका इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो सात दिन की समयसीमा उसी दिन से शुरू हो जाएगी. उन्होंने कहा कि समझौते के लिए जरूरी तैयारी पहले से पूरी है. दोनों देशों के बीच पहले भी समझौते को लेकर कई कोशिशें हो चुकी हैं, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया.

बीजिंग के रुख का स्वागत

कूटनीतिक हलचल के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजश्कियान ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के समर्थन की सराहना की. सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा कि इस्लामाबाद समझौते पर लौटने और बातचीत के जरिए मतभेद सुलझाने के पक्ष में खड़े होने के लिए वे शी जिनपिंग के शुक्रगुजार हैं. ईरान का यह बयान दिखाता है कि वह पश्चिमी दबाव के बीच चीन जैसे साझीदारों को भी भरोसे में रखकर आगे बढ़ना चाहता है.

जून में हुआ समझौता क्यों टूट गया था?

ईरान का मौजूदा प्रस्ताव जून में हुए एक समझौते से मिलता-जुलता है. उस समझौते में 60 दिनों की अंतरिम अवधि रखी गई थी, लेकिन यह व्यवस्था ज्यादा समय तक नहीं चल सकी. इसके बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमले फिर शुरू हो गए. अब दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी बनी हुई है. अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर जून के समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाते रहे हैं. परमाणु वार्ता के दौरान अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले भी हुए थे.

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सऊदी अरब को ईरान के प्रस्ताव पर संदेह

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब ईरान की इस नई पहल को लेकर आश्वस्त नहीं है. खाड़ी के कुछ देशों ने पहले ईरान के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का समर्थन किया था. उनका कहना था कि ऐसा समझौता किया जा सकता है, जिसमें ईरान को कुछ समय के लिए होर्मुज के प्रबंधन में भूमिका मिले. हालांकि, यमन में ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों के बढ़ते हमलों के बाद स्थिति बदल गई. सऊदी अरब से जुड़ी पाइपलाइन पर हमले ने भी चिंता बढ़ाई है.

गौरतलब है कि जंग छिड़ने से पहले दुनिया के कुल तेल और गैस कारोबार का करीब 20 फीसदी हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता था, जिसकी वजह से यहां पैदा हुआ कोई भी संकट सीधे पूरी दुनिया की जेब पर असर डालता है.

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