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ईरान ने दो जासूसों को दी फांसी, इजरायल के लिए जासूसी करने का आरोप

ईरान ने इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए जासूसी करने के आरोप में दो लोगों को फांसी दे दी है. पिछले दो महीनों में ईरान में फांसी की सजाओं में भारी बढ़ोतरी देखी गई है, जिसे लेकर संयुक्त राष्ट्र ने भी चिंता जताई है.

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ईरान में जासूसी के आरोप में कार्रवाई 2 लोगों को फांसी दी गई (File Photo)
ईरान में जासूसी के आरोप में कार्रवाई 2 लोगों को फांसी दी गई (File Photo)

ईरान ने एक बार फिर सख्त कदम उठाते हुए इजरायल के लिए जासूसी के आरोप में दो लोगों को फांसी दे दी है. यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब इलाके में तनाव पहले से ही बना हुआ है. इन दोनों पर देश की अहम और संवेदनशील जानकारी बाहर पहुंचाने का आरोप था, जिसे कोर्ट ने गंभीर माना और सजा सुनाई गई.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, इनमें से एक शख्स पर इस्फहान प्रांत में मौजूद नतांज परमाणु साइट के आसपास से खुफिया जानकारी जुटाने का आरोप था. ईरान की न्यायपालिका ने कहा कि दोनों को इजरायल और उसकी खुफिया एजेंसी मोसाद के साथ सहयोग का दोषी पाया गया, जिसके बाद उन्हें फांसी दी गई. यही वजह है कि इस पूरे मामले को ईरान में बड़ी सुरक्षा कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है.

दो हफ्तों में दूसरी बार फांसी, पहले भी हो चुकी है ऐसी कार्रवाई

अगर पिछले कुछ दिनों पर नजर डालें, तो यह पहली घटना नहीं है. इससे पहले 20 अप्रैल को भी ईरान ने दो लोगों को इसी तरह के आरोपों में फांसी दी थी. उन पर भी मोसाद से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा होने और देश के अंदर हमले की योजना बनाने का आरोप था. हालांकि, कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इन आरोपों को गलत बताया है, लेकिन ईरान अपने फैसले पर अडिग रहा.

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इसी बीच संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विभाग ने भी इन घटनाओं पर गहरी चिंता जताई है. रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी के बाद से अब तक ईरान में कम से कम 21 लोगों को फांसी दी जा चुकी है और 4000 से ज्यादा लोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया है. संयुक्त राष्ट्र ने साफ कहा है कि फांसी की सजा पर रोक लगनी चाहिए और हर मामले में निष्पक्ष सुनवाई होनी चाहिए.

वहीं दूसरी तरफ, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ईरान में सरकार विरोधी लोगों पर लगातार कार्रवाई हो रही है. इस साल की शुरुआत में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी कई लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए थे. ऐसे में साफ है कि देश के अंदर सुरक्षा और सख्ती दोनों ही मुद्दे अभी भी चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं.

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