बीते चार हफ्तों से चल रही ईरान जंग की कीमत कई देशों को चुकानी पड़ रही है. दक्षिण लेबनान के टायर (Tyre) शहर से सामने आई आजतक की ग्राउंड रिपोर्ट वास्तविकताओं से रूबरू कराती है. आजतक के रिपोर्टर अशरफ वानी युद्धग्रस्त दक्षिणी लेबनान में ग्राउंड जीरो पर मौजूद हैं और वहां से लगातार अपडेट भेज रहे हैं.
उन्होंने बताया कि लेबनान के दक्षिणी तट पर मछली पकड़ना लंबे समय से सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक जीवनशैली रहा है लेकिन आज यह परंपरा खतरे में है. जारी संघर्ष के कारण मछुआरे समुद्र में नहीं जा पा रहे हैं, जिससे भूमध्यसागर तक उनकी पहुंच कट गई है और सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है. हमारी यह रिपोर्ट आपको उसी तट पर ले जाती है, जहां यह संघर्ष जारी .
सैदा से नकूरा तक लगभग 1,500 मछुआरे अपनी रोजमर्रा की आय के लिए समुद्र पर निर्भर हैं. केवल टायर में ही लगभग 180 पंजीकृत नावें हैं, जो कभी सुबह-सुबह निकलकर ताजी मछलियां स्थानीय बाजारों तक लाती थीं. सैदा में 450 से अधिक परिवार पूरी तरह इस क्षेत्र पर निर्भर हैं.
एक मछुआरा बताता है कि हम हर सुबह समुद्र में जाते थे. समुद्र ही हमारी जिंदगी था. अब हम बस इंतज़ार करते हैं… और उम्मीद करते हैं कि हालात बदलेंगे.
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लेकिन यह उम्मीद अब कमजोर पड़ती जा रही है. लगातार तनाव और सुरक्षा प्रतिबंधों ने मछुआरों के लिए दक्षिणी जल क्षेत्रों तक पहुंचना बेहद खतरनाक और कई बार असंभव बना दिया है.
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कई लोगों के लिए इसका असर तुरंत और गंभीर है. बेचने के लिए मछली न होने से आमदनी बंद हो गई है और परिवारों के लिए बुनियादी जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है.