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ईरान के खिलाफ इस मुहिम में शामिल हुआ भारत! पाकिस्तान साथ, रूस ने बनाई दूरी

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ एक प्रस्ताव को सह-प्रायोजित किया है. इस प्रस्ताव में खाड़ी सहयोग परिषद के देशों और जॉर्डन पर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की गई है. प्रस्ताव में ईरान से खाड़ी देशों पर तुरंत हमले बंद करने की मांग की गई है.

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भारत ने ईरान के खिलाफ एक प्रस्ताव का समर्थन किया है (Photo: Reuters)
भारत ने ईरान के खिलाफ एक प्रस्ताव का समर्थन किया है (Photo: Reuters)

भारत ने ईरान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक प्रस्ताव को को-स्पॉन्सर किया है. प्रस्ताव में खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों और जॉर्डन पर ईरान के 'गंभीर' हमलों की कड़ी निंदा की गई. प्रस्ताव में ईरान से तुरंत सभी हमले बंद करने की मांग की गई और ईरान की उन धमकियों की भी आलोचना की गई है जिसमें वो होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की बात कर रहा है.

15 सदस्य देशों वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, जिसकी अध्यक्षता इस समय अमेरिका के पास है, ने बुधवार को इस प्रस्ताव को पारित कर दिया. प्रस्ताव के पक्ष में 13 वोट पड़े, जबकि कोई भी देश इसके खिलाफ नहीं गया. स्थायी सदस्य चीन और रूस ने प्रस्ताव पर वोटिंग से परहेज किया.

भारत खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों की पहले भी निंदा कर चुका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों की निंदा करते हुए कहा था कि ये हमले उन देशों की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन हैं.

बहरीन के प्रस्ताव को भारत समेत 135 देशों का समर्थन

बहरीन इस प्रस्ताव को लेकर आया था जिसे भारत समेत 135 देशों ने अपना समर्थन दिया. इन देशों में ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बांग्लादेश, भूटान, कनाडा, मिस्र, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, इटली, जापान, कुवैत, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, न्यूजीलैंड, नॉर्वे, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सिंगापुर, स्पेन, यूक्रेन, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, यमन और जाम्बिया शामिल हैं.

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प्रस्ताव में जीसीसी के सदस्य देशों- बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ-साथ जॉर्डन की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और राजनीतिक स्वतंत्रता के प्रति समर्थन को दोहराया गया.

ईरान के खिलाफ यूएनएससी प्रस्ताव की बड़ी मांगें क्या हैं?

प्रस्ताव में खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों की निंदा करते हुए कहा गया कि ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं और अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं.

इसमें मांग की गई कि ईरान तुरंत खाड़ी देशों और जॉर्डन पर सभी हमले बंद करे और पड़ोसी देशों के खिलाफ किसी भी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई या धमकी को तुरंत, बिना शर्त बंद करे.

प्रस्ताव में होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की ईरान की कार्रवाई की भी निंदा की गई. उसमें कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत व्यापारिक और वाणिज्यिक जहाजों को समुद्री मार्गों पर आवाजाही की स्वतंत्रता का सम्मान मिलना चाहिए, खासकर अहम समुद्री मार्गों पर. 

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