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ममता बनर्जी को नंदीग्राम उपचुनाव में वॉकओवर दे सकता है बागी गुट

पश्चिम बंगाल में उपचुनावों के बीच टीएमसी में वर्चस्व की जंग तेज हो गई है, जहां बागी ऋतब्रत खेमे ने ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट से निर्विरोध चुनाव लड़ने का खुला ऑफर दिया है. वहीं, पार्टी के नाम और 'घास पर दो फूल' चुनाव चिह्न पर अपने दावे को लेकर दोनों विरोधी धड़े 12 सितंबर को चुनाव आयोग के सामने अपना पक्ष रखेंगे.

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ममता बनर्जी को बागी गुट ने दिया नया ऑफर (Photo-ITG)
ममता बनर्जी को बागी गुट ने दिया नया ऑफर (Photo-ITG)

पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर सियासत गरमा गई है. टीएमसी के बागी गुट ने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ने का खुला ऑफर दिया है. ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले तृणमूल खेमे के नेता मदन मित्रा ने कहा कि अगर ममता नंदीग्राम से मैदान में उतरती हैं तो उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारा जाएगा.

नंदीग्राम विधानसभा सीट से ममता बनर्जी 2021 में विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं, लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली थी और वे बीजेपी के उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी से मात खा गई थीं. इसके बाद 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को उनके गढ़ भवानीपुर में भी हरा दिया.

शुभेंदु अधिकारी इस बार नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों ही विधानसभा सीटों से चुनाव जीतने में सफल रहे, जिसके बाद उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ दी. अब नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं. बंगाल की सत्ता परिवर्तन के बाद ये उपचुनाव हो रहे हैं, जिसके चलते ममता बनर्जी को टीएमसी के बागी गुट ने खुला ऑफर दिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ममता बनर्जी नंदीग्राम सीट से चुनावी मैदान में उतरेंगी?

ममता बनर्जी को ऋतब्रत खेमे का ऑफर

पश्चिम बंगाल की सत्ता से बाहर होते ही तृणमूल कांग्रेस तीन धड़ों में बंट गई है. ऋतब्रत खेमे ने टीएमसी विधायकों को अपने साथ मिलाकर पार्टी पर कब्जा जमा रखा है, जिसे लेकर ममता का मामला अदालत में चल रहा है. ऋतब्रत गुट के नेता मदन मित्रा ने कहा है कि अगर ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम से चुनाव लड़ती हैं, तो वे उम्मीदवार नहीं उतारेंगे. इसके साथ ही नंदीग्राम के एक अन्य नेता अबू ताहेर ने भी यही बात कही है.

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मदन मित्रा ने कहा कि इस फैसले का मकसद बीजेपी विरोधी वोटों के बंटवारे को रोकना और ममता बनर्जी को नंदीग्राम में आसानी से जीत दिलाना है. मित्रा ने कहा कि इससे यह साबित होगा कि हम बीजेपी को विपक्ष के वोट बांटने का मौका नहीं देना चाहते. उन्होंने यह बात उस आरोप के संदर्भ में कही जिसमें बागी गुट को बीजेपी की 'बी-टीम' बताया जा रहा है.

टीएमसी के बागी गुट का यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब टीएमसी के दो प्रतिद्वंद्वी गुट नंदीग्राम और रेजीनगर में होने वाले उपचुनाव के लिए पूरी तैयारी कर रहे हैं, जबकि निर्वाचन आयोग ने अब तक यह तय नहीं किया है कि पार्टी के मान्यता प्राप्त नाम और चुनाव चिह्न पर किस गुट का हक है.

टीएमसी के चुनाव चिह्न का समाधान कब होगा?

तृणमूल का असली चेहरा कौन है, पार्टी के नाम और 'घास पर दो फूल' वाले चुनाव चिह्न का मामला निर्वाचन आयोग के पास लंबित है. पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम निर्णय 12 सितंबर को हो सकता है. चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को उस दिन तलब किया है. यह बैठक दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग के मुख्यालय में होगी.

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ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी खेमे से पांच-पांच प्रतिनिधियों को बुलाया गया है. चुनाव आयोग ने इस संबंध में दोनों पक्षों को पत्र भी भेजा है. ऋतब्रत खेमे को सुबह 11 बजे और ममता समर्थकों को दोपहर 12 बजे का समय दिया गया है. ममता बनर्जी के कभी करीबी रहे मदन, फिरहाद, अरूप और चंद्रीमा ने एक-एक करके ऋतब्रत से हाथ मिला लिया है.

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नतीजतन, ऋतब्रत बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता बन गए हैं. उनका दावा है कि वे ही असली तृणमूल हैं और इसलिए उन्हें ही चुनाव चिह्न मिलना चाहिए, वहीं, ममता खेमा पार्टी का नियंत्रण या चुनाव चिह्न छोड़ने को तैयार नहीं है। उनके अनुसार, ममता ने पार्टी बनाई थी और टीएमसी के उम्मीदवारों ने उनके नाम पर चुनाव लड़ा और जीता है, इसलिए उन्हें चुनाव चिह्न से वंचित करना गैरकानूनी है. अब इस पर फैसला होना बाकी है.

बंगाल की दो सीटों पर उपचुनाव में क्या होगा?

टीएमसी के चुनाव चिह्न को लेकर चल रही खींचतान के बीच बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर सीट पर उपचुनावों की तारीख घोषित कर दी गई है. पूर्वी मेदिनीपुर के नंदीग्राम और मुर्शिदाबाद के रेजीनगर में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं, जिसके लिए नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है. लेकिन दोनों खेमों का एक ही पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से चुनाव लड़ना संभव नहीं है.

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अगर समय रहते चुनाव चिह्न विवाद का समाधान नहीं होता है, तो कोई भी दल उम्मीदवारों के नामांकन और चुनाव प्रचार को आगे नहीं बढ़ा सकता. इससे एक जटिल स्थिति पैदा हो गई है.

 ऋतब्रत खेमे का फैसला है कि रेजीनगर और नंदीग्राम दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारे जाएंगे. वे तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर नामांकन दाखिल करेंगे. उनकी गुजारिश है कि आयोग नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख यानी 16 सितंबर से पहले फैसला ले ले. ऐसे में यदि चुनाव चिह्न विवाद पर कोई फैसला नहीं होता है, तो उम्मीदवारों को निर्दलीय के रूप में अपनी किस्मत आजमानी होगी.

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