सोनम वांगचुक को जंतर मंतर पर चल रही भूख हड़ताल के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया है. इसके बाद उनके समर्थन में पहुंचे मोहम्मद दीपक ने आरोप लगाया कि उन्हें अस्पताल के अंदर जाकर वांगचुक से मिलने की अनुमति नहीं दी गई.
मोहम्मद दीपक, जिनका वास्तविक नाम दीपक कुमार है, उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले उनकी सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि से बातचीत हुई थी. उनके अनुसार, गीतांजलि ने कहा था कि उनका समर्थन वांगचुक के लिए महत्वपूर्ण होगा. इसी वजह से वह अस्पताल पहुंचे, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के कारण उन्हें प्रवेश नहीं मिला.
अस्पताल के नेताजी सुभाष गेट (गेट नंबर-2) पर पुलिस और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती रही. बैरिकेडिंग की गई थी और केवल जरूरी कारण बताने वाले लोगों को ही अंदर जाने दिया जा रहा था. वहीं, वांगचुक के निजी डॉक्टर डॉ. सतीश लांबा ने कहा कि प्रदर्शन स्थल से अस्पताल लाए जाने के बाद से उन्हें वांगचुक से मिलने का मौका नहीं मिला है.
सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किए गए वीडियो में मोहम्मद दीपक ने कहा कि वह सोमवार को संसद तक प्रस्तावित मार्च में भी शामिल होंगे. उनका कहना है कि नीट परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के मुद्दे पर सरकार को जवाब देना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि वांगचुक को जिस तरीके से प्रदर्शन स्थल से हटाया गया, वह उचित नहीं था और अस्पताल में भी उन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है.
सोनम वांगचुक और यूथ प्लेटफॉर्म कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. इसी मांग को लेकर संसद के मानसून सत्र के पहले दिन संसद तक मार्च निकालने का ऐलान किया गया है.
अस्पताल के बाहर बिहार के मधुबनी से पहुंचे प्रदीप पासवान ने भी वांगचुक का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि वांगचुक ने अभी तक अपना अनशन समाप्त नहीं किया है, इसलिए उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाने की जरूरत नहीं थी. उन्होंने लोगों से संसद मार्च में शामिल होने की अपील भी की.
हालांकि, अस्पताल के बाहर मौजूद सभी लोग प्रदर्शन से जुड़े नहीं थे. इलाज के लिए आए कुछ मरीज और उनके परिजन कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के कारण अस्पताल में प्रवेश करने में परेशानी का सामना करते दिखे. कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें न तो जंतर मंतर पर चल रहे प्रदर्शन की जानकारी थी और न ही सोनम वांगचुक के बारे में पता था.
गौरतलब है कि मोहम्मद दीपक इसी साल उस समय चर्चा में आए थे, जब उत्तराखंड के कोटद्वार में उन्होंने एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार के साथ हो रही बदसलूकी का विरोध किया था. उस दौरान उन्होंने अपना परिचय "मोहम्मद दीपक" बताकर लोगों का ध्यान खींचा था.