नेपाल के नुवाकोट में बाढ़ के बाद का नजारा दिल दहला देने वाला है. हादसे में एक हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. हर तरफ चीख-पुकार और अपनों को खोने का दर्द है. इस बीच सबसे बड़ी चुनौती शवों की पहचान करने की है.
यहां पहुंचे परिजनों की उम्मीदें अब पूरी तरह टूट चुकी हैं. जब अस्पताल और एयरबेस पर जिंदा बचे लोगों की लिस्ट में अपनों का नाम नहीं मिला, तो लोग भारी मन से अपनों के शवों को ढूंढने निकले हैं. लेकिन हादसे में शव इतने ज्यादा क्षत-विक्षत हो चुके हैं कि चेहरों से पहचान करना नामुमकिन हो गया है.
आजतक की टीम नुवाकोट पहुंची और पीड़ित परिजनों से बातचीत की. इससे पता चला कि नुवाकोट एयरबेस के पास संचय अपनी लापता पत्नी की तलाश में भटक रहे हैं. उनका फोन नहीं लग रहा है और उनका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है. संचय के पास अपनी पत्नी की एक पुरानी तस्वीर है, जिसमें उनके हाथ में शादी की अंगूठी साफ नजर आ रही है.
अब प्रशासन ने परिजनों को ऐसे कागजात और फाइलें थमा दी हैं, जिनमें मिले हुए शवों के अलग-अलग हिस्सों की तस्वीरें लगी हैं. किसी तस्वीर में कटा हुआ हाथ दिख रहा है तो किसी में पैर. संचय अब तस्वीरों में पत्नी के हाथ में पहनी वही अंगूठी ढूंढ रहे हैं. वो इस उम्मीद में हर तस्वीर को गौर से देख रहे हैं कि शायद उस अंगूठी से ये साफ हो जाए कि उनकी पत्नी जिंदा हैं या इस दुनिया में नहीं रहीं. जिंदगी की ऐसी बेबसी शायद ही किसी ने पहले देखी हो.
बिहार से आए करण की बेबसी
इसी तरह की दर्दनाक कहानी बिहार के छपरा जिले के रहने वाले करण की भी है. करण अपने भाई जितेंद्र शाह को खोजने नेपाल के नुवाकोट पहाड़ों तक पहुंचे हैं. जितेंद्र यहां एक पावर प्लांट में काम करते थे.
करण ने अपना दर्द बयान करते हुए कहा, 'हम लोग बिहार के छपरा से आए हैं. पिछले चार दिनों से भाई को ढूंढने के लिए दर-दर भटक रहे हैं. कहीं से कोई सही जवाब नहीं मिल रहा है. हम काठमांडू के एमसीबी (अस्पताल) गए थे, तो वहां हमें कागजात देकर साइबर सेंटर भेज दिया गया.
करण ने आगे कहा, 'वहां हमें जो तस्वीरें दिखाई गईं, उनमें शरीर के छोटे-छोटे टुकड़े थे.किसी का पैर कटा हुआ था तो किसी का हाथ. आप ही बताइए, इन तस्वीरों को देखकर हम अपने भाई को कैसे पहचानेंगे? न तो कहीं मेरे भाई का नाम दर्ज है और न ही कहीं हमारा पता. हमें कुछ समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें.'
नेपाल सरकार से डीएनए जांच की गुहार
नेपाल में आई ये तबाही इतनी भयंकर है कि शवों के शरीर के हिस्से अलग-अलग हो चुके हैं. सिर्फ फोटो देखकर या कपड़ों से पहचान कर पाना परिजनों के लिए एक डरावना और नामुमकिन सपना बन गया है.
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ऐसे में वहां मौजूद पीड़ित परिवारों की मांग है कि नेपाल सरकार जल्द से जल्द DNA एक्सपर्ट्स की मदद ले. बिना डीएनए टेस्ट के इन क्षत-विक्षत शवों की सही पहचान कर पाना मुमकिन नहीं है. अपनों को खो चुके लोग अब बस इतना चाहते हैं कि उन्हें कम से कम अपने परिजनों के अवशेष मिल जाएं, ताकि वो उनका अंतिम संस्कार सम्मान के साथ कर सकें.