पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलते ही ममता बनर्जी की टीएमसी में बिखराव, बगावत और टकराव शुरू हो गए. टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से 60 के बागी होने के बाद सांसदों ने भी बगावत का झंडा उठा लिया है. तीन राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दे दिया है और 19 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को लेटर लिखकर अलग गुट बनाने की मांग की है.
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भेजी गई चिट्ठी में जिन 19 लोकसभा सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं, उसमें काकोली घोष से लेकर यूसुफ पठान, सायोनी घोष और शताब्दी रॉय जैसे नाम शामिल हैं. हालांकि, कहा जा रहा कि टीएमसी के 20 सांसदों ने बगावत की है, लेकिन एक नाम अभी सामने नहीं आया है. इस तरह टीएमसी के 28 में से 20 सांसद ममता बनर्जी से अलग होने की दिशा में अपने कदम बढ़ा दिए हैं.
बंगाल की सियासत में ममता बनर्जी के सामने सियासी संकट गहरा गया है, जब उनके तमाम मजबूत सिपहसलार एक-एक कर साथ छोड़ते जा रहे हैं. इस फेहरिश्त में वो भी नेता शामिल हैं, जिन्हें ममता बनर्जी ने सियासी बुलंदी दी, लेकिन टीएमसी में मचे भगदड़ के बीच ममता बनर्जी के पीछे चट्टान की तरह दो बिहारी खड़े हैं. ये बिहारी नेता क्रीति आजाद और शत्रुघ्न सिन्हा हैं.
ममता का साथ छोड़ गए बंगाली MP-MLA
पश्चिम बंगाल की सत्ता से डेढ़ दशक के बाद बाहर होते ही ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ताश के पत्तों की तरह बिखरती जा रही है. हर रोज टीएमसी से किसी न किसी नेता के बागी होने या फिर पार्टी छोड़ने की खबर आ रही. टीएमसी के टिकट पर जीतकर आए 80 में से 60 विधायक बागी होकर अपना नेता ऋतब्रत बनर्जी को मान लिया है. ऋतब्रत बनर्जी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी बन गए हैं. विधायकों के बाद सांसदों में भी टूट पड़ गई.
टीएमसी के 19 सांसदों ने ममता बनर्जी से अलग होने का फैसला कर लिया है. इस संबंध में 18 मई को लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर सदन में अलग बैठने और एनडीए को समर्थन करने का फैसला किया है. टीएमसी के जिन 19 सांसदों ने स्पीकर से गुहार लगाई है, उसमें काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हलदर, डॉ शर्मिला सरकार, प्रसून बंद्योपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार मल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, सयोनी घोष, खलीलुर्रहमान, अबू ताहिर खान, यूसुफ़ पठान, मिताली बैग, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मालिया और
पार्थ भौमिक शामिल हैं.
लोकसभा सांसद ही नहीं बल्कि राज्यसभा सांसद भी ममता का साथ छोड़ने लगे हैं. इस फेहरिश्त में सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक जैसे नाम शामिल हैं, जिन्होंने राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा देने के साथ-साथ टीएमसी भी छोड़ दी है. ममता के राइटहैंड माने जाने वाले कल्याण बनर्जी भी बगावती तेवर अपना लिया है और उन्होंने अपने संकेत भी दे दिए हैं. ये ममता बनर्जी के लिए बड़ा सियासी झटका माना जा राह है.
ममता बनर्जी के साथ खडे दो बिहारी नेता
टीएमसी के सियासी बिखराव के बीच ममता बनर्जी के साथ दो बिहारी नेता पूरी मजबूती से खड़े हैं, जिसमें एक नाम शत्रुघ्न सिन्हा का दूसरा नाम कीर्ति आजाद का है. बंगाल के ममता के सारे बंगाली सिपहसालार छोड़ रहे हैं, तो शत्रुघ्न और कीर्ति आजाद सियासी ढालकर बनकर सामने आए हैं.
हालांकि, ये दोनों ही नेता बीजेपी के कद्दावर चेहरा और सांसद रहे हैं. बीजेपी छोड़कर कांग्रेस गए और फिर ममता बनर्जी के साथ जुड़ गए. कीर्ति आजाद 2021 में टीएमसी में शामिल हुए थे तो शत्रुघ्न सिन्हा 2022 में ममता बनर्जी का दामन थामा. कीर्ति आजाद बर्दवान-दुर्गापुर सीट से सांसद हैं तो शत्रुघ्न सिन्हा आसनसोल से सांसद हैं.
ममता बनर्जी ने इन दोनों बाहरी और गैर-बंगाली नेताओं को सियासी अहमियत ही नहीं बल्कि चुनावी मैदान में उतारा. ममता की बंगाली अस्मिता के राजनीतिक दौर में दोनों बाहरी नेताओं को सांसद भेजा. इसके अलावा कीर्ति आजाद को टीएमसी का राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी सौंपी. यही वजह है कि दोनों ही नेता ममता बनर्जी के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं.
कीर्ति आजाद और शत्रुघ्न क्यों नहीं हुए बागी
टीएमसी के 19 लोकसभा और तीन राज्यसभा सांसदों ने ममता बनर्जी के सत्ता से बाहर होते ही सियासी पाला बदला है, उसमें शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ममता बनर्जी के साथ किसी भी परिस्थिति में विश्वासघात नहीं करेंगे. शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि मेरे बारे में बहुत अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन मैं साफ़ कर देना चाहता हूं कि मुश्किल समय में ममता जी मेरे साथ खड़ी थीं, और आज, उनके मुश्किल दौर में, मैं उन्हें अकेला नहीं छोड़ सकता.
टीएमसी में बगावत के बीच कीर्ति आजाद पूरी तरह ममता बनर्जी के साथ खड़े ही नहीं बल्कि बागियों के खिलाफ मोर्चा भी खोल रखा है. कीर्ति ने प्रेस कॉफ्रेंस करके बागियों पर निशाना साधा था और कहा कि उनके अंदर ताकत है तो सांसद पद से इस्तीफा देकर जहां जाना है, वहां जाएं. यही नहीं कीर्ति आजाद टीएमसी के बागी सांसदों को साधने की कवायद करते नजर आए, जिसके लिए सयानी घोष को भी फोन लगा रहे थे.
बिहार के इन दोनों नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे ममता बनर्जी के नेतृत्व के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं. वे किसी भी सूरत में बगावत का हिस्सा नहीं बनेंगे. यह कदम दिखाता है कि इन दोनों बिहारी नेता ममता बनर्जी के प्रति अपनी वफादारी नहीं छोड़ रहे हैं और वे मजबूत चट्टान की तरह खड़े हैं.