मशहूर फिल्ममेकर प्रियदर्शन अपनी ही फिल्मों के रीमेक बनाने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने मलयालम सिनेमा से अपनी कई सुपरहिट फिल्मों को वापस हिंदी में बनाकर रिलीज किया. हैरानी की बात ये है कि उन सभी फिल्मों का ट्रैक रिकॉर्ड बॉक्स ऑफिस पर अच्छा ही रहा. कॉमेडी हो या सस्पेंस-थ्रिलर, प्रियदर्शन हर जॉनर की फिल्में बनाकर छा चुके हैं. अब वो अपनी एक और मलयालम फिल्म का रीमेक हिंदी में लेकर आ गए हैं, जिसका नाम हैवान है. इसमें अक्षय कुमार और सैफ अली खान जैसे बड़े बॉलीवुड सितारे शामिल हैं.
फिल्म हैवान, साल 2016 में आई प्रियदर्शन की सुपरहिट मलयालम फिल्म ओप्पम का रीमेक है. उस फिल्म में मलयालम सिनेमा से सुपरस्टार मोहनलाल थे. ये एक सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म थी, जिसे तब ऑडियंस ने खूब सराहा था. अब जब प्रियदर्शन इसे हिंदी में हैवान के नाम से लेकर आए हैं, तो उन्होंने ओरिजिनल के मुकाबले इस फिल्म में कई सारे बदलाव किए हैं. फिल्म के हीरो सैफ अली खान हैं, जो पहली बार प्रियदर्शन संग काम कर रहे हैं. वहीं उनके सामने अक्षय कुमार विलेन बनकर खड़े हैं. ऐसे में दोनों के बीच हुआ ये हैवानियत से भरा खेल देखने में कैसा है? आइए, विस्तार से बात करते हैं...
क्या है हैवान की कहानी?
श्याम राणे (सैफ अली खान) एक नेत्रहीन शख्स है, जो मुंबई की एक स्काइ-हाई सोसाइटी में काम करता है. वहां एक रिटायर्ड जज प्रधान (बोमन ईरानी) रहते हैं, जिनके घर उसका आना-जाना काफी लगा रहता है. उनके घर में नैना नाम की नौकरानी (श्रिया पिलगांवकर) है, जो प्रधान का ध्यान रखती है. जज प्रधान एक आरोपी परशुराम गोखले (अक्षय कुमार) को ढूंढ रहे होते हैं. लेकिन परशुराम खुद जज के पास जाना चाहता है. वो एक आम इंसान नहीं बल्कि हैवान है, क्योंकि उसने उस गुनाह की सजा भुगती है जिसमें उसका कोई दोष नहीं था. परशुराम ने अपनी नफरत की आग में उन सभी को जलकर खत्म किया, जिसने किसी वक्त उसपर उंगली उठाई थी.
इसकी चपेट में जज प्रधान भी आ जाते हैं. उनकी मौत का शक श्याम पर चला जाता है. श्याम, जो उनका सबसे खास है उसके ऊपर जज की बेटी नंदनी (पहल चौधरी) की भी जिम्मेदारी है. परशुराम अब श्याम के पीछे किसी परछाई की तरह पड़ा है, क्योंकि उस जज की बेटी का पता मालूम है, जिसको वो मारकर अपना बदला पूरा करना चाहता है. अब श्याम के पास कई सारे चैलेंज हैं- उसे सबसे पहले जज की बेटी को बचाना है, फिर पुलिस के सामने अपनी बेगुनाही साबित करनी है और फिर अंत में परशुराम को ढूंढकर उसे मारना भी है. ऐसे में क्या एक श्याम, उस शातिर और साइको परशुराम को हरा पाएगा? यही इस फिल्म का बेसिक प्लॉट है.
दिमाग के साथ खेलती है फिल्म की कहानी, जबरदस्त है सस्पेंस
जिन लोगों ने मलयालम फिल्म ओप्पम देखी है, उनके लिए ये शायद एक अलग एक्सपीरियंस ना हो. मगर मेरे जैसे, जो पहली बार इस कहानी को देख रहे हैं उनके लिए ये फिल्म हैवान काफी फ्रेश और मजेदार साबित हुई है. मैंने इसका ओरिजिनल वर्जन नहीं देखा है, और सच कहूं तो अच्छा ही किया. फिल्म की सबसे दमदार चीज इसकी स्टोरी ही है, जो आपको अंत तक सीट से बांधकर रखती है. कहानी में एक ऐसा इंसान है जो देख नहीं सकता, उसके क्या चैलेंज होते हैं और वो किस तरह से एक शातिर-खौफनाक इंसान का सामना करता है, इसे पर्दे पर अच्छे से पेश किया गया है.
दोनों हीरो और विलेन के बीच एक चूहे-बिल्ली वाला खेल चलता रहता है, जो आपके अंदर एक बेचैनी सी पैदा करते है कि आगे क्या होगा. इसमें सस्पेंस और थ्रिल का शानदार इस्तेमाल हुआ है. फिल्म की कहानी सेटअप होने में अपना पूरा समय लेती है. ये एक-एक करके अपने किरदारों और उसके आसपास बुनी कहानियों को आपके सामने रखती है. इसमें थोड़ा बहुत प्रियदर्शन स्टाइल कॉमेडी पंच भी डाला गया है, जो सचमुच एक सीरियस फिल्म में अच्छा महसूस कराता है.
प्रियदर्शन के साथ रोहन शंकर ने इसका स्क्रीनप्ले लिखा है. फिल्म की कहानी आपके दिमाग के साथ खेलती रहती है, एक तरीके से आपको चैलेंज करती है. हैवान की लंबाई 2 घंटे 42 मिनट है. सच कहें तो ये रन टाइम फर्स्ट हाल्फ तक फील नहीं होता है. मगर सेकेंड हाल्फ में ये हल्की कमजोर पड़ जाती है. अक्षय कुमार और सैफ अली खान के बीच पकड़म-पकड़ाई का खेल अच्छा है. लेकिन वो थोड़ा और बेहतर किया जा सकता था. साथ ही इसके गाने, पिक्चर में कुल तीन गाने हैं जिसमें से एक गाना अच्छा है. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर काफी बढ़िया है, वो आपके अंदर बेचैनी बढ़ाने का काम जरूर करता है जिसकी जरूरत भी थी.
यहां देखें फिल्म का ट्रेलर:
अक्षय-सैफ ने जीता दिल
अक्षय कुमार और सैफ अली खान 18 साल बाद वापस इस फिल्म से बड़े पर्दे पर लौटे हैं. हैवान में दोनों का रोल एक-दूसरे से एकदम अलग है, और दोनों ही एक्टर्स ने अपना अच्छा दिया भी है. परफॉरमेंस की बात करें, तो साइको किलर के रोल में अक्षय का काम जबरदस्त है. वो आपको स्क्रीन पर डराने में थोड़े सफल भी हो जाते हैं. एक सीरियस रोल में उन्हें लंबे समय बाद देखकर खुशी हुई. अक्षय ने साबित किया कि अगर उन्हें एक अच्छा लिखा हुआ रोल मिले, तो वो उसे बड़े अच्छे तरीके से प्ले कर सकते हैं.
सैफ अली खान भी एक नेत्रहीन किरदार को पहली बार निभा रहे थे, जिसमें वो थोड़े सफल हुए. उन्होंने अपने करियर का शायद सबसे मुश्किल रोल इस फिल्म में किया है, और उन्हें सफलता भी मिली है. सैफ ने हर सीन में जान डाली और अपनी छाप भी छोड़ गए. बोमन ईरानी, सैयामी खेर और श्रिया पिलगांवकर, जिनका इसमें लिमिटेड रोल था लेकिन उन्होंने भी उसे बढ़िया ढंग से निभाया. बाकी दिवंगत एक्टर असरानी और प्रियदर्शन की लगभग हर फिल्म में दिखने वाले राजपाल यादव भी फिल्म हैवान का हिस्सा हैं. दोनों का छोटा मगर असरदार रोल है, जो एक याद बनकर रह जाएगा. असरानी जी ने अपनी आखिरी फिल्म में भी एक्टिंग से समा बांधा.
कुल मिलाकर अगर आप सस्पेंस-थ्रिलर और डार्क फिल्में देखने का शौक रखते हैं, तो फिल्म हैवान आपके लिए बनी है. अक्षय कुमार के फैन हैं, तब भी इसे आराम से देख सकते हैं. आपके फेवरेट सुपरस्टार इसमें बिल्कुल निराश नहीं करते हैं.