मिस्र की संसद ने राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी को सऊदी अरब की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने की मंजूरी दे दी है. यह कदम मिस्र को सऊदी अरब और यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच चल रहे संघर्ष में सीधे तौर पर धकेल सकता है.
अब्देल फतह अल-सिसी ने संसद से मिस्र के खाड़ी अरब सहयोगी और दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक की रक्षा के लिए मिलिट्री सपोर्ट देने की मंजूरी मांगी थी.
रॉयटर्स के मुताबिक, सदन के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया. बता दें, मिस्र ने अक्सर खाड़ी देशों पर ईरान और ईरान-समर्थित हमलों की निंदा की है, लेकिन वह सार्वजनिक रूप से सीधे युद्ध में शामिल नहीं हुआ है और न ही अगस्त में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए मक्का म्यूचुअल डिफेंस पैक्ट में शामिल हुआ है.
काहिरा संसद ने पिछले हफ्ते मतदान टाल दिया था, जब फॉरेन मिनिस्टर बदर अब्देलाती और इंटेलिजेंस चीफ हसन रशाद ने रियाद जाकर सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को एक पत्र सौंपा. इस पत्र में सिसी ने साफ किया कि मिस्र का सपोर्ट यमन पर हमला करने के बजाय सिर्फ सऊदी टेरिटरी और बॉर्डर्स की रक्षा तक ही सीमित रहेगा.
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इस बीच, यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और दो सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले करने का दावा किया..
हूती के अनुसार, रविवार (25 अक्टूबर) को तीन अलग-अलग मिलेट्री ऑपरेशन के तहत दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं. इन हमलों में सऊदी अरब के एयरबेस और नौसैनिक ठिकाने को भी निशाना बनाया गया.
हूती के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि यमन की सशस्त्र सेनाओं ने कई बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल करते हुए तीन सैन्य अभियान चलाए. उन्होंने दावा किया कि इन अभियानों में निर्धारित ठिकानों पर हमले किए गए.