पश्चिम बंगाल में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी नेताओं को निशाना बनाकर की जा रही अंडा फेंकने की घटनाओं पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने राज्य सरकार से इन सभी मामलों की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है.
दरअसल, बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद टीएमसी नेताओं पर हो रहे कथित हमलों और अंडे फेंकने की घटनाओं के संबंध में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के वकील दानिश फारूकी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस तापब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस पार्थ सारथी चटर्जी की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को ऐसी घटनाओं के संबंध में दर्ज FIR की संख्या के बारे में भी जानकारी देने का निर्देश दिया है.
'पुलिस को गाइडलाइन बनाने का निर्देश'
बेंच ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर को ये भी निर्देश दिया कि वो ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी पुलिस स्टेशनों के लिए खास गाइडलाइंस बनाएं. जस्टिस तापब्रत चक्रवर्ती ने कहा, 'अगर पुलिस कमिश्नर के पास गाइडलाइंस नहीं होंगी तो ऐसी घटनाएं होती रहेंगी. हम पुलिस कमिश्नर को सभी पुलिस स्टेशनों के लिए गाइडलाइंस बनाने का निर्देश देंगे, ताकि पुलिस उसके अनुसार कार्रवाई कर सके.'
कोर्ट में सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा कि वह ऐसी हरकतों का समर्थन नहीं करती है और कोर्ट को बताया कि जहां भी शिकायतें मिल रही हैं, वहां पुलिस कार्रवाई कर रही है.
सरकार ने उठाए कई कदम
राज्य के एडिशनल एडवोकेड जनरल ने इस मामले में दो हफ्ते का वक्त मांगते हुए कहा कि FIR दर्ज की जा रही हैं और जांच की जा रही है. साथ ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई भी हो रही है. उन्होंने बेंच को भरोसा दिलाया कि सरकार पुलिस द्वारा उठाए गए कदमों का रिकॉर्ड पेश करेगी.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने अदालत में दलील दी कि राज्य के एक मंत्री लोगों को अंडा फेंकने के लिए खुलेआम उकसा रहे हैं और एक विधायक की मौजूदगी में बुलडोजर का इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्होंने तुरंत अंतरिम आदेश की मांग की.
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस इन उपद्रवियों की मदद करके 'मॉब लिंचिंग' जैसी हरकतों को बढ़ावा दे रही है, जिसके वीडियो सबूत भी वो पेश करेंगे. उन्होंने कहा कि कोलकाता एयरपोर्ट एक मुख्य अड्डा बन गया है, जहां से बाहर निकलते ही TMC नेताओं को घेरकर उन पर अंडे फेंके जाते हैं और गाली-गलौज की जाती है.
'अंतरिम आदेश पारित करना संभव नहीं'
याचिका पर जवाब देते हुए तापब्रत ने कहा, 'हम राज्य सरकार को निर्देश जारी करेंगे, लेकिन इस चरण में अंतरिम आदेश पारित करना संभव नहीं है.'
बेंच ने ये भी कहा कि सिर्फ कानून लागू करना ही काफी नहीं होगा और जन जागरूकता की जरूरत पर जोर दिया. जस्टिस तापब्रत चक्रवर्ती ने कहा, 'ये सिर्फ कार्रवाई करने के बारे में नहीं है, जनता के बीच जागरूकता पैदा करने की भी जरूरत है.'
मामले में पर सुनवाई के दौरान जस्टिस पार्थ सारथी चटर्जी ने भी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि सभी के लिए मानवाधिकार सुनिश्चित किए जाने चाहिए. इस मामले में कोई ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए.
20 जुलाई को होगी सुनवाई
वहीं, एक अन्य पक्ष की ओर से पेश हुए राजदीप मजूमदार ने कहा कि जब तक औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज नहीं कराई जाती, तब तक पुलिस कार्रवाई नहीं कर सकती. हालांकि, उन्होंने ये भी तर्क दिया कि सुरक्षा इंतजामों के बावजूद उग्र भीड़ ऐसे हमले कर रही है. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इन घटनाओं के सिलसिले में उठाए गए कदमों का ब्यौरा देते हुए एक हलफनामा और रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी.