ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच एक 'स्टील्थ फाइटर जेट' को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है. ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने अमेरिकी सैन्य शक्ति का मजाक उड़ाते हुए दावा किया है कि तेहरान ने अमेरिका के सबसे आधुनिक 'F-35' लड़ाकू विमान को मार गिराया है.
गालिबाफ ने इसे वाशिंगटन के "हवाई प्रभुत्व के अंत" और "एक व्यवस्था के पतन" का प्रतीक बताया. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर फारसी में लिखते हुए गालिबाफ ने कहा, "एफ-35 सिर्फ एक लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि अमेरिकी सैन्य अहंकार और प्रभुत्व का प्रतीक था, एक ऐसा प्रतीक जिसके बारे में दावा किया जाता था कि वह किसी भी आंख के लिए अदृश्य है जिसे पहली बार दुनिया में निशाना बनाया गया है. उनके मुताबिक, यह घटना “एक व्यवस्था के पतन” का संकेत है"
उन्होंने आगे कहा कि दुनिया में पहली बार इस प्रतीक पर प्रहार हुआ है और यह एक पुराने दौर के खत्म होने का क्षण है. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दावा किया है कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने गुरुवार तड़के मध्य ईरान के ऊपर एक मिशन पर निकले F-35 जेट को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया.
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ईरान और अमेरिका के अलग-अलग दावे
ईरानी मीडिया ने कुछ फुटेज भी जारी किए हैं जिसमें आसमान में धुएं के गुबार और विमान के गिरने का दावा किया जा रहा है. दूसरी ओर, अमेरिका ने स्वीकार किया है कि एक F-35 घटना में शामिल था और उसे आपातकालीन लैंडिंग (Emergency Landing) करनी पड़ी, लेकिन वाशिंगटन ने विमान के मार गिराए जाने की पुष्टि नहीं की है. अगर ईरान का दावा सच साबित होता है, तो यह युद्ध के इतिहास में पहली बार होगा जब किसी F-35 को दुश्मन के हमले में नुकसान पहुंचा है.
एफ-35 को दुनिया के सबसे आधुनिक और अजेय लड़ाकू विमानों में गिना जाता है. ऐसे में यदि ईरान का दावा सही साबित होता है, तो यह सैन्य दृष्टि से एक बड़ा घटनाक्रम माना जाएगा. यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. दोनों पक्ष एक-दूसरे के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना रहे हैं.
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विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल सैन्य रणनीतियों को प्रभावित करेंगी, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और हवाई अभियानों की दिशा भी बदल सकती हैं. ईरान इस घटनाक्रम को सिर्फ सैन्य सफलता नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक बढ़त के रूप में पेश कर रहा है.