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'घर बना ओवन, बोतलों के कॉर्क बाहर निकल आए'... यूरोप में रिकॉर्ड गर्मी से बेहाल लोगों की आपबीती

यूरोप इस समय रिकॉर्डतोड़ हीटवेव की चपेट में है. फ्रांस, ब्रिटेन, स्पेन और कई दूसरे देशों में तापमान नए रिकॉर्ड बना रहा है. हालात ऐसे हैं कि लोगों के घरों में साबुन पिघल रहे हैं, शराब की बोतलों के कॉर्क बाहर निकल रहे हैं और कई मकान दिन में 'ओवन' जैसे महसूस होने लगे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी बड़ी वजह सिर्फ गर्मी नहीं, बल्कि यूरोप के पुराने घरों की बनावट भी है.

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यूरोप में गर्मी का सितम जुलाई में भी थमने का नाम नहीं ले रहा है (Photo:AP)
यूरोप में गर्मी का सितम जुलाई में भी थमने का नाम नहीं ले रहा है (Photo:AP)

यूरोप में पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. फ्रांस की राजधानी पेरिस से लेकर ब्रिटेन के लंदन तक लोग ऐसे घरों में रहने को मजबूर हैं, जो कभी सर्दियों से बचाने के लिए बनाए गए थे, लेकिन अब वही घर गर्मियों में आग का गोला बन गए हैं.

हालांकि, मौसम विभागों के अनुसार पश्चिमी यूरोप के कुछ हिस्सों में तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही है, लेकिन इटली, बाल्कन और दक्षिण-पूर्वी यूरोप में भीषण हीटवेव अभी भी जारी है. विशेषज्ञों का कहना है कि राहत फिलहाल सीमित है और जुलाई में एक और गर्मी का दौर लौट सकता है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पेरिस में रहने वाले 21 वर्षीय यूलिस ज़ाकरी का सिर्फ 9 वर्ग मीटर का कमरा कुछ घंटों की धूप के बाद इतना गर्म हो जाता है कि वहां रहना मुश्किल हो जाता है. उन्होंने बताया कि उनके घर में साबुन तक पिघल गए हैं और शराब की बोतलों के अंदर बढ़े दबाव की वजह से कॉर्क बाहर निकलने लगे हैं.

गीले तौलिये ओढ़कर सोने को मजबूर लोग

यूलिस ज़ाकरी बताते हैं कि रात में सोने के लिए उन्हें गीले तौलिये का सहारा लेना पड़ता है. दिन में वे गीले कपड़े पहनकर पंखे के सामने बैठते हैं, लेकिन इससे भी ज्यादा राहत नहीं मिलती. उनका कहना है कि कई बार घर के अंदर से बाहर निकलना ज्यादा आसान लगता है, हालांकि बाहर भी तेज धूप और गर्म हवाएं परेशान करती हैं.

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इसमें दिखाया गया है कि लोग खिड़कियों पर एल्यूमिनियम फॉयल लगाकर गर्मी कम करने की कोशिश कर रहे हैं.

जून में टूटा तापमान का रिकॉर्ड

फ्रांस में जून के महीने में पहली बार तापमान 40.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो अपने आप में नया रिकॉर्ड है. वहीं ब्रिटेन में भी जून का अब तक का सबसे अधिक तापमान 36.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.यूरोप के कई देशों में इस भीषण गर्मी की वजह से दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है. स्कूल बंद करने पड़े हैं, बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई है और कई पर्यटन स्थलों पर भी लोगों की आवाजाही सीमित करनी पड़ी.

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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यूरोप के घर गर्मी झेलने के लिए बने ही नहीं थे

विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप के ज्यादातर घर उस समय बनाए गए थे, जब सबसे बड़ी चिंता कड़ाके की ठंड से बचने की होती थी. इसलिए इन घरों में मोटी दीवारें, ज्यादा इंसुलेशन और ऐसी डिजाइन बनाई गई, जिससे सर्दियों में गर्मी अंदर बनी रहे.

लेकिन अब जलवायु परिवर्तन की वजह से गर्मियां पहले से कहीं ज्यादा गर्म हो गई हैं. ऐसे में यही डिजाइन लोगों के लिए परेशानी बन रही है क्योंकि घरों में गर्मी फंस जाती है और बाहर नहीं निकल पाती.

 

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यूरोप में एसी क्यों कम हैं?

अमेरिका और जापान के करीब 90 प्रतिशत घरों में एयर कंडीशनर मौजूद हैं, लेकिन यूरोप में यह आंकड़ा करीब 25 प्रतिशत है.विशेषज्ञों का कहना है कि एसी लगाने से राहत तो मिलती है, लेकिन इससे बिजली की खपत बढ़ती है और बाहर गर्म हवा निकलने से शहरों में तापमान और बढ़ सकता है. यही वजह है कि यूरोप में बड़े पैमाने पर एसी लगाने को लेकर बहस होती रही है.

'हर घर में एसी लगाना समाधान नहीं'

फ्रांस की मंत्री एलेओनोर कारोआ का कहना है कि अस्पतालों और कुछ सार्वजनिक जगहों पर एयर कंडीशनिंग जरूरी है, लेकिन अगर हर व्यक्ति अपने घर में एसी लगा ले, तो इससे ऊर्जा की खपत बढ़ेगी और जलवायु संकट और गंभीर हो सकता है.

गर्मी रोकने के लिए क्या हैं उपाय?

विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ एसी ही समाधान नहीं है. घरों को ठंडा रखने के लिए कई दूसरे तरीके ज्यादा असरदार हो सकते हैं.इनमें खिड़कियों पर बाहर की तरफ शटर लगाना, धूप रोकने वाले पर्दे लगाना, घरों में बेहतर वेंटिलेशन, हल्के रंग की दीवारें, छतों पर रिफ्लेक्टिव सामग्री का इस्तेमाल, ज्यादा पेड़-पौधे लगाना और ऐसी इमारतें बनाना शामिल है जो गर्मी को अंदर आने से रोक सकें.

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स्पेन के आर्किटेक्ट्स का भी कहना है कि उनके यहां सदियों से हल्के रंग की दीवारें, मोटी दीवारें, छोटी खिड़कियां और प्राकृतिक हवा के आने-जाने वाली डिजाइन का इस्तेमाल होता रहा है. फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देश इससे सीख ले सकते हैं.

एल्यूमिनियम फॉयल से ढक दी खिड़कियां

भीषण गर्मी से बचने के लिए पेरिस के यूलिस ज़ाकरी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो देखने के बाद अपनी खिड़कियों पर एल्यूमिनियम फॉयल चिपका दी है, ताकि धूप सीधे कमरे में न आए.

हालांकि उनके पास पर्याप्त फॉयल नहीं थी, इसलिए उन्होंने सिर्फ एक हिस्से को ही ढका है. अब उन्हें उम्मीद है कि बाकी खिड़कियां भी ढकने के बाद कमरे का तापमान कुछ कम हो सकेगा.

जलवायु परिवर्तन का बढ़ता असर

वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से यूरोप में हीटवेव पहले की तुलना में ज्यादा बार और ज्यादा तीव्र हो रही हैं. ऐसे में सिर्फ लोगों की आदतें बदलने से काम नहीं चलेगा. आने वाले समय में शहरों, घरों और इमारतों की डिजाइन भी बदलनी होगी, ताकि वे बढ़ती गर्मी का सामना कर सकें.

यूरोप की मौजूदा हीटवेव ने साफ कर दिया है कि अब सिर्फ ठंड से बचने वाले घर काफी नहीं हैं. बदलते मौसम के साथ घरों को भी बदलना पड़ेगा, वरना आने वाले वर्षों में हालात और मुश्किल हो सकते हैं.

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