पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बगावत लगातार बढ़ती जा रही है. पहले विधायकों और सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोला और अब कोलकाता नगर निगम के 70 पार्षदों की ऋतब्रत बनर्जी के साथ बैठक ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है. ममता बनर्जी के करीबी और कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम भी इस बैठक में मौजूद थे. माना जा रहा है कि ये पार्षद भी बगावती रुख अपना सकते हैं.
ये पार्षद तीन अलग-अलग जिलों से हैं, जिनमें कम से कम 50 पार्षद कोलकाता नगर निगम (KMC) के बताए जा रहे हैं. खास बात यह है कि कुछ दिन पहले फिरहाद हकीम ने राज्य विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के साथ बंद कमरे में बैठक की थी. फिरहाद हकीम को ममता बनर्जी का भरोसेमंद सहयोगी माने जाते रहे हैं. अगर वह बागी होते हैं तो ये ममता के लिए बड़ा झटका होगा.
TMC के प्रमुख मुस्लिम चेहरा हैं फिरहाद हकीम
वह तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख अल्पसंख्यक चेहरों में से एक रहे हैं. हकीम 2018 में कोलकाता के मेयर बने थे और कुछ हफ्ते पहले ही उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद से उन्हें कई मौकों पर ऋतब्रत बनर्जी के साथ देखा जा चुका है. पिछले दिनों मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जब कोलकाता नगर निगम दफ्तर का दौरा किया था, तब भी हकीम को उनके साथ मंच पर देखा गया था.
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फिरहाद हकीम पूर्ववर्ती ममता सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. वह कोलकाता पोर्ट सीट से टीएमसी के विधायक हैं. दिसंबर 2018 में सोभनदेब चट्टोपाध्याय के पद छोड़ने के बाद ममता बनर्जी ने उन्हें कोलकाता का मेयर बनाया गया था. वह 150 साल पुरानी कोलकाता नगर निगम के पहले मुस्लिम मेयर बने थे.
तृणमूल कांग्रेस में पहले ही हो चुकी है बड़ी टूट
इससे पहले पार्टी के 80 में से 64 विधायक और 28 में से 20 सांसद भी बागी हो चुके हैं. टीएमसी के बागी विधायकों ने राज्य विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में अलग गुट के तौर पर खुद को मान्यता दिलाई है. उसके बाद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में टीएमसी के 28 में से 20 सांसदों ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बगावत की और नेशनल सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल होकर केंद्र की एनडीए सरकार को समर्थन देने का फैसला किया.
ऋतब्रत बनर्जी को बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता की मान्यता भी मिल गई है. स्पीकर के इस फैसले को ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन यहां भी उनको राहत नहीं मिली. हाई कोर्ट ने टीएमसी के बागी विधायकों द्वारा ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में पार्टी का नेता चुने जाने के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया. कलकत्ता हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद विधानसभा स्पीकर का निर्णय लागू रहेगा.