जर्मनी की विदेशी खुफिया एजेंसी BND यानी 'बुंडेस नाचरिचटेन डिएंस्ट' के वर्तमान प्रमुख 'मार्टिन येगर' ने रूस को लेकर यूरोप की सुरक्षा पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा है कि बाल्टिक देशों के खिलाफ रूस की ओर से निचले स्तर की सैन्य गतिविधियां हो सकती हैं. हालांकि, फिलहाल NATO क्षेत्र पर रूस की ओर से बड़े पैमाने पर सैन्य हमला होने की उम्मीद नहीं है.
मार्टिन येगर के मुताबिक, रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है. ऐसे में यूरोप के कुछ हिस्सों में सीमित सैन्य गतिविधियों, साइबर हमलों और अन्य तरह की सुरक्षा घटनाओं का खतरा बना रह सकता है. खास तौर पर बाल्टिक क्षेत्र को लेकर यूरोपीय देशों की चिंता बढ़ी हुई है.
बाल्टिक क्षेत्र में कितने देश आते हैं?
बाल्टिक क्षेत्र में केवल तीन देश आते हैं, एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया जैसे NATO सदस्य देश शामिल हैं. ये देश रूस के करीब स्थित हैं. रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ने के बाद इन देशों की सुरक्षा को लेकर NATO लगातार सतर्क रहा है. जर्मन खुफिया प्रमुख ने जर्मनी के अंदर मौजूद सैन्य और दूसरे महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले के खतरे की भी बात कही है.
वर्तमान में, नाटो में कितने सदस्य देश हैं?
वर्तमान में, नाटो के 32 सदस्य देश हैं. इन देशों को नाटो सहयोगी कहा जाता है, और ये संप्रभु राज्य हैं जो नाटो के माध्यम से एक साथ आकर राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा करते हैं और सर्वसम्मति से सामूहिक निर्णय लेते हैं. नाटो की स्थापना यूरोप और उत्तरी अमेरिका के 12 देशों द्वारा 4 अप्रैल 1949 को की गई थी.
नाटो में विस्तार कितने चरणों में हुआ हैं?
तब से लेकर अब तक, नाटो के विस्तार के 10 चरणों (1952, 1955, 1982, 1999, 2004, 2009, 2017, 2020, 2023 और 2024 में) के माध्यम से 20 और देश नाटो में शामिल हो चुके हैं. फिनलैंड और स्वीडन हाल ही में नाटो (NATO) में शामिल हो चुके हैं. फिनलैंड 4 अप्रैल 2023 को नाटो का 31वां सदस्य बना था, और स्वीडन 7 मार्च 2024 को इसका 32वां सदस्य बन गया.
जर्मन खुफिया प्रमुख ने क्या कहा?
उनका कहना है कि जर्मनी को केवल पारंपरिक सैन्य हमले की चिंता नहीं है, बल्कि ऐसी गतिविधियों का खतरा भी है जिनका मकसद देश की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाना हो सकता है. इनमें ड्रोन से जुड़ी घटनाएं, साइबर हमले, जासूसी और तोड़फोड़ जैसी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं.
यूरोपीय देशों में किन खतरों को लेकर चिंता बढ़ी है?
यूरोपीय देशों में पिछले कुछ समय से इस तरह के सुरक्षा खतरों को लेकर चिंता बढ़ी है. हालांकि, जर्मनी की खुफिया चेतावनी का मतलब यह नहीं है कि NATO और रूस के बीच तत्काल बड़े युद्ध की स्थिति बनने जा रही है. जर्मन अधिकारी भी बड़े पैमाने पर हमले की संभावना को लेकर कोई तत्काल चेतावनी नहीं दे रहे हैं.
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मौजूदा स्थिति में यूरोपीय देश रूस की सैन्य गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं. NATO सदस्य देश अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और संभावित हाइब्रिड खतरों से निपटने की तैयारी कर रहे हैं. जर्मनी के लिए भी सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा अब बड़ी प्राथमिकता बनती जा रही है.
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या रूस और NATO के बीच बढ़ता तनाव आने वाले समय में यूरोप की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है?