
TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने एकबार फिर बागी होने के संकेत दे दिए हैं. मंगलवार को 'शहीद दिवस' रैली में ममता बनर्जी से उनकी कहासुनी हो गई, जिसकी वजह से वह कार्यक्रम खत्म होने से पहले ही मंच छोड़कर चले गए.
कल्याण बनर्जी ने ममता बनर्जी गुट की 'शहीद दिवस' रैली में लगभग 23 मिनट का भाषण देने के तुरंत बाद मंच छोड़ दिया. उन्हें दिए गए वक्त से ज्यादा बोलने पर पार्टी प्रमुख के साथ उनकी बहस हुई थी और बाद में उन्होंने कहा कि वह इस घटना से 'बहुत दुखी' हैं.
ममता बनर्जी खेमे के मुताबिक, बिड़ला तारामंडल के पास हुई रैली में वक्ताओं की लिस्ट बहुत लंबी थी और सभी नेताओं को निर्देश दिया गया था कि वे अपने भाषण छोटे रखें ताकि सभी को बोलने का मौका मिल सके.
हालांकि, कल्याण बनर्जी ने लगभग साढ़े 22 मिनट तक भाषण दिया और BJP के साथ-साथ विधानसभा में विपक्ष के नेता रिताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले अलग हुए तृणमूल गुट पर भी तीखा हमला किया.
उन्होंने कहा, 'ममता बनर्जी ही असली तृणमूल हैं. वहां BJP समर्थित मंच तो बना लिया गया है, लेकिन कार्यकर्ता उनके साथ नहीं हैं. BJP समर्थित जो विधायक पार्टी पर कब्जा करने का सपना देख रहे हैं, वे असल में अपनी ही कब्र खोद रहे हैं.'
मंच पर मौजूद सूत्रों ने दावा किया कि जब कल्याण बनर्जी भाषण दे रहे थे, तभी ममता बनर्जी वहां पहुंचीं और उन्होंने उन्हें भाषण खत्म करने का इशारा किया. जब उन्होंने बोलना जारी रखा, तो पार्टी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने भी उन्हें भाषण खत्म करने का इशारा किया.
भाषण खत्म होने के बाद, ममता बनर्जी ने कथित तौर पर देरी पर नाराजगी जताई, जिससे थोड़ी बहस हुई और सांसद ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी या TMC प्रमुख के भाषण का इंतजार किए बिना मंच छोड़ दिया.

मंच पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कार्यक्रम स्थल से जाने से पहले कल्याण बनर्जी को पार्टी प्रमुख के साथ बहस करते हुए भी देखा गया था.
निर्धारित वक्त से ज्यादा बोलने के आरोपों को खारिज करते हुए सेरामपुर के सांसद कल्याणा ने कहा, 'मैंने अपने समय से ज़्यादा नहीं बोला...'
'जब मैं बोल रहा था, तब अभिषेक बनर्जी मंच पर आए, इसलिए मुझे रुकना पड़ा. फिर दीदी आईं, और मैंने फिर से अपना भाषण रोक दिया. मैंने कभी भी अपने समय से ज़्यादा नहीं बोला. लेकिन मैं ऐसे अपमान का हकदार नहीं हूं. ऐसे व्यवहार से मुझे बहुत दुख हुआ है. जब बाकी सब चले गए हैं, तब मैं पार्टी के लिए इतनी मेहनत कर रहा हूं. मैं इसका हकदार नहीं हूं.'
यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने इस घटना के बाद ममता बनर्जी से बात की है, उन्होंने 'नहीं' में जवाब दिया.
इस सवाल पर कि क्या यह घटना उन्हें ममता बनर्जी का खेमा छोड़ने के लिए प्रेरित कर सकती है, उन्होंने पलटकर पूछा, 'यह कैसा सवाल है?'
ममता बनर्जी खेमे के सूत्रों ने बताया कि देरी की वजह से आयोजकों को कार्यक्रम से कई तय वक्ताओं को हटाना पड़ा, जिनमें लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद, राज्यसभा सांसद डोला सेन और सागरिका घोष, और राजीव कुमार शामिल थे.
कल्याण बनर्जी ममता बनर्जी के सबसे करीबी राजनीतिक सहयोगियों में गिने जाते रहे. वे अक्सर उनके आवास पर बैठकों में शामिल होते रहे और बागियों के खिलाफ सबसे मज़बूत आवाज़ बनकर उभरे. हालांकि, पार्टी के अंदर कल्याण बनर्जी के मतभेद भी रहे हैं.
हाल ही में, कलकत्ता हाई कोर्ट में एक मामले में कानूनी प्रतिनिधित्व को लेकर हुए विवाद के दौरान उन्होंने सार्वजनिक रूप से अभिषेक बनर्जी की आलोचना की थी और कहा था कि ममता बनर्जी को यह तय करना होगा कि 'पार्टी में कौन रहेगा - अभिषेक या मैं'.
बाद में ये मतभेद सुलझा लिए गए और दोनों नेताओं ने सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के प्रति सम्मान व्यक्त किया.