scorecardresearch
 

मिसाइल, तोप और ड्रोन से उत्तर कोरिया का शक्ति प्रदर्शन, उसी दिन दक्षिण कोरिया ने भी दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें

उत्तर कोरिया ने मिसाइलों, तोपों और ड्रोन के साथ बड़ा लाइव-फायर सैन्य अभ्यास किया है. इस दौरान उसने अपनी सैन्य ताकत दिखाने का दावा किया. वहीं, दक्षिण कोरिया की सेना ने भी इसी दिन मिसाइल लॉन्च होने की जानकारी दी.

Advertisement
X
किम जोंग उन के राज में फिर तेज हुआ हथियारों का परीक्षण. (File photo: ITG)
किम जोंग उन के राज में फिर तेज हुआ हथियारों का परीक्षण. (File photo: ITG)

उत्तर कोरिया ने शनिवार को मिसाइलों, तोपों और ड्रोन्स के साथ लाइव-फायर सैन्य अभ्यास किया. देश का दावा है कि इस युद्धाभ्यास के दौरान एक साथ की गई ताबड़तोड़ फायरिंग ने उसकी भारी विनाशकारी क्षमता का खुला प्रदर्शन किया है. दूसरी तरफ, दक्षिण कोरिया की सेना ने भी इसी दिन पड़ोसी देश के वॉनसान इलाके से कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की पुष्टि की है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया का कहना है कि इस युद्धाभ्यास का मकसद सेना को कई हथियारों की फायरिंग एक साथ कंट्रोल करने वाले सिस्टम को ठीक से समझने का मौका देना था. यानी अलग-अलग हथियारों को एक ही जगह से मैनेज करने की ट्रेनिंग ली गई.

अभ्यास देखने के बाद मार्शल पाक जोंग चोन ने कहा कि इससे सेना की ताकत और निपुणता बढ़ेगी. उनके मुताबिक, आदेश मिलते ही दुश्मन की सेना को जड़ से उखाड़ फेंकने में आसानी होगी. सरकारी मीडिया के अनुसार, इस दौरान हथियारों ने मिलकर जिस तरह की तबाही मचाई, वह उनकी भीषण ताकत को साफ दिखाती है. हालांकि, उत्तर कोरिया जो दावे करता है, उनकी सच्चाई बाहर की कोई दूसरी एजेंसी पूरी तरह जांच नहीं पाती.

250 किलोमीटर तक गईं मिसाइलें

Advertisement

वहीं, दक्षिण कोरिया की सेना का कहना है कि शनिवार को दागी गईं कई मिसाइलें करीब 250 किलोमीटर का सफर तय कर देश के पूर्वी समुद्री इलाके में जा गिरीं. मिसाइलों की यह दूरी साफ इशारा करती है कि इन हथियारों को सीधे तौर पर दक्षिण कोरिया को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है. पिछले तीन हफ्तों में यह पहला मौका था जब उत्तर कोरिया ने इस तरह खुलेआम मिसाइलों का परीक्षण किया है.

अमेरिका से तनातनी जारी

यह युद्धाभ्यास ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और उत्तर कोरिया के रिश्ते अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं. पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन के साथ अच्छे रिश्तों का हवाला देते हुए दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले बड़े सैन्य अभ्यास को थोड़ा कम कर दिया था. ट्रंप की इस कोशिश का मकसद दोनों देशों के बीच बातचीत का दौर दोबारा शुरू करना था, लेकिन उत्तर कोरिया ने इसे ठुकरा दिया.

उत्तर कोरिया का कहना है कि सिर्फ युद्धाभ्यास छोटा करने से अमेरिका का रवैया नहीं बदलने वाला. रूस और चीन का साथ मिलने और परमाणु ताकत बढ़ने के बाद से उत्तर कोरिया के तेवर और ज्यादा सख्त हो गए हैं. जानकारों का मानना है कि आज किम जोंग उन खुद को पहले से ज्यादा मजबूत महसूस करते हैं और अमेरिका के साथ बराबरी पर बात करना चाहते हैं. किम साफ कह चुके हैं कि अगर अमेरिका उनके खिलाफ अपनी पुरानी दुश्मनी छोड़ दे और उन्हें परमाणु ताकत मान ले, तो वे बातचीत के लिए तैयार हो सकते हैं.
 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement