अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ईरान के एक अनुभवी डिप्लोमैट और राजनेता हैं. उनका जन्म 5 दिसंबर 1962 को ईरान की राजधानी तेहरान में हुआ था. अगस्त 2024 से वे ईरान के विदेश मंत्री के रूप में काम कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.
अराघची ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) जॉइन किया और करीब 9 साल तक वहां सेवा दी. इस दौरान उन्होंने ईरान-इराक युद्ध में भी हिस्सा लिया. सेना में बिताया गया यह समय उनके अनुभव और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने में अहम रहा. बाद में उन्होंने कूटनीति की राह चुनी और विदेश मंत्रालय में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया. वे मंत्रालय के प्रवक्ता (Spokesperson) भी रहे और फिनलैंड व जापान में ईरान के राजदूत के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं.
अगस्त 2024 में अराघची को ईरान का विदेश मंत्री बनाया गया. इस पद पर रहते हुए वे देश की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संभाल रहे हैं. 2026 में ईरान से जुड़े युद्ध और तनाव के दौरान उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही. युद्धविराम (Ceasefire) के बाद 11 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शांति वार्ता हुई, जिसमें अराघची ने हिस्सा लिया। यहां अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तर की बातचीत हुई.
अब्बास अराघची एक पारंपरिक फारसी परिवार से आते हैं. उनके परिवार में तीन बहनें और तीन भाई हैं. उनके पिता और दादा दोनों कालीन (कारपेट) के कारोबार से जुड़े थे. जब अराघची 17 साल के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया, जिससे परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ गईं. उनके बड़े भाइयों में से एक ईरान कारपेट एक्सपोर्टर्स यूनियन के बोर्ड मेंबर हैं, जबकि दूसरे कारपेट सेलर्स यूनियन से जुड़े हैं. किशोरावस्था में ही अराघची ने ईरान की इस्लामिक क्रांति में हिस्सा लिया, जिसने उनके जीवन की दिशा तय की.
इरानी विदेश मंत्री अराघची के साथ बातचीत से पहले एस. जयशंकर ने यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा के सामने ब्लैक सी में कमर्शियल शिपिंग और भारतीय नाविकों पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता जताई थी.
कैस्पियन सागर में एक ईरानी कमर्शियल जहाज पर यूक्रेन ने हमला कर दिया. ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने बताया कि इस हमले में एक नाविक की मौत हो गई. उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की को जवाबी कार्रवाई करने की धमकी दी है. अराघची ने कहा कि यूक्रेन को इसका बुरा नतीजा भुगतना होगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यदि देश के बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ तो उसका निर्णायक जवाब दिया जाएगा. ईरान के सैन्य अधिकारियों ने भी संकेत दिया है कि ऐसी स्थिति में क्षेत्रीय सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के ब्रिज और पावर प्लांट्स को निशाना बनाने की चेतावनी के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कड़ा जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि ईरान पर किसी भी हमले का जवाब उसी भाषा में दिया जाएगा.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक इंटरव्यू में कहा है कि अमेरिका और इजरायल ईरान को न तो धमका सकते हैं और न ही रिश्वत दे सकते हैं. उन्होंने बताया कि युद्ध के शुरुआती दिनों में कम्युनिकेशन पूरी तरह ठप था.
ईरान और अमेरिका के बीच बयानबाज़ी अब और तेज़ हो गई है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के उस बयान पर तंज कसा है, जिसमें उन्होंने Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों पर 20% टोल लगाने की बात कही थी।
डोनाल्ड ट्रंप के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से 20% टोल वसूलने और अमेरिका को इस समुद्री मार्ग का 'गार्डियन' घोषित करने वाले बयान पर ईरान ने तीखा पलटवार किया है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग का असली गार्डियन हमेशा से ईरान रहा है. उन्होंने ट्रंप के टोल के प्रस्ताव का मजाक उड़ाते हुए कहा कि जहाजों को टोल तो देना चाहिए लेकिन 20% थोड़ा ज्यादा है, ईरान इस मामले में निष्पक्ष रहेगा.
अमेरिका और ईरान की मस्कट में ओमान के साथ हुई वार्ता फेल हो गई. इस दौरान ओमान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दो रास्ते बनाने का सुझाव दिया था, लेकिन बात नहीं बन सकी. इस वार्ता को लेकर ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने ओमान पर दबाव डालकर शांति प्रस्ताव को असफल बनाया है.
ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज पर तनाव बढ़ गया है. ईरान ने जहाजों पर हमला कर खाड़ी को बंद किया. बदले में ट्रंप ने 300 टारगेट्स तबाह किए. ईरान ने जॉर्डन, बहरीन समेत कई अमेरिकी बेसों पर मिसाइलें दागीं.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानियों को लेकर कहा था कि वे घटिया और बीमार मानसिकता वाले लोग हैं, जिनकी अगुवाई क्रूर और हिंसक लोग कर रहे हैं.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अगर अमेरिका की ओर से धमकियां जारी रही तो तेहरान और वॉशिंगटन के बीच अंतिम समझौते पर बातचीत शुरु नही होगी. ये बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद आया है. अराघची ने दोनों देशों के बीच अंतरिम समझौते का सम्मान करने के लिए अपील की है.
अमेरिका ने युद्धविराम वार्ता के दौरान इजरायल की तरफ से ईरान के वरिष्ठ नेताओं की हत्या की आशंका को लेकर खाड़ी देशों के जरिए तेहरान को चेतावनी भेजी थी. रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ कथित तौर पर निशाने पर थे.
ईरान ने अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को 30 दिनों के दोबारा खोलने का दावा किया है. हालांकि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज का प्रबंधन पूरी तरह से ईरान के नियंत्रण में होगा. इसके साथ ही किसी बाहरी हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाएगी.
स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान की हाई प्रोफाइल बातचीत के दौरान एक तरफ ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची बैठक छोड़कर बाहर निकल गए, तो दूसरी तरफ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का एक बयान सोशल मीडिया पर छा गया. वेंस ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उनकी जिंदगी में दो सबसे महत्वपूर्ण लोग हैं, एक भारतीय और एक पाकिस्तानी. भारतीय उनकी पत्नी उषा वेंस हैं, जबकि पाकिस्तानी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर हैं.
स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई लंबी वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने आगे की प्रक्रिया को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं. बातचीत में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई और भविष्य की वार्ताओं के लिए रूपरेखा तैयार करने पर सहमति बनी. क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक विषयों और समुद्री मार्गों से जुड़े मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे. अब सभी की नजरें अगले चरण की बातचीत और संभावित समझौते पर टिकी हैं.
स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई पहले दौर की वार्ता तनावपूर्ण रहा. लेबनान में जारी तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी की वजह से बात बिगड़ते हुए नजर आई. ईरान के प्रतिनिधिमंडल ने ट्रंप के बयान के विरोध में थोड़े देर के लिए बैठक छोड़ दी थी, लेकिन बाद में बातचीत जारी रखने की इच्छा भी जाहिर की.
अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते को स्थायी शांति समझौते में बदलने की कोशिश अब स्विट्जरलैंड में होने वाली अहम वार्ता पर टिकी है. दोनों देशों के शीर्ष वार्ताकार आमने-सामने बैठेंगे. परमाणु कार्यक्रम, लेबनान संघर्ष और प्रतिबंधों जैसे कई बड़े मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं, जिनपर आगे की बातचीत होगी.
ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते को लेकर अटकलों का दौर जारी है. दोनों देशों के अधिकारियों के हालिया बयानों से संकेत मिले हैं कि बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन अंतिम शर्तों को लेकर अभी भी स्पष्टता नहीं है. इस बीच कई दावे और रिपोर्टें सामने आ रही हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. संभावित समझौते पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं.
अमेरिका के साथ जारी परमाणु कूटनीति के बीच ईरान ने अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कर दिया है कि अगर तय शर्तों को पूरा नहीं किया गया, तो अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर बिल्कुल नहीं किए जाएंगे और यह पूरी डील वर्चुअली यानी दूर बैठकर साइन हो सकती है.
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को स्पष्ट चुनौती दी है कि वह ईरान के संकल्प की परीक्षा बंद करे. उन्होंने बताया कि युद्ध में हार के बावजूद अमेरिका लगातार ईरान को कसौटी पर कस रहा है. अगर अमेरिका अपने देशों को सुरक्षित रखना चाहता है तो उसे ईरान के क्षेत्र को खाली करना होगा.
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने तेहरान में रविवार को ईरान के विदेश मंत्री से शांति वार्ता पर चर्चा की थी. लेकिन एक बार फिर पाकिस्तान की कोशिशें नाकाम होती दिख रही हैं. एक बार फिर ईरान-इजरायल में हमले तेज हो गए हैं. ईरान ने इजरायल पर हमले किए थे जिसके बाद इजरायल ने भी ईरान के कई शहरों में बमबारी कर दी है.