इजरायल और फिलिस्तीन के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि इजरायल कब्जे वाले वेस्ट बैंक में बड़े स्तर पर कार्रवाई के लिए तैयार है. उनके इस बयान को इलाके में सैन्य अभियान तेज करने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
अल जजीरा के मुताबिक, नेतन्याहू ने पत्रकारों से कहा कि सुरक्षा बलों को गांवों में जाने, तलाशी लेने, हथियार जब्त करने और लोगों को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए गए हैं. क्षेत्र में जारी छापों और हिंसक झड़पों के बीच यह रुख काफी सख्त माना जा रहा है. बातचीत के दौरान यह बात जोर देकर कही गई कि 'आतंकी ठिकानों' के खिलाफ इजरायल व्यापक कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है. सेना का ध्यान इस समय पूरे इलाके में अपनी पकड़ मजबूत करने और सुरक्षा अभियानों को कड़ा करने पर केंद्रित है.
नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है, जब वेस्ट बैंक में इजरायली सेना की छापेमारी जारी है. इसी दौरान कुछ इलाकों में इजरायली बस्तियों के लोगों की ओर से भी हमलों की खबरें सामने आई हैं. ऐसे में इस बयान को मौजूदा अभियान को और आगे बढ़ाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
स्थानीय निवासियों का छलका दर्द
दूसरी तरफ, अल जजीरा से बात करते हुए 'यूथ अगेंस्ट सेटलमेंट्स' के संस्थापक ईसा अमरो ने जमीनी हकीकत बयां की. उनका कहना है कि कब्जे वाले क्षेत्रों में रहने वाले फिलिस्तीनी नागरिक हर दिन हिंसा का सामना करने को मजबूर हैं. हाल के महीनों में हमले काफी ज्यादा बढ़ गए हैं. जब भी कोई नागरिक अपने घर, परिवार या संपत्ति का बचाव करने की कोशिश करता है, उस पर हमला कर दिया जाता है या हिरासत में ले लिया जाता है.
ईसा अमरो ने दावा किया कि लगातार हमलों के डर से हाल के वर्षों में 20 से ज्यादा फिलिस्तीनी समुदाय अपने गांव छोड़ चुके हैं. उनके मुताबिक, सैकड़ों परिवार अपना घर, जमीन और बस्तियां छोड़ने को मजबूर हुए हैं. उन्होंने इसे 'जातीय सफाए' जैसा बताया.
फिलहाल वेस्ट बैंक में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. एक तरफ इजरायली सेना का अभियान जारी है, दूसरी तरफ स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार हो रही कार्रवाई से आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ रही हैं. ऐसे में नेतन्याहू के ताजा बयान के बाद सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं.