ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के मूल गुट ने सोमवार को चुनाव आयोग के सामने अपना जवाब सौंप दिया है. टीएमसी ने पार्टी पर अधिकार जताने वाले बागी गुट के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. पार्टी ने कहा कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की संगठनात्मक समितियां पार्टी के संविधान के तहत साल 2027 तक पूरी तरह वैध हैं.
चुनाव आयोग को जवाब सौंपने के बाद टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने मीडिया से बातचीत की. उन्होंने बताया कि पार्टी ने बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के प्रतिवेदन के खिलाफ आयोग को एक विस्तृत जवाब सौंपा है.
बागी गुट का मुख्य तर्क है कि AITC और नेशनल वर्किंग कमेटी का कार्यकाल साल 2025 में ही खत्म हो चुका है. कल्याण बनर्जी ने बागी गुट के इस दावे को खारिज किया है.
कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी के संविधान में समय-समय पर संशोधन किए गए हैं. साल 2000 में इस कार्यकाल को तीन साल से बढ़ाकर चार साल किया गया था. इसके बाद साल 2006 में इसे बढ़ाकर पांच साल कर दिया गया था. इन सभी बदलावों की जानकारी चुनाव आयोग को दी गई थी.
उन्होंने कहा, 'पार्टी के आखिरी संगठनात्मक चुनाव साल 2022 में हुए थे. इसलिए, नियम के मुताबिक AITC और नेशनल वर्किंग कमेटी का कार्यकाल पांच साल के लिए है. ये कार्यकाल साल 2027 में खत्म होगा.' उन्होंने आगे बताया कि समिति का कार्यकाल 2025 में खत्म होने का आरोप पूरी तरह गलत है और पार्टी के संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है.
'अगर पार्टी अस्तित्व में नहीं थी, तो सिंबल पर चुनाव क्यों लड़ा?'
सांसद कल्याण बनर्जी ने बागी नेताओं पर सवाल उठाते हुए बड़ा तर्क दिया. उन्होंने कहा कि इन बागी नेताओं ने खुद 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी के सिंबल पर चुनाव लड़ा था. उस समय उन्होंने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के हस्ताक्षरित उम्मीदवारी के कागजात का इस्तेमाल किया था, जिससे उन्होंने मौजूदा नेतृत्व के अधिकार को खुद स्वीकार किया था.
उन्होंने कहा, 'अगर उनका कहना है कि 2025 के बाद पार्टी का अस्तित्व ही खत्म हो गया था, तो उन्होंने किस आधार पर चुनाव लड़ा? उनका खुद का ये तर्क उनके चुनाव को अवैध बना देगा. उन्हें तुरंत अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए.'
बागी गुट के 'विशेष सत्र' को बताया बड़ा धोखा
टीएमसी नेता ने आरोप लगाया कि बागी गुट ने बीती 22 जून को एक 'विशेष सत्र' बुलाकर पार्टी संगठन को फिर से गठित करने का दावा किया था, जो पूरी तरह AITC के संविधान का उल्लंघन है. उनके मुताबिक, पार्टी के संविधान में ब्लॉक स्तर से शुरू होकर जिला और राज्य समितियों के बाद ही AITC समिति के गठन की प्रक्रिया तय है. बागी गुट ने इन सभी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर दिया और सांसदों या विधायकों को कोई नोटिस भी जारी नहीं किया.
यह भी पढ़ें: 'हम ही असली तृणमूल कांग्रेस’, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बागी गुट ने EC में पेश किया दावा
कल्याण बनर्जी ने कहा, 'इसकी न तो मीडिया में कोई जानकारी दी गई और न ही पदेन सदस्यों को कोई नोटिस मिला. उनकी गठित की गई AITC खुद AITC के संविधान के साथ एक बहुत बड़ा धोखा है.' उन्होंने इसे पूरी तरह एक 'फर्जी तरीका' बताया और आरोप लगाया कि ये गुट राज्य प्रशासन की मदद से अवैध रूप से पार्टी कार्यालयों पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट, दोनों से पार्टी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और संगठनात्मक चुनावों को लेकर अपने-अपने दावे और जवाब पेश करने को कहा था. बागी गुट ने चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात कर खुद को 'असली' तृणमूल कांग्रेस बताया था जिसके बाद विवाद बढ़ गया था.