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मोरक्को चुनाव में PAM की जीत, फिर भी सरकार बनाने का पेंच क्यों फंसा?

मोरक्को चुनाव में PAM सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन बहुमत से दूर रह गई. अब सरकार बनाने के लिए उसे दूसरे दलों का साथ जुटाना होगा. घोटाले के बावजूद मिली जीत के बाद पार्टी के सामने गठबंधन का गणित सुलझाने की चुनौती है.

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मोरक्को चुनाव में PAM की जीत. (Photo: Pixabay)
मोरक्को चुनाव में PAM की जीत. (Photo: Pixabay)

मोरक्को में चुनाव के नतीजे आ गए हैं, लेकिन सरकार बनने की राह अभी साफ नहीं हुई है. ऑथेंटिसिटी एंड मॉडर्नटी पार्टी यानी PAM ने सबसे ज्यादा सीटें जीतकर अपनी ताकत दिखाई है. पार्टी को 395 सीटों वाली संसद में 97 सीटें मिली हैं. मगर बहुमत के आंकड़े से दूर होने के कारण अब उसे दूसरी पार्टियों का सहारा लेना पड़ेगा. यानी चुनाव जीतने के बाद भी सरकार बनाने का असली खेल अब शुरू होगा.

PAM की जीत इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि पार्टी के कुछ वरिष्ठ सदस्य ड्रग्स और सोने की तस्करी से जुड़े एक बड़े मामले में फंसे थे. इनमें से कई को जेल की सजा भी हुई. ऐसे विवाद के बावजूद पार्टी पिछली बार के मुकाबले ज्यादा सीटें जीतने में सफल रही. दूसरी तरफ, पिछली सरकार में शामिल National Rally of Independents यानी RNI को नुकसान उठाना पड़ा. उसे 66 सीटें मिलीं. वहीं, जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी यानी PJD ने 2021 की 13 सीटों से बढ़कर इस बार 54 सीटें हासिल कीं.

चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनना एक बात है, लेकिन सरकार चलाने के लिए संसद में बहुमत जुटाना जरूरी है. PAM के पास इतनी सीटें नहीं हैं. पार्टी पहले ही कह चुकी है कि वह RNI के साथ गठबंधन नहीं करेगी. PJD के साथ जाने की संभावना भी कम है. दोनों दलों के बीच लंबे समय से राजनीतिक मतभेद हैं. PJD ने विपक्ष में बैठने की बात कही है.

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ऐसे में PAM की नजर तीसरे नंबर पर रहने वाली इस्तिक्लाल (Istiqlal) पार्टी समेत छोटे दलों पर हो सकती है. सरकार बनाने के लिए उसे इन पार्टियों से बातचीत करनी होगी. गठबंधन में किसे साथ लिया जाएगा, इस पर आगे की राजनीति टिकी है.

नई सरकार के सामने रोजगार से लेकर वर्ल्ड कप तक की चुनौती

मोरक्को 2030 फुटबॉल वर्ल्ड कप की सह-मेजबानी करने वाला है. इस आयोजन की तैयारियों पर अरबों डॉलर का निवेश होना है. इसी वजह से आने वाली सरकार को 'वर्ल्ड कप सरकार' कहा जा रहा है. मगर उसके सामने सिर्फ बड़े आयोजन की तैयारी नहीं होगी. देश के युवा बेरोजगारी, कम वेतन, महंगाई, बेहतर स्कूल, अस्पताल और सस्ते घरों की मांग कर रहे हैं. पिछले साल युवाओं के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन भी हुए थे. इस बार चुनाव में मतदान प्रतिशत 38 रहा, जो 2007 के बाद सबसे कम है. इससे लोगों की चुनावी राजनीति में घटती दिलचस्पी पर भी सवाल उठे हैं.

प्रधानमंत्री की रेस में कौन-कौन?

संविधान के मुताबिक मोहम्मद 6 उसी दल से सरकार का मुखिया चुनेंगे, जिसने सबसे ज्यादा सीटें जीती हैं. रेस में दो नाम सबसे आगे हैं. पहला नाम फातिमा-जहरा मंसूरी का है, जो पार्टी की कमान संभाल रही हैं. अगर मुहर लगी तो देश को पहली महिला प्रधानमंत्री मिल जाएगी. दूसरा चेहरा फौजी लकजा का है, जो फुटबॉल महासंघ से जुड़े रहे हैं और हालिया कामयाबियों के बाद उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है.
 

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