पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. राज्य में नई सरकार बनने के बाद सीमा सुरक्षा बल (BSF) को करीब 1,024.75 एकड़ जमीन सौंपे जाने के बाद कई संवेदनशील इलाकों में फेंसिंग का काम तेज हो गया है. मुर्शिदाबाद से लेकर मालदा और सुंदरबन तक भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्मार्ट फेंसिंग और आधुनिक निगरानी व्यवस्था विकसित करने की तैयारी है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही कह चुके हैं कि पश्चिम बंगाल में एक भी घुसपैठिए को प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा. इसी दिशा में अब BSF और केंद्र सरकार की ओर से सीमा सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है. आजतक ने भारत-बांग्लादेश सीमा के संवेदनशील इलाकों का ग्राउंड जायजा लिया और देखा कि किस तरह BSF सीमा पर फेंसिंग का काम आगे बढ़ा रही है.
मुर्शिदाबाद में 45 किलोमीटर की फेंसिंग
मुर्शिदाबाद के जलांगी इलाके को भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ के लिहाज से संवेदनशील माना जाता रहा है. यहां BSF की निगरानी में जेसीबी मशीनों और मजदूरों की मदद से फेंसिंग का काम चल रहा है. इस इलाके में करीब 45.4 किलोमीटर सीमा पर फेंसिंग के लिए 337 एकड़ जमीन BSF को दी गई है.
यहां तैयार की जा रही फेंसिंग सिंगल लेयर और करीब 12 फीट ऊंची बताई जा रही है. BSF और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के कर्मचारी मिलकर इसका निर्माण कर रहे हैं. CPWD के इंजीनियर फेंसिंग के एक-एक हिस्से को मजबूत तरीके से तैयार करने में जुटे हैं.
प्रस्तावित स्मार्ट फेंसिंग को आधुनिक निगरानी प्रणालियों से जोड़ने की योजना है. इसमें हाई रिजॉल्यूशन कैमरे, थर्मल इमेजर, नाइट विजन डिवाइस, ड्रोन निगरानी और सेंसर आधारित अलर्ट सिस्टम जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसका उद्देश्य सीमा पर होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंचाना है.
स्थानीय लोगों का भी कहना है कि फेंसिंग बनने के बाद सीमा पार से होने वाली अवैध आवाजाही पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.
BSF को 9 जिलों में 1,024.75 एकड़ जमीन
पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग के लिए नौ जिलों में कुल 1,024.75 एकड़ जमीन BSF को सौंप दी है. इसमें सबसे ज्यादा जमीन मुर्शिदाबाद जिले में दी गई है.
आंकड़ों के मुताबिक, मुर्शिदाबाद में 45.4 किलोमीटर फेंसिंग के लिए 337 एकड़ जमीन, उत्तर 24 परगना में 42.07 किलोमीटर के लिए 241.03 एकड़, कूचबिहार में 39.39 किलोमीटर के लिए 135.33 एकड़ और मालदा में 20.15 किलोमीटर के लिए 176.78 एकड़ जमीन दी गई है.
इसके अलावा नदिया में 14.79 किलोमीटर के लिए 95.11 एकड़, दक्षिण दिनाजपुर में 7.75 किलोमीटर के लिए 26.41 एकड़, दार्जिलिंग में 1.45 किलोमीटर के लिए 4.31 एकड़, उत्तर दिनाजपुर में 1.28 किलोमीटर के लिए 6.61 एकड़ और जलपाईगुड़ी में 0.31 किलोमीटर के लिए 2.17 एकड़ जमीन शामिल है. कुल मिलाकर 172.6 किलोमीटर सीमा क्षेत्र में फेंसिंग के लिए जमीन का हस्तांतरण किया गया है.
सुंदरबन में 90 किलोमीटर की स्मार्ट फेंसिंग
भारत-बांग्लादेश सीमा सुरक्षा के लिहाज से सुंदरबन सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में से एक है. यहां घने मैंग्रोव जंगल, छोटी-बड़ी क्रीक, नदियां, दलदली जमीन और ज्वार-भाटा के कारण जमीन के रास्ते निगरानी करना बेहद मुश्किल है. कई जगह सीमा नदी के बीच से गुजरती है और ज्वार के दौरान पूरा इलाका पानी से घिर जाता है.
इसी वजह से इस क्षेत्र में घुसपैठ और तस्करी को रोकना BSF के लिए बड़ी चुनौती रहा है. अब यहां करीब 90 किलोमीटर लंबे संवेदनशील सीमा क्षेत्र में स्मार्ट फेंसिंग तैयार करने की योजना है. यह फेंसिंग शमशेरनगर से आगे के इलाकों तक विकसित किए जाने की तैयारी है.
इस परियोजना का मकसद सिर्फ सीमा पर तारबंदी करना नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीक के जरिए एक मजबूत स्मार्ट बॉर्डर सिक्योरिटी नेटवर्क तैयार करना है. इसके तहत CCTV कैमरे, थर्मल इमेजर, नाइट विजन, ड्रोन और सेंसर आधारित अलर्ट सिस्टम को निगरानी व्यवस्था से जोड़ा जा सकता है.
पानी में तैरती BSF की फ्लोटिंग BOP
सुंदरबन के क्रीक और मैंग्रोव इलाकों में BSF स्पीड बोट के जरिए लगातार निगरानी करती है. यहां संदिग्ध नावों पर भी नजर रखी जाती है. आजतक की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान BSF के जवानों ने एक संदिग्ध नाव को भी रोका. जांच के बाद पता चला कि नाव किसी सामान को पहुंचाने के लिए जा रही थी, लेकिन सीमा क्षेत्र में सुरक्षा के लिहाज से BSF की सतर्कता ने किसी भी संभावित खतरे को टालने में मदद की.
सुंदरबन में BSF की आठ फ्लोटिंग BOP यानी बॉर्डर आउट पोस्ट भी तैनात हैं. ये पानी में तैरती और जरूरत के मुताबिक स्थान बदलने वाली सुरक्षा चौकियां हैं. इनसे BSF को मैंग्रोव के बीच मौजूद क्रीक और जलमार्गों की निगरानी में मदद मिलती है.
फ्लोटिंग BOP से जवान पानी के रास्ते होने वाली संदिग्ध गतिविधियों, घुसपैठ और ड्रग्स तस्करी पर नजर रखते हैं. स्पीड बोट के जरिए भी संवेदनशील इलाकों में गश्त की जाती है.
घुसपैठ और तस्करी रोकने की बड़ी कवायद
केंद्र सरकार और BSF की रणनीति अब सीमा पर केवल फेंसिंग लगाने तक सीमित नहीं है. तकनीक और निगरानी तंत्र को जोड़कर सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है. ड्रोन, कैमरे, सेंसर और रियल टाइम मॉनिटरिंग के जरिए संदिग्ध गतिविधियों का तुरंत पता लगाने और क्विक रिएक्शन टीम को सक्रिय करने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है.
पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग को लेकर लंबे समय से जमीन की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती रही है. अब राज्य सरकार की ओर से जमीन हस्तांतरण के बाद BSF ने निर्माण कार्य तेज कर दिया है. मुर्शिदाबाद और मालदा से लेकर सुंदरबन तक चल रही यह कवायद सीमा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
अब देखना होगा कि स्मार्ट फेंसिंग और आधुनिक निगरानी व्यवस्था पूरी तरह तैयार होने के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ और तस्करी को रोकने में कितनी प्रभावी साबित होती है.