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इजरायल में कैसे होते हैं चुनाव? नेतन्याहू के सामने ये चुनौती, भारत से कितना अलग है पूरा सिस्टम

इजरायल में 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले और गाजा संघर्ष के बाद पहली बार राष्ट्रीय चुनाव होने वाला है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइसेनकोट के बीच कड़ा मुकाबला है.

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नेतन्याहू एक और कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ रहे हैं.  (Photo: Reuters)
नेतन्याहू एक और कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ रहे हैं. (Photo: Reuters)

इजरायल में मंगलवार को चुनाव होने वाले हैं. इसे लोग हाल के इतिहास का सबसे अहम चुनाव मान रहे हैं. 7 अक्टूबर, 2023 को हुए हमास हमले और उसके बाद गाजा, लेबनान और ईरान में चली तीन साल की जंग के बाद यह पहला राष्ट्रीय चुनाव है. 

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए इस चुनाव में जीतना बहुत जरूरी है, वे इजरायल के सबसे लंबे समय तक रहने वाले प्रधानमंत्री हैं. वे एक और कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ रहे हैं. उनके सामने पूर्व सेना प्रमुख गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाला गुट है. उनकी 'यशार' पार्टी को लोगों का काफी समर्थन मिल रहा है. 

इजरायल में कैसे होता है मतदान

इजरायल और भारत की चुनाव प्रणाली में काफी अंतर है. वहां, पूरा देश एक ही निर्वाचन क्षेत्र माना जाता है. मतदाता किसी स्थानीय उम्मीदवार को नहीं बल्कि एक पार्टी का चुनाव करते हैं. 

एक कार्डबोर्ड स्क्रीन के पीछे, मतदाता पार्टी के हिब्रू अक्षरों वाली एक पर्ची चुनते हैं, उसे लिफाफे में बंद करते हैं और बैलट बॉक्स में डाल देते हैं. यहां EVM का इस्तेमाल नहीं होता है.

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इजरायल की संसद, जिसे 'नेसेट' कहा जाता है, वहां 120 सीटें हैं. किसी भी पार्टी को सीटें जीतने के लिए कुल राष्ट्रीय मतों का कम से कम 3.25% हिस्सा हासिल करना जरूरी है. सरकार बनाने के लिए 61 सदस्यों के समर्थन की जरूरत होती है. आज तक किसी भी पार्टी को अकेले बहुमत नहीं मिला है, इसलिए इजरायल में हमेशा गठबंधन सरकारें ही बनती हैं. 

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क्या कहते हैं इजरायल के चुनावी पोल

चुनाव प्रचार पर रोक लगने से ठीक पहले आए अंतिम सर्वे के मुताबिक, आइसेनकोट की 'यशार' पार्टी, नेतन्याहू की 'लिकुड' पार्टी से मामूली बढ़त बनाए हुए है. हालांकि, कोई भी पक्ष 61 सीटों के जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच रहा है. इसलिए सर्वेक्षण से यह तो साफ है कि इजरायल में गठबंधन सरकार बनेगी. नेतन्याहू के गुट को लगभग 50 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि विपक्ष को 52 से 56 सीटें मिल सकती हैं. 14 से 16 सीटों वाली अरब पार्टियां निर्णायक साबित हो सकती हैं.

इजरायल के 'कान न्यूज' के एक सर्वेक्षण के अनुसार, मतदाताओं के लिए अर्थव्यवस्था (34%) और सुरक्षा (32%) सबसे बड़े मुद्दे हैं. एक और अहम मुद्दा यह है कि क्या अति-रूढ़िवादी पुरुषों की सेना में अनिवार्य रूप से भर्ती होनी चाहिए या नहीं. 

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भारत से कितनी अलग है इजरायली चुनाव प्रक्रिया

इजरायली चुनाव प्रक्रिया के मुताबिक, इजरायल में आखिरी वोट डाले जाने के तुरंत बाद ही मतगणना शुरू हो जाएगी. तकनीकी रूप से मतदान तब भी शुरू हो सकता है जब दूसरे क्षेत्रों में वोटिंग जारी हो. 28 अक्टूबर तक इजरायल में नतीजे साफ हो जाएंगे. हालांकि आधिकारिक रूप से 4 नवंबर को इजरायली चुनाव के नतीजे आने हैं. नतीजों के बाद राष्ट्रपति किसी एक नेता को सरकार बनाने का निमंत्रण देंगे. उस नेता के पास 28 दिनों का समय होगा, जरूरत पड़ने पर इसे 14 दिन और आगे बढ़ाया जा सकता है. 

अगर इस दौरान कोई सरकार नेहीं बन पाती है तो एक और चुनाव हो सकता है. तब तक मौजूदा सरकार कार्यवाहक सरकार के तौर पर काम करती रहेगी. 

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अब अगर एक नजर भारत और इजरायल के संबंधों पर डालें तो भारत और इजरायल के बीत 1992 से ही पूर्ण राजनयिक संबंध हैं. भारत में इजराइली दूतावास के प्रवक्ता मिशेल सेरोटा ने आजतक को बताया, 'इजरायल में इस बात पर पूरी सहमति है कि भारत एक रणनीतिक और महत्वपूर्ण साझेदार है, चाहे नेता कोई भी बने.'

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