भारत की कूटनीति इन दिनों काफी सक्रिय नजर आ रही है. बीजेपी सरकार के चार बड़े चेहरे अलग-अलग देशों के दौरे पर हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल चीन में हैं. विदेश मंत्री एस जयशंकर रूस दौरे पर गए है. वहीं वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल जापान के दौरे पर हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज से कनाडा और अमेरिका के दौरे पर जा रही हैं. इन दौरों का एजेंडा अलग है. लेकिन इनके पीछे भारत के रणनीतिक और आर्थिक हित जुड़े हैं.
अजित डोभाल की चीन में अहम बातचीत
अजित डोभाल का चीन दौरा सबसे ज्यादा रणनीतिक महत्व वाला माना जा रहा है. डोभाल 2 दिवसीय चीन दौरे पर बीजिंग में हैं. यहां भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत हो रही है. यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिख रहे हैं.
डोभाल की बातचीत में बॉर्डर पर शांति और स्थिरता अहम मुद्दा है. भारत चाहता है कि सीमा पर तनाव कम रहे. साथ ही दोनों देशों के बीच सामान्य रिश्तों का रास्ता भी खुला रहे. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सितंबर में भारत आने की संभावनाओं के बीच इस दौरे को और अहम माना जा रहा है.
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रूस में जयशंकर का मिशन
विदेश मंत्री एस जयशंकर रूस के दौरे पर गए. उन्होंने मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की. दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग पर भी चर्चा हुई. जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस के बीच आर्थिक सहयोग काफी बढ़ा है.
जयशंकर का दौरा व्यापार और आर्थिक रिश्तों के साथ रणनीतिक संबंधों के लिए भी अहम है. रूस भारत का पुराना साझेदार है. ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति में बड़े बदलाव हो रहे हैं, भारत रूस के साथ अपने संबंध बनाए रखना चाहता है. सितंबर में रूस के राष्ट्रपति पुतिन के भारत आने की संभावित यात्रा के पहले जयशंकर का दौरा और अहम हो जाता है.
जापान में गोयल का बड़ा फोकस
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 24 से 27 अगस्त तक जापान के दौरे पर हैं. वह 200 से ज्यादा कारोबारियों के बड़े प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं. यह भारत का जापान के लिए अब तक का सबसे बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल बताया गया है.
गोयल के दौरे में निवेश और व्यापार सबसे बड़ा मुद्दा है. सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल, स्वच्छ ऊर्जा, स्टील और तकनीक जैसे क्षेत्रों पर जोर है. भारत जापानी कंपनियों को देश में ज्यादा निवेश के लिए आकर्षित करना चाहता है. जापान भारत के लिए तकनीक और निवेश का महत्वपूर्ण साझेदार है.
कनाडा और अमेरिका पर वित्त मंत्री सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 25 अगस्त से 2 सितंबर तक कनाडा और अमेरिका के दौरे पर रहेंगी. कनाडा में वह आर्थिक और वित्तीय संवाद में हिस्सा लेंगी. अमेरिका में वह जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी.
उनके दौरे का मुख्य फोकस निवेश और आर्थिक रिश्ते हैं. वह वैश्विक निवेशकों और बड़ी कंपनियों के अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगी. भारत का लक्ष्य विदेशी निवेश बढ़ाना है. साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भारत की भूमिका मजबूत करना है.
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इन चार दौरों को एक साथ देखें तो भारत की विदेश नीति की तस्वीर साफ होती है. चीन में सुरक्षा और सीमा का मुद्दा है. रूस में रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी है. जापान में व्यापार और निवेश का एजेंडा है. अमेरिका और कनाडा में आर्थिक सहयोग और वैश्विक वित्त पर जोर है.
यानी भारत एक साथ कई मोर्चों पर काम कर रहा है. सरकार की कोशिश है कि सुरक्षा के साथ व्यापार भी मजबूत हो. पुराने साझेदारों के साथ रिश्ते बने रहें. नए निवेश के रास्ते खुलें. यही वजह है कि डोभाल, जयशंकर, गोयल और सीतारमण के विदेश दौरे इस समय खास चर्चा में हैं.