सऊदी अरब पर हमला हुआ तो पाकिस्तान अपनी सैन्य ताकत उसके बचाव में लगा सकता है. पाकिस्तान ने नए रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब को हर तरह की सैन्य मदद देने की बात कही है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने साफ कहा कि सऊदी अरब की रक्षा के लिए पाकिस्तान के पास जो भी सैन्य संसाधन हैं, वे इस्तेमाल के लिए उपलब्ध रहेंगे. उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमलों से सऊदी अरब की सुरक्षा को चुनौती मिल रही है.
ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने मंगलवार को रोम दौरे के दौरान यह बात कही. उनसे पूछा गया था कि क्या पाकिस्तान की सेना यमन में ईरानी ठिकानों पर हवाई हमलों में शामिल हुई है. इस पर उन्होंने सीधे तौर पर न तो इसकी पुष्टि की और न ही इससे इनकार किया. हालांकि, उन्होंने कहा कि सऊदी अरब की रक्षा के लिए हुए समझौते के तहत पाकिस्तान अपनी सैन्य क्षमताएं उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है. उन्होंने यह नहीं बताया कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान से सैन्य मदद मांगी है या नहीं.
आसिफ का यह बयान पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच हुए नए रक्षा समझौते के लिहाज से अहम है. तीनों देशों ने 7 अगस्त को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इसके तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा. तीनों देशों ने साफ किया है कि यह समझौता रक्षात्मक है और किसी खास देश के खिलाफ नहीं है.
हूती विद्रोहियों के हमलों से बढ़ी चिंता
इस दौरान आसिफ ने कहा कि हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. उन्होंने दावा किया कि हूतियों ने हाल ही में यमन के लाल सागर तट पर स्थित बंदरगाह शहर मोखा और लाल सागर के कई द्वीपों पर कब्जा कर लिया है. इससे बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के आसपास उनकी मौजूदगी बढ़ गई है. यह समुद्री रास्ता वैश्विक व्यापार के लिहाज से काफी अहम है.
आसिफ ने यह भी कहा कि हूती विद्रोहियों और इराक में उनके सहयोगी मिलिशिया समूहों ने सऊदी अरब की तेल सुविधाओं पर हमले किए हैं. उन्होंने सऊदी टैंकरों को इस जलमार्ग से गुजरने से रोकने की कोशिश भी की है. आसिफ ने हूतियों को हमलावर बताते हुए कहा, "सऊदी अरब का कोई भी दुश्मन पाकिस्तान का दुश्मन है."
अभी तैयार हो रहा रक्षा समझौते का ढांचा
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच हुए रक्षा समझौते को लागू करने के लिए सचिवालय बनाया जा रहा है. इसके जरिए गठबंधन का ढांचा और काम करने का तरीका तय होगा. कुछ दूसरे देशों ने भी इसमें शामिल होने की दिलचस्पी दिखाई है, लेकिन फिलहाल इसके विस्तार की योजना नहीं है. यह बयान तीनों देशों के सेना प्रमुखों की रियाद में हुई बैठक के कुछ दिन बाद आया है. बैठक में हूती हमलों से निपटने के तरीकों पर चर्चा हुई थी. संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भी तीनों देशों के शीर्ष राजनयिकों ने समझौते को लागू करने और सऊदी अरब पर हुए हमलों को लेकर बातचीत की थी.
सऊदी अरब को सैन्य मदद देने के साथ पाकिस्तान ईरान से बातचीत के रास्ते भी खुले रखना चाहता है. वह क्षेत्रीय संघर्ष खत्म करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौते की कोशिशें फिर शुरू करने के पक्ष में है. अप्रैल में पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की मेजबानी की थी. जून में दोनों पक्ष 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते की कोशिश पर सहमत हुए, लेकिन दोबारा संघर्ष शुरू होने से यह समयसीमा बीत गई.